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सोनू और दोस्ती के रंग

By Vaishali Saxena 29 Jul 2026 3 minutes Time To Read Share 🖨️ Print Story 🖨️ Print Story

गाँव में एक प्यारी और चतुर बच्ची थी, जिसका नाम सोनू था। उसे चित्र बनाना बहुत पसंद था। सोनू के गाँव में सब उसकी चित्रकला के दीवाने थे; जब भी वह कोई चित्र बनाती, तो सब उसे देखकर वाह-वाह करते थे।

सोनू को चित्र बनाने में तो बहुत मज़ा आता था, लेकिन कभी-कभी वह थोड़ा अकेला महसूस करती थी। वह देखती थी कि गाँव के दूसरे बच्चे एक साथ खेलते, कूदते और खूब मज़ा करते हैं। सोनू भी उनके साथ मज़ा करना चाहती थी, नए दोस्त बनाना चाहती थी, लेकिन उसे समझ नहीं आता था कि कैसे उनसे बात शुरू करे।

सोनू का एक बड़ा भाई था, जिसका नाम बंटी था। बंटी बहुत प्यारा और समझदार था। वह सोनू को बहुत प्यार करता था और हमेशा उसका ध्यान रखता था। एक दिन बंटी ने देखा कि सोनू उदास बैठी है और दूर से बच्चों को खेलते हुए देख रही है।

"क्या हुआ सोनू?" बंटी ने प्यार से पूछा।

सोनू ने कहा, "भैया, मैं भी उन बच्चों के साथ खेलना चाहती हूँ, खूब मज़ा करना चाहती हूँ और नए दोस्त बनाना चाहती हूँ। पर मुझे समझ नहीं आता कि कैसे मैं इसमें शामिल होऊँ।"

बंटी ने थोड़ा सोचा और फिर मुस्कुराते हुए कहा, "सोनू, तुम्हारे पास तो एक जादू है!"

सोनू हैरान हुई, "जादू? क्या जादू भैया?"

बंटी बोला, "तुम्हारी चित्रकला का जादू! तुम इतनी अच्छी पेंटर हो, क्यों न हम इसी जादू का इस्तेमाल करें?"

सोनू की आँखों में चमक आ गई। "कैसे भैया?"

बंटी ने कहा, "देखो, गाँव में जल्द ही एक मेला लगने वाला है। क्यों न हम एक बड़ी सी दीवार पर रंग-बिरंगे फूल और खुशियों के चित्र बनाएँ? तुम शुरुआत करो, और जब दूसरे बच्चे इसे देखेंगे, तो वे भी तुम्हारे साथ जुड़ना चाहेंगे। तुम उन्हें भी रंग भरने के लिए बुला सकती हो।"

सोनू को बंटी का विचार बहुत पसंद आया। उसमें हिम्मत आ गई। अगले दिन, सोनू और बंटी ने मिलकर गाँव के चौपाल के पास एक साफ दीवार चुनी। सोनू ने बड़े-बड़े फूलों और उड़ती हुई तितलियों के चित्र बनाने शुरू किए। बंटी ने पास खड़े होकर उसका उत्साह बढ़ाया और छोटे-छोटे ब्रश व रंग तैयार किए।

धीरे-धीरे, गाँव के बच्चे सोनू को दीवार पर चित्र बनाते देखने के लिए इकट्ठा होने लगे। उनके चेहरों पर जिज्ञासा थी। सोनू ने बंटी की तरफ देखा। बंटी ने आँखों से इशारा किया, "हिम्मत करो!"

सोनू ने मुस्कुराते हुए बच्चों से पूछा, "क्या तुम भी इन फूलों में रंग भरना चाहोगे?"

बच्चे खुशी से चिल्ला उठे, "हाँ!"

स सोनू ने उन्हें रंग और ब्रश दिए और उन्हें बताया कि कैसे दीवारों पर सुंदर रंग भरें। देखते ही देखते, पूरा चौपाल बच्चों की हँसी और रंगों से भर गया। सब मिलकर चित्र बना रहे थे और खूब मज़ा कर रहे थे। सोनू ने नए दोस्त बना लिए थे और उन सबके साथ मिलकर उसने खूब मस्ती की।

उस दिन सोनू ने समझा कि अपनी प्रतिभा और थोड़ी सी हिम्मत से हम कोई भी मुश्किल हल कर सकते हैं और जीवन में खुशी पा सकते हैं।

जीवन का मूल्यवान सबक:

जीवन में अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखें और हिम्मत से काम लें। जब हम अपनी क्षमताओं का उपयोग दूसरों के साथ मिलकर करते हैं, तो हम न केवल अपनी समस्याओं का समाधान करते हैं, बल्कि नए दोस्त बनाते हैं और खुशियाँ भी फैलाते हैं।

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हमारे विषय में

अच्छा इंसान बनने के लिए कोई निश्चित पाठ्यपुस्तक नहीं होती।
एक अच्छा मनुष्य भीतर से जागने वाली प्रेरणा से बनता है।
यह प्रेरणा अच्छी और सार्थक साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होती है।
उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है।
हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
    अच्छी किताबें ही उन्हें महान बना देती हैं।