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डब्बू का डब्बा

कुछ दिनों पहले की बात है, डब्बू ने एक छोटी कहानी लिखी। कहानी की हर लाइन को उसने, लकड़ियों की अलग-अलग पट्टियों पर लिखा।
उसने उन पट्टियों को क्रम से इस तरह से सजाया कि यदि पट्टियों पर लिखे वाक्यों को क्रमवार पढ़ा जाए तो कहानी हर बच्चे की समझ में आ जाए।
डब्बू ने उन पट्टियों को एक डिब्बे में रखा और अपने दोस्त चिन्टू के घर चल पड़ा।
रास्ते में डिब्बा फट गया। कहानी की पट्टियाँ सड़क पर बिखर गईं। डिब्बा फटने से डब्बू दुखी हो गया। रास्ते में आ-जा रही, साइकिलों, मोटरों, और बसों की आवाजें सुन कर वह डर गया। आनन फानन में उसने बिखरी पट्टियाँ बटोरीं और उन्हें एक झोले में डाला और चिन्टू के घर आ गया।
घर आ कर उसने झोले को दोस्त के सामने उलट दिया। वह चिन्टू से बोला, ’’चिन्टू कहानी की लाइनों को सही क्रम में लगाओ, तब कहानी समझ में आयेगी।
चिन्टू बड़ी देर तक प्रयास करता रहा लेकिन पट्टियों को सही क्रम में नहीं लगा पाया और हताष हो कर बैठ गया।
अब चिन्टू तुमसे पूछ रहा है कि क्या तुम उसकी मदद कर सकते हो? यदि तुम पट्टियों को सही क्रम में लगा दो तो चिन्टू तुम्हारा सच्चा दोस्त बन जाएगा।
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हमारे विषय में

अच्छा इंसान बनने के लिए कोई निश्चित पाठ्यपुस्तक नहीं होती।
एक अच्छा मनुष्य भीतर से जागने वाली प्रेरणा से बनता है।
यह प्रेरणा अच्छी और सार्थक साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होती है।
उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है।
हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
    अच्छी किताबें ही उन्हें महान बना देती हैं।