सामूहिक प्रयास
Well done!
उद्देश्य
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यह बताना है कि जो कार्य अकेले व्यक्ति के लिए कर पाना कठिन या असम्भव होता है, वह कार्य, सामूहिक प्रयास द्वारा बड़ी आसानी से हो जाता है । ऐसा कार्य समूह के प्रत्येक सदस्य के लिए अपार खुशी का कारण भी बनता है ।
कहानी
एक जंगल में सभी जानवर आपस में मिल-जुल कर बड़े सद्भाव से रहते थे । उनके बीच न तो किसी प्रकार का मन मुटाव था और न ही ईषर्या द्वेष था । सब एक दूसरे की प्रगति देख कर खुश होते थे और एक दूसरे की सराहना करते थे ।
इस जंगल का राजा, एक बलवान शेर था । शेर अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखता था और सदैव उनके हित में सोचता था । वह अपनी प्रजा की भलाई के लिए तरह तरह के लाभकारी कार्य करवाता था और उन्हें अनेकों प्रकार की सुविधाएं देता था । उसने जंगल में स्कूल, अस्पताल, पार्क आदि बनवाए थे ।
जंगल के सभी जानवर, शेर द्वारा दी गई सभी सुविधाओं का लाभ उठाते थे और उसकी उदारता के गुण गाते थे ।
शेर को अपनी उदारता का एहसास था, लेकिन वह हमेशा यह सोचता था कि मैं तो अच्छे राजा के सभी काम कर रहा हूँ, लेकिन इससे प्रजा का भला हो रहा है या नहीं, वह यह जानना जरूरी समझता था ।
एक दिन उसने अपनी मंत्री लोमड़ी को बुलाया । लोमड़ी बहुत बुद्धिमान और चतुर थी । वह हमेशा राजा को सही सलाह देती थी ।राजा-शेर भी वही करता था, जो लोमड़ी कहती थी ।
लोमड़ी ने शेर को सलाह दी कि जंगल में कुछ गुप्तचर भेजे जाएं । वह जगह जगह जा कर यह पता लगाएं कि जंगल के जानवर, शेर के राज में कैसा अनुभव कर रहें ।
राजा को लोमड़ी की सलाह उचित लगी । उसने पूछा गुप्तचर का काम कौन करेगा ? लोमड़ी ने इस काम के लिए उल्लुओं का नाम सुझाया ।
शेर ने लोमड़ी से पूछा उल्लू ही क्यों ? तो लोमड़ी ने बताया कि उल्लू रात में जा कर जगह जगह बैठ जाएंगे । सब जानते हैं कि उन्हें दिन में दिखाई नहीं देता । इसलिए वह उल्लू को देख लेने पर भी अपने काम उसी प्रकार करते रहेंगे जैसे वह हमेशा करते रहते हैं ।
पर उल्लू उन सबकी बातें बड़े ध्यान से सुनते रहेंगे और अपनी मैमोरी में रिकाॅर्ड करते रहेंगे ।
लोमड़ी ने शेर को बताया कि दुनिया के अधिकांश लोग, उल्लू को बेवकूफ समझते हैं लेकिन वह बहुत बुद्धिमान होते हैं । शेर को लोमड़ी की यह बात सुनकर बड़ा अचम्भा हुआ । वह मन ही मन लोमड़ी के अनुभव और ज्ञान को सराहने लगा ।
अगले दिन उल्लुओं को शेर के दरबार में बुलाया गया । उन्हें सारी योजना बताई गई । यह भी बताया कि उन्हें क्या करना है, और रात होते ही उन्हें, उनके मिशन पर भेज दिया गया ।
सभी उल्लू अगले कई दिनों तक जंगल के जानवरों की मनस्थिति को परखते रहे और वस्तुस्थिति का जायजा लेते रहे । उन्होंने सारे जानवरों की बातें ध्यान से सुनी और जब सुनने के लिए कुछ नहीं बचा तो लौट आए ।
लौट कर उन्होंने शेर को बताया कि सारे जानवर, आपसे बहुत खुश हैं । वह हर पल आपका गुणगान करते हैं । वह कहते हैं, कि इतना अच्छा राजा मिलना बहुत मुश्किल है ।
सच तो यह की सारे जानवर अपना अपना कार्य ठीक से कर रहे हैं । अपना कर्तव्य निभा रहे हैं । लेकिन उनमें उत्साह नहीं है ।सारी व्यवस्थाए ठीक होने पर भी उन्हें मजा नहीं आ रहा है ।
