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प्यार का पौधा

By Bispl 23 Jul 2026 8 minutes Time To Read Share 🖨️ Print Story 🖨️ Print Story

उद्देश्य
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यह बताना है कि बच्चों में प्रकृति-प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और माता-पिता के प्रति प्रेम एवं सम्मान की भावना विकसित करना है।

कहानी
दर्ष तमिलनाडू के एक छोटे से शहर में अपने माता-पिता के संग रहता था। वह एक सरकारी स्कूल की छठी कक्षा में पढ़ता था।

दर्ष बहुत बुद्धिमान और सौम्य प्रकृति का बच्चा था। उसे प्रकृति से विशेष प्रेम था। उसके घर में एक बगीचा था, जिसमें उसने तरह-तरह के रंगबिरंगे फूलों के पौधे लगाए थे। वह हर पौधे को अपना छोटा भाई समझता था और बड़े मन से उनकी देख-भाल करता था वह अपनी मम्मी से कहता था मम्मी तुम्हें पता है, कि यदि तुम पौधों, पेड़ों से प्यार करो तो वह भी तुमसे प्यार करने लगते हैं।

वह जो पौधा लगाता था, वह भी बहुत अच्छी तरह पनप कर आसानी से बड़ा हो जाता था। उसके लगाए पौधों में फूल खूब खिलते थे और उसके बगीचे की सब बड़ी तारीफ करते थे।

एक दिन दर्ष के हरे-भरे बगीचे को देख उसकी मम्मी बोली, दर्ष तुम सचमुच ग्रीनंफिंगर्ड बच्चे हो।

दर्ष ने ग्रीनंफिंगर्ड शब्द कभी नहीं सुना था। वह अपने लिए ग्रीन फिंगर्ड शब्द सुनकर चैंका और मम्मी से पूछने लगा, कौन लोग ग्रीन फिंगर्ड होते है? क्या उनकी उँगलियाँ हरे रंग की होती है? मेरी तो नहीं है तो फिर मै कैसे ग्रीन फिंगर्ड बच्चा हुआ?

दर्ष की बात सुनकर मम्मी हँसने लगी और बोली कि ग्रीन फिंगर्ड लोग, हरी उँगलियों वाले लोग नहीं होते हैं। यह वह लोग होते हैं, जिनके लगाए हुए पौधे बड़ी तेजी से बढ़ते हैं और मौसम में फलों से लदे रहते हैं। उनके बगीचे हमेशा हरे-भरे रहते है। फूल ऐसे खिलते हैं कि उनकी शोभा देखते ही बनती है। उन्हें पेड़ो की देख-भाल करना भली-भाँति आता है। उनके ह्नदय में प्राकृतिक हरियाली के लिए विषेश प्रेम होता है।

माँ के मुँह से अपनी विषेशताएं सुनकर दर्ष खुशी से फूला न समाया। उसने निश्चय किया कि इस बार वह अपनी माँ को उनके जन्मदिन पर एक ऐसा उपहार देगा, जिसे देखकर प्रसन्न हो जाएंगी और उसके ग्रीन फिंगर्ड होने पर गौरान्वित अनुभव करेंगी।

वह कई दिनों तक उपहार के विशय में सोचता रहा, लेकिन वह समझ नहीं पाया कि वह उन्हें ऐसा क्या कुछ दे, जो उनके काम का हो और उसके ग्रीन फिंगर्ड होने से भी सम्बन्धित है।

एक दिन वह अपने बिस्तर में लेटा हुआ था और खिड़ की की तरफ देख रहा था। उसे वहाँ मधुमक्खियाँ दिखाई पड़ीं। वह लगातार भिन-भिन आवाज किए जा रहीं थी।

उनकी आवाज सुनकर उसे उपहार का आइडिया आ गया। उसने सोचा कि क्यूँ न मै अपने बगीचे में मधुमक्खी का छत्ता लगा लूँ।

मधुमक्खियाँ बगीचे के फूलों से शहद बनाएंगी, और मैं उसे किसी अच्छे से जार में इकट्ठा करके, उनकी बर्थडे पर उन्हें प्रैसेन्ट कर दूँगा।

बस फिर क्या था वह अपनी योजना लेकर पापा के पास गया। उसने उन्हें पूरी योजना बताई। वह बच्चे के शौक और कार्य कुशलता से तो परिचित थे ही और अपने दोस्तों से उसकी तारीफ भी करते थे। लेकिन माँ के लिए उसका प्रेम देख कर वह खुषी से फूले न समाए।

उन्होंने दर्ष को बताया कि भारत के हर जिले में कृशि विज्ञान केन्द्र होता है, जो मधुमक्खी पालन में उसकी मदद कर सकता है।

अगले दिन वह दर्ष को ले कर शहर के कृशि विज्ञान केन्द्र पर गए। वहाँ पर उन्होंने कई लोगों से बातचीत की।

