गंगू बोलता तो है, लेकिन सब उसे गूँगा गंगू कहते हैं। शायद उसका यह नाम इसलिए पड़ा है कि वह न बोलने वाली चीजों की बात भी समझ लेता है और उसे ठीक से दूसरों को बता देता है।
एक दिन उसकी बहन रानी ने उसे चार छोटे छोटे चित्र दिए। पहला चित्र था उगते सूरज का, दूसरा चित्र था चाँद का, तीसरा चित्र था कुकडूँ कूँ करते मुर्गे का, और चैथा चित्र था उड़ते हुए उल्लू का।
रानी ने कहा, गंगू तुम तो बड़े समझदार हो। जो चीजें बातें नहीं करतीं उनकी बात भी तुम समझ लेते हो। तो बताओ कि यह चार चित्र क्या कह रहे हैं?
गंगू ने चित्रों को ध्यान से देखा और सोंचने लगा कि जब सुबह सूरज उगता है तो मुर्गा कुकडूँ कूँ बोलता है। रात होती है तो उल्लू को दिखना शुरु हो जाता है और वह तभी उड़ता है। यह समझ में आते ही उसने चित्रों को क्रम से सजा दिया।
क्रम में सजते ही, चित्र अपनी बात कहने लगे।
रानी के पास अपनी बात कहने वाले अनेकों चित्र हैं। क्या आप उन चित्रों को देख कर उनकी बात समझ सकते हैं? और हमें बता सकतें हैं?