आपको उनमें उत्साह का संचार करने और उमंग भरने के लिए कुछ करना होगा । आप तो जानते ही हैं कि उत्साह से न केवल व्यक्ति का व्यक्तित्व चमकता है अपितु उसके द्वारा किए गये कार्यो में भी निखार आता है ।
शेर उल्लुओं की बात से बहुत प्रभावित हुआ । उसने तुरन्त ही लोमड़ी को बुलाया और पूछा कि ऐसे में क्या करना चाहिए ।
लोमड़ी ने बताया कि लोगों में उत्साह का संचार करने के लिए किसी बड़े उत्सव का आयोजन करना अच्छा रहेगा । उत्सव में नृत्य, गाना बजाना, खेल कूद आदि का आयोजन किया जाए । सभी जानवर उत्सव में आएं । खेलें, सुनें सुनाएं और मौज मनाएं ।
शेर को लोमड़ी का सुझाव बहुत अच्छा लगा । उसने जंगल के सभी मेंढकों को बुलाया और कहा कि जा कर सारे जंगल में टर्र-टर्र करो और ऐलान कर दो कि इस माह, जब आकाश में पूरा चांद चमकेगा तो अगले दिन उत्सव मनाया जाएगा । उत्सव मनोरंजन आधारित होगा । संगीत, नृत्य, नाटक सहित अनेकों प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा । सभी जानवर सादर आमंत्रित हैं ।
जैसा शेर ने कहा था, मेढ़ कों ने जंगल के कोने-कोने में जाकर उत्सव का ऐलान कर दिया । उत्सव की खबर सुनते ही सारे जानवर खुश हो गये । सभी योजनाएं बनाने लगे कि हम यह करेंगे, हम वह करेंगे।
उसी दिन शाम को तितलियाँ, कीट, पंतगे और मोर आपस में मिले और तय किया कि वह सामूहिक नृत्य करेंगे । मोटे काले भौरे ने सुझाव दिया कि यदि बीच-बीच में रंग बिंरगी लाइटें चमकाई जाएं तो उनके जैसे काले लोग अंधेरे में नृत्य करते हुए दिख जायेंगे और दर्शकों को मजा आ जाएगा । इस कार्य के लिए जुगनुओं को आमन्त्रित किया गया जिन्होंने अपनी भागीदारी तुरन्त स्वीकार कर ली ।
गाने के लिए मधुमक्खियों ने गुनगुन गाना तैयार किया । मच्छरों और मक्खियों ने भिन-भिन गीत गाने का निश्चय किया ।
रंगबिरंगी चिड़ियों का दल सारे जंगलवासियों का मन मोह लेना चाहता था अत: उन्होंने चील कौवे और तोतों के साथ मिलकर फ़्लाइंग डाॅस दिखाने की योजना बनायी ।
हिरन, खरगोश, चूहे और गिलहरी ने रेस में भाग लेने के लिए अपने अपने नाम लिखा दिए ।
ऊँट, हाथी और घोड़ों ने कहा कि वह उत्सव को बच्चों के लिए खूब मनोरंजक बना देंगे । ऊँट बोला मैं उन्हे अपनी पीठ पर बैठा कर सैर कराऊँगा । हाथी ने कहा कि वह बच्चों को अपनी सूँड़ में बैठाकर झूला झुलाएगा । घोड़े, जिराफ और गधों ने कहा कि वह मिलकर बच्चों को करतब दिखाएंगे ।
उत्सव की सूचना मिलते ही सारे जानवर अपनी अपनी तैयारी में जुट गए और रोज छिप कर प्रैक्टिस करने लगे ।
अन्त में वह दिन आ गया जिसका सबको इन्तजार था । हिप्पों की टीम ने मिल कर बड़ा सुन्दर पण्डाल सजाया जो देखते ही बनता था । जिराफ ने बड़ा कलात्मक स्टेज तैयार किया था, जहाँ सारी प्रस्तुतियाँ होनी थीं ।
बन्दरों ने केले के बड़े-बड़े पत्तों से मेगाफोन तैयार किए थे और उत्सव में होने वाले सारे एनाउन्समेन्ट की जिम्मेदारी ली थीं ।
जैसे ही जानवर उत्सव-प्रांगण में आए तो उनका मन कुछ खाने को ललचाने लगा । दूर जल रही भट्टी के पास से अनेकों गाय, भैंसे खड़ी थीं । वह पिछले दो दिनों से दूध निकाल निकाल कर इक्ट्ठा कर रहीं थीं । उन्होंने निश्चय किया था कि वह हर आने वाले जानवर को अपनी तरफ से वेलकम ड्रिंक पिलाएंगी ।
चूहों ने गोदाम से ला कर उन्हें खूब चावल दिए थे । भैंसे भट्टी पर चावल की खीर बना रही थीं जो सभी जानवरों को दोपहर के खाने के साथ परोसी जानी थी ।
