एक दिन की बात है, सनहा की मम्मी उसकी अलमारी साफ़ कर रहीं थी। अलमारी तरह तरह के समानों से खचाखच भरी थी। अलमारी में कपड़े , खिलौने, किताबों और न जाने क्या क्या चीजे बेतरतीबी से रखी थीं ।
अलमारी देखकर वह सनहा के ऊपर बड़बड़ाने लगीं । बोलीं , ’’इस लड़की ने तो अलमारी को कबाड़खाना बना रखा है। कोई भी चीज़ ठीक जगह पर नहीं रखी है’’।
यह कहते हुए उन्होंने, ऊपर रखी एक चादर को खींचा तो एक एक संदुक्ची जमीन पर आ गिरी। संदुक्ची पर लिखा था, ’’सनहा की संदुकची’’ ।
संदुक्ची गिरने से मम्मी डर गई। वह संदुक्ची खोलना चाहती हैं पर खोल नहीं रही हैं । क्या आप देखना चाहते हैं कि संदुक्ची में क्या भरा है? धयान रहे संदुकची अगर हल गयी तो उसे बंद करने के लिए सूझबूझ की ज़रूरत होगी । सूझबूझ के बिना संदुकची बंद नहीं होगी और सनहा को पता चल जायेगा की किसी ने उसके पीछे उसके सामन के साथ छेड़छ।ड़ की है ।
वोह रोयेगी, चिल्लाएगी और ग़ुस्सा करेगी। क्या आप सूझबूझ वाले हैं। बताइये तो फिर आगे की बात करी जाए।