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आरव और कुएँ का रहस्य

By Ramu 09 Sep 2026 4 minutes Time To Read Share 🖨️ Print Story 🖨️ Print Story

गाँव में आरव नाम का एक प्यारा बच्चा रहता था। वह बहुत समझदार और ज़िम्मेदार था। आरव को पहेलियाँ सुलझाना बहुत पसंद था। गाँव में सब जानते थे कि आरव किसी भी मुश्किल पहेली को हल कर सकता है। वह हमेशा आस-पास की चीज़ों को ध्यान से देखता था और उनके बारे में सोचने की कोशिश करता था।

एक दिन, गाँव में बहुत बड़ी समस्या आ गई। गाँव के कुएँ से पानी निकालना मुश्किल हो गया था। कुआँ पूरे गाँव के लिए बहुत ज़रूरी था, क्योंकि वहीं से सबको पानी मिलता था। लोगों ने देखा कि कुएँ से पानी निकालने वाला हत्था (हैंडल) कहीं गायब था या टूट गया था। सब परेशान थे कि अब पानी कैसे निकलेगा।

आरव ने देखा कि सब कितने दुखी हैं। उसे लगा कि उसे कुछ करना चाहिए। उसने कुएँ के पास जाकर उसे ध्यान से देखना शुरू किया। जैसे वह कोई बड़ी पहेली सुलझा रहा हो। उसने हर कोने में देखा, हर पत्थर के नीचे झाँका। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हत्था कहाँ चला गया। वह थोड़ा उदास हो गया, पर उसने हार नहीं मानी।

आरव को याद आया उसके प्यारे दादाजी रामू। दादाजी बहुत समझदार थे और हमेशा अच्छी-अच्छी कहानियाँ सुनाते थे। आरव उनके पास भागा।

"दादाजी, दादाजी! कुएँ का हत्था गायब है। पानी कैसे निकलेगा?" आरव ने चिंता से पूछा।

दादाजी रामू ने प्यार से आरव के सिर पर हाथ फेरा। "चिंता मत करो, मेरे बच्चे। चलो, हम मिलकर सोचते हैं।"

दादाजी ने आरव से पूछा, "आरव, क्या तुमने हर छोटी जगह देखी? कभी-कभी बड़ी समस्या का हल छोटी सी बात में छुपा होता है। क्या तुम्हें याद है, कल जब तुम कुएँ के पास खेल रहे थे, तो क्या तुमने कोई अजीब आवाज़ सुनी थी या कुछ लुढ़कते हुए देखा था?"

दादाजी की बात सुनकर आरव सोचने लगा। "हाँ दादाजी! मुझे याद आया! कल शाम को जब मैं गेंद से खेल रहा था, तो एक छोटी सी चीज़ 'ठक' करके झाड़ियों की तरफ़ लुढ़क गई थी। मैंने सोचा वह कोई पत्थर होगा।"

"शाबाश!" दादाजी मुस्कुराए। "चलो, वहीं देखते हैं।"

आरव और दादाजी कुएँ के पास वाली झाड़ियों की तरफ़ गए। आरव ने ध्यान से झाड़ियों के अंदर देखा और तभी उसे कुछ चमकता हुआ दिखा। "मिल गया दादाजी! यह रहा कुएँ का हत्था!"

सचमुच, कुएँ का छोटा सा धातु का हत्था झाड़ियों में छिपा हुआ था। वह टूटा नहीं था, बस लुढ़क कर दूर चला गया था। आरव और दादाजी ने मिलकर उसे वापस कुएँ पर लगा दिया। अब पानी आसानी से निकल रहा था।

पूरा गाँव आरव और दादाजी को धन्यवाद कहने लगा। आरव बहुत खुश था। उसने सीखा कि जब कोई समस्या बहुत बड़ी लगे, तो शांत मन से सोचना चाहिए और कभी-कभी बड़ों की मदद लेना भी बहुत अच्छा होता है।

जीवन का अनमोल सबक:
जीवन में जब कोई समस्या आए, तो घबराना नहीं चाहिए। हर समस्या का कोई न कोई हल ज़रूर होता है। ध्यान से देखने, सोचने और बड़ों से सलाह लेने से मुश्किल से मुश्किल पहेली भी सुलझ जाती है। मिलकर काम करने से बड़ी से बड़ी चुनौती आसान हो जाती है।

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  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
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