खरगोशों ने खेतों से लाकर गाजरों का ढेर लगा दिया था, जब चींटियों ने गाजरें देखीं तो वह खरगोश की योजना समझ गयीं ।उन्होंने वहाँ खूब सारी चीनी ला कर रख दी ।
गिलहरियाँ कहाँ पीछे हटने वाली थीं, उन्होंने कई तरह की मेवा का इन्तजाम कर दिया । बकरियाँ समझ गई कि उन्हें गाजर का हलुआ बनाना है । वह एक और भट्टी जलाकर शुरू हो गईं ।
जंगल में हर जानवर खुश था । उनके दिल में एक नई उमंग थी । मन में नया उत्साह था । हर जानवर आज यह चाहता था कि वह अपनी तरफ से कुछ ऐसा करे कि उत्सव में मजा आ जाये ।
अचानक बिगुल बजा और बन्दरों ने शेर राजा के आने का ऐलान किया । उनके साथ चीते, तेंदुए, और भालू भी आए । उनके आते ही भेड़ियों और लकडबग्घों ने सुरक्षा व्यवस्था सम्भाल ली ।
बत्तखों, मुर्गियों और तीतरों ने अतिथियों का स्वागत किया और मंगल गीत गाया । उन्होंने शेर को आमन्त्रित किया कि वह स्टेज पर आए और उत्सव का उद्घाटन करे ।
शेर स्टेज पर आ कर तीन बार जोर से दहाड़ा और बोला उत्सव आरम्भ हुआ । सभी प्रोग्राम, खेल-कूद और खाना-पीना आरम्भ किया जाए । इतना बड़ा आयोजन, इतने सुन्दर ढंग से आयोजित करने के लिए मेरी शुभ कामनाएं । ईश्वर हमारे इस उत्सव को सफल बनाएं ।
शेर के यह कहते ही खेल प्रतियोगिताएं षुरू हो गईं । चीतें, खरगोश और हिरन तेजी से दौड़े और सभी तरह की रेसों में बाजी मार ले गए ।
मछलियों ने तैराकी में अपना जलवा दिखाया । कछुओं को धीमी रेस में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया ।
नृत्य और संगीत के र्काक्रम जब आरम्भ हुए तो तालियों की गड़गड़ाहट जो एक बार शुरू हुई तो फिर रूकी ही नहीं । तितलिंयों को दर्शकों की बेहद डिमान्ड पर एक ही नृत्य, पाँच बार दिखाना पड़ा ।
मोर का नृत्य भी बहुत सराहा गया । उसको उसकी रंगबिरंगी डे्रस के लिए पुस्कार भी दिया गया ।
बच्चों ने तो झूला झूलने की हद कर दी । शाम तक हाथी और ऊँट थक कर चूर हो गए लेकिन बच्चों की खुशी देख कर वह दिन भर मुस्कुराते रहे और रात तक उनका मनोरंजन करते रहें ।
खाने के पण्डाल में तो एक मिनट भी भीड़ कम न हुई । गाजर का हलुआ तो इतना डिमान्ड में रहा कि खरगोशों की टीम को पाँच बार खेतों से जा कर गाजरें लानी पड़ीं ।
उत्सव में कोई भी ऐसा नहीं था, जिसने आयोजन को सराहा न हो । जैसे-जैसे शाम ढलने लगी, सब जानवर एक दूसरे से कहने लगे कि समय इतनी जल्दी क्यों भागता है ?
सारे जानवरों को यह समझने में बड़ी देर लगी की हर चीज जो आरम्भ होती है, उसका अंत सुनिश्चित है ।
शाम ढलने से पहले उत्सव का भी अन्त हुआ । जानवरों का उत्साह और प्रसन्न्ता देख कर शेर भी भावुक हो उठा । वह दिल से चाहता था कि सब एक नई आशा, नई अनुभूति और अपार प्रसन्नता ले कर घर जाएं ।
वह स्टेज पर आया और बोला, अब से जंगल में हर वर्ष, इस तरह के उत्सव का आयोजन होगा । आप सभी लोग इसी तरह मिल जुल कर जंगल में रहते रहिए और एक दूसरे का सहयोग करते रहिए ।
इसके बाद, सभी जानवर एक नई उम्मीद और नई खुशी लिए अपने अपने घर की ओर चल दिए ।
हर जानवर यही सोचता चला जा रहा था कि, इतने बड़े और इतने सफल आयोजन की तो उसने कल्पना भी नहीं की थी । लेकिन सबने यह जान लिया था कि इस उत्सव की सफलता, सामूहिक प्रयास का ही परिणाम थी । किसी भी आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी की भागीदारी आवश्यक होती है ।
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