सभी ने दर्ष के उत्साह की सराहना की और आश्वासन दिया कि वह बच्चे के उत्साह को मंद नहीं पड़ने देंगे और यथा सम्भव हर मदद करेंगे।

कुछ दिन बाद कृशि विज्ञान केन्द्र के लोग आए और बगीचे में हरे-भरे घने पौधों के पीछे मधुमक्खी का छत्ता लगा गए। दूर से दिखने पर छत्ता दिखता ही नहीं था, अत: दर्ष की यह गुप्त योजना सफल होती प्रतीत होने लगी थी।

इसके बाद दर्ष ने एक लेख पढ़ा जिसमें लिखा था कि लाल, पीले, गुलाबी, बैंगनी और नारंगी रंग के फूलों में, मधुमक्खियों को आकर्शित करने की विषेश क्षमता होती है। उसने यह भी पढ़ा कि सूरजमुखी गेंदे, गुड़हल, मोगरा और गुलाब जैसे फूल मधुमक्खियों को बहुत भाते हैं। वह इसके प्रति, विषेश रूप से आकर्शित होती है।

इस लेख को पढ़ने के बाद जब दर्ष अपने बगीचे में गया तो उसने देखा कि उसकी क्यारियाँ सूरजमुखी, गेंदे और गुलाब से भरी पड़ी है। बगीचे में तुलसी के भी अनेकों पौधे लगे हुए थे, जिसमें मधुमक्खियों को आकर्शित करने की विषेश क्षमता होती है।

दर्ष को अपने बगीचे को देख बहुत हर्श हुआ और वह सोचने लगा कि उसके बगीचे में तो पहले से ही, इतनी मिठास भरी पड़ी है, और उसे पता ही नहीं था। वह मन ही मन मम्मी का धन्यवाद करने लगा कि उनकी वजह से उसे इतना ज्ञान मिला।

मधुमक्खियों का छत्ता लगने के बाद, वह अपने बगीचे की देख-भाल और अच्छी तरह से करने लगा।

बर्थडे से कुछ दिन पहले, मम्मी घर पर नहीं थी। वह पास के शहर में अपने पापा के घर गई हुई थीं।

तभी कृशि विज्ञान केन्द्र के लोग आए और ढेर सारा शहद निकाल कर दर्ष को दे गए।

दर्ष ने उस जार के ढक्कन को मोम लगा कर सील कर दिया, उसने मम्मी की एक फोटो जार पर चिपकाई और नीचे पापा और अपना नाम लिख कर अंधेरे स्टोर में छिपा दिया।

बर्थडे वाले दिन वह सुबह जल्दी उठा और जार को उनके पंलग के पास ले जाकर रख दिया। उसने जार को आस-पास, अपने बगीचे से तोड़ कर कुछ फूल भी रख दिए।

उसने कुछ दिन पहले मम्मी के लिए एक कार्ड भी बनाया था, उसे जार के ढक्कन पर रख दिया और कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया, जैसे वह यहाँ आया ही नहीं था।

वह दरवाजे के पीछे छिप कर चाबी वाले छेद से अन्दर का दृष्य देखता रहा। मम्मी पापा दोनों उठे तो उनकी निगाह पास रखे जार पर गई तो वह देखती रह गई।

उन्होंने जार पर बना चित्र देखा और कार्ड पढ़ा तो उनकी आँखे भर आई। वह पापा से पूछने लगीं, यह शहद कहाँ से आया। वह कुछ बोले नहीं बस इतना कहा कि तुम ही अपने लाडले से पूछ लो।

मम्मी ने दरवाजा खोला तो दर्ष को वहीं खड़े पाया। मम्मी को देखते ही वह जोर से चिल्लाया ‘‘हैप्पी बर्थडे मम्मी’’। मम्मी ने उसे गले से लगा लिया और प्यार से उसके गालों को चूमने लगी।

जब उन्होंने शहद के विशय में पूछा तो उसने उन्हें पूरी बात उस दिन से बताई, जिस दिन उन्होंने उसे, ग्रीन फिंगर्ड का मतलब समझाया था। 

दर्श मम्मी को अपनी कहानी बड़ी देर तक बताता रहा और मम्मी की आँख से ममता के आँसू दर्ष के ऊपर गिरते रहे और स्नेह में भिगोते रहे। पौधों के प्रति दर्ष के प्रेम ने, मम्मी के प्रेम को घनीभूत कर दिया। और उन्हें भी लगा कि यह अब तक की सबसे श्रेश्ठ बर्थडे है।

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हमारे विषय में

अच्छा इंसान बनने के लिए कोई निश्चित पाठ्यपुस्तक नहीं होती।
एक अच्छा मनुष्य भीतर से जागने वाली प्रेरणा से बनता है।
यह प्रेरणा अच्छी और सार्थक साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होती है।
उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है।
हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
    अच्छी किताबें ही उन्हें महान बना देती हैं।