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गूँगा गंगू

गंगू बोलता तो है, लेकिन सब उसे गूँगा गंगू कहते हैं। शायद उसका यह नाम इसलिए पड़ा है कि वह न बोलने वाली चीजों की बात भी समझ लेता है और उसे ठीक से दूसरों को बता देता है।

एक दिन उसकी बहन रानी ने उसे चार छोटे छोटे चित्र दिए। पहला चित्र था उगते सूरज का, दूसरा चित्र था चाँद का, तीसरा चित्र था कुकडूँ कूँ करते मुर्गे का, और चैथा चित्र था उड़ते हुए उल्लू का।

रानी ने कहा, गंगू तुम तो बड़े समझदार हो। जो चीजें बातें नहीं करतीं उनकी बात भी तुम समझ लेते हो। तो बताओ कि यह चार चित्र क्या कह रहे हैं?
गंगू ने चित्रों को ध्यान से देखा और सोंचने लगा कि जब सुबह सूरज उगता है तो मुर्गा कुकडूँ कूँ बोलता है। रात होती है तो उल्लू को दिखना शुरु हो जाता है और वह तभी उड़ता है। यह समझ में आते ही उसने चित्रों को क्रम से सजा दिया।

क्रम में सजते ही, चित्र अपनी बात कहने लगे।

रानी के पास अपनी बात कहने वाले अनेकों चित्र हैं। क्या आप उन चित्रों को देख कर उनकी बात समझ सकते हैं? और हमें बता सकतें हैं?

हमारे विषय में

अच्छा इंसान बनने के लिए कोई निश्चित पाठ्यपुस्तक नहीं होती।
एक अच्छा मनुष्य भीतर से जागने वाली प्रेरणा से बनता है।
यह प्रेरणा अच्छी और सार्थक साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होती है।
उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है।
हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
    अच्छी किताबें ही उन्हें महान बना देती हैं।