अक्लमन्द तोते
Well done!
उद्देश्य
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यह बताना है कि उन्हें हर बात को बहुत ध्यान से सुनना चाहिए तभी वह किसी कार्य को सही तरीके से कर पाएंगे । और इसी तरह उनका ज्ञान भी बढ़ता जएगा ।
कहानी
जंगल में तोतों का एक नया परिवार रहने आया। उन्होंने इधर-उधर घूम कर सारा जंगल देखा और एक बड़े आम के पेड़ पर अपना घोंसला बना लिया।
तोतों के इस परिवार में चार सदस्य थे। पापा-तोता, मम्मी-तोती और दो छोटे-छोटे बच्चे। एक बच्चे का नाम था खट्टू और दूसरे का नाम था मिठ्ठू। खट्टू, मिठ्ठू स्वभाव से बहुत चंचल थे। वह दिन भर जंगल में उड़ते फिरते रहते थे, और फलों के पेड़ों पर बैठ कर फलों को कुतर-कुतर कर इधर-उधर फेंका करते थे। जब कोई उनसे कहता कि इस तरह से फलों को बर्बाद न करो, तो उन्हें अच्छा नहीं लगता था।
खट्टू, मिठ्ठू के मम्मी पापा जब उन्हें इधर-उधर घूमते फिरते देखते थे तो बहुत चिन्तित हो जाते थे । वह सोचते थे कि यदि बच्चे इसी तरह समय नष्ट करते रहे तो इनकी आदत खराब हो जाएगी। यह निठ्ल्ले हो जाऐंगे। इनका किसी भी काम में मन नहीं लगेगा। जब इन्हें कोई काम दिया जायेगा तो यह कुछ भी नहीं कर पाऐंगे।
सारी सोचा विचारी करने के बाद पापा मम्मी ने निश्चय किया कि वह अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजेंगे। वहाँ पढ़ लिख कर वह विद्वान बनेंगे। छान-बीन करने पर उन्हें पता चला कि घने बरगद के पेड़ के नीचे उल्लू का स्कूल है। वह स्कूल बहुत अच्छा है।वह सभी जानवरों को बड़ें अच्छे ढ़ग से पढ़ाता है।
दूर-दूर से अनेकों जानवर और पक्षी, उससे पढ़ने आते हैं। उल्लू उन सबको अच्छी शिक्षा तो देता ही है, साथ में उन्हें आपस में अच्छा व्यवहार करना भी सिखाता है।
उल्लू के उस स्कूल की तारीफ सुनकर पापा मम्मी ने निष्चय किया कि वह खट्टू मिठ्ठू को उल्लू के स्कूल में ही पढ़ने भेजेंगे।
जब पापा मम्मी ने खट्टू मिठ्ठू को बताया कि उन्होंने उनका नाम उल्लू के स्कूल में लिखा दिया है और उन्हें कल से स्कूल जाना है, तो वह बहुत दुखी हुए। उन्हें लगाा कि स्कूल जाने से उनकी आज़ादी छिन जाएगी। अब वह कभी मस्ती नहीं कर पाएंगे।
उन्होंने डरते-डरते पापा मम्मी से अपने मन की बात कही और प्रार्थना करने लगे कि वह, स्कूल से उनका नाम कटवा दें और उन्हें मस्ती करने दें। बच्चों की बात सुनकर मम्मी पापा को हँसी आ गई। उन्होंने बच्चों को समझाया कि बिना पढ़े लिखे, कोई भी ज्यादा दिन तक मस्ती नहीं कर सकता। जीवन को अच्छा बनाने के लिए पढ़ना लिखना बहुत जरूरी है।
कुछ देर समझाने के बाद बच्चे समझ गए और अगले दिन से स्कूल जाने के लिए राजी हो गए।
अगले दिन सुबह मम्मी पापा, दोनों बच्चों को लेकर स्कूल गए। वहाँ पर इतने सारे जानवरों को देखकर खट्टू मिठ्ठू सहम गए।उन्हें लगा कि यहाँ तो इतने सारे जानवर पहले से ही पढ़ रहे हैं। इन्होंने तो पहले से ही बहुत कुछ सीख लिया होगा। हम इनकी बराबरी नहीं कर पाएंगे।
यह सोच कर खट्टू मिठ्ठू मायूस हो गए ।
खट्टू सोचने लगा कि क्यूँ न स्कूल से भाग लिया जाए। अभी तो मम्मी पापा भी यहाँ नहीं हैं। अगर भाग लिए तो उन्हें पता भी नहीं चालेगा। दिन भर मौज मस्ती करने की जुगाड़ भी हो जाएगी।
उसने मिठ्ठू को अपने मन का डर बताया और उससे स्कूल से भाग चलने की बात कही।
भाई की बातें सुनकर मिठ्ठू को बहुत गुस्सा आया। वह बोला, स्कूल से भागना बहुत बुरी बात होगