गोजी और तेज़पंखी की दोस्ती: समुद्र तट का सपना
Well done!
समुद्र किनारे एक सुंदर जंगल में, गोजी नाम की एक बहुत ही प्यारी और दयालु बंदरिया रहती थी। वह इतनी हुनरमंद थी कि उसकी बनाई पेंटिंग सब जानवरों को बहुत पसंद आती थीं। गोजी अपनी कला से समुद्र, रंगीन मछलियाँ और सुंदर सीपियाँ बनाती थी। सब उसे उसकी पेंटिंग के लिए जानते थे और उसकी खूब तारीफ करते थे।
गोजी को समुद्र तट बहुत पसंद था। वह अक्सर वहाँ बैठकर घंटों अपनी पेंटिंग बनाती थी। लेकिन एक बात गोजी को बहुत परेशान करती थी। धीरे-धीरे, लोग समुद्र तट पर कूड़ा-कचरा, खासकर प्लास्टिक फेंकने लगे थे। यह सब देखकर गोजी का दिल दुखता था। उसे पता था कि यह कचरा समुद्री जीवों के लिए बहुत खतरनाक है। वह समुद्र तट को साफ करना चाहती थी, लेकिन जब वह इतने बड़े काम के बारे में सोचती, तो उसे लगता, "यह तो बहुत बड़ा काम है! मैं अकेली कैसे कर पाऊँगी?" यह सोचकर वह अक्सर उदास हो जाती और सोचती, "कल से शुरू करूँगी," लेकिन फिर कभी शुरू नहीं कर पाती। यह उसकी एक बुरी आदत बन गई थी – किसी भी बड़े काम को टाल देना या उससे घबरा जाना।
गोजी की एक बहुत अच्छी दोस्त थी, तेज़पंखी, जो एक समझदार और फुर्तीली चील थी। तेज़पंखी अपनी तेज़ नज़रों के लिए जानी जाती थी और हमेशा सही सलाह देती थी। उसने गोजी को कई दिनों से उदास देखा। एक दिन, तेज़पंखी गोजी के पास आई, जब वह एक बड़ी चट्टान पर बैठकर उदास थी, उसके हाथ में ब्रश था पर वह पेंट नहीं कर रही थी।
तेज़पंखी ने प्यार से पूछा, "क्या हुआ, गोजी? तुम इतनी परेशान क्यों हो?"
गोजी ने गहरी साँस ली और अपनी समस्या बताई, "तेज़पंखी, मैं इस समुद्र तट को साफ करना चाहती हूँ। इतना सारा प्लास्टिक है! लेकिन जब मैं सोचती हूँ कि पूरा समुद्र तट साफ करना है, तो मुझे हिम्मत नहीं होती। मैं बस इसे टालती रहती हूँ।"
तेज़पंखी ने मुस्कुराते हुए कहा, "ओह, तो यह बात है! गोजी, कोई भी बड़ा काम एक बार में नहीं होता। हमें उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटना चाहिए। आज हम सिर्फ़ तुम्हारे पसंदीदा पेंटिंग वाली जगह के पास का छोटा-सा हिस्सा साफ करेंगे, ठीक है?"
गोजी ने तेज़पंखी की बात मानी। दोनों दोस्त मिलकर काम करने लगे। तेज़पंखी अपनी ऊँचाई से प्लास्टिक के टुकड़े देखती और गोजी को बताती, "देखो, गोजी! उस बड़ी सीप के पास एक बोतल है!" गोजी ने छोटे-छोटे कदमों से काम करना शुरू किया। कुछ ही देर में, उन्होंने उस छोटे से हिस्से को बिल्कुल साफ कर दिया। गोजी को बहुत अच्छा लगा। उसने देखा कि छोटे से प्रयास से भी कितना फर्क पड़ता है।
उसे देखकर दूसरे जानवर भी प्रेरित हुए। कुछ कछुए, कुछ केकड़े, और कुछ और बंदर भी उनकी मदद करने आ गए। सबने मिलकर काम किया। धीरे-धीरे, समुद्र तट साफ होने लगा। गोजी ने महसूस किया कि जब हम किसी काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटते हैं और दोस्तों की मदद लेते हैं, तो कोई भी काम मुश्किल नहीं लगता। उसकी टालने की बुरी आदत कम होने लगी थी। उसने एक बड़ी चट्टान पर 'स्वच्छ समुद्र तट, सुंदर जीवन' की एक सुंदर पेंटिंग भी बनाई, ताकि दूसरे भी प्रेरित हों।
गोजी और तेज़पंखी की दोस्ती ने न केवल समुद्र तट को साफ किया, बल्कि गोजी को अपनी बुरी आदत से भी छुटकारा दिलाया। गोजी बहुत खुश थी कि उसने समुद्र और उसके जीवों की मदद की।
जीवन का सबक: जीवन में कोई भी बड़ी समस्या या काम जब बहुत बड़ा लगे, तो उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट लो। एक बार में एक छोटा हिस्सा पूरा करो। ऐसा करने से काम आसान लगने लगता है और पूरा भी हो जाता है। अपने दोस्तों और परिवार की मदद लेने से कभी मत हिचकिचाओ, क्योंकि मिलकर काम करने से बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी हल हो जाती हैं।
क्या आप कहानी पढ़ने के लिए पॉइंट्स कमाना चाहते हैं? लॉग इन करने के लिए यहां क्लिक करें
क्या आप कमेंट पोस्ट करके पॉइंट्स कमाना चाहते हैं? लॉग इन करने के लिए यहां क्लिक करें
फ़िल्टर
-
आयु वर्ग
-
कहानी का नायक
-
वातावरण
-
कहानी का प्रकार
-
मूल भावना
-
जीवन सन्देश
-
कहानी का भाव







कमेंट
उत्तर छोड़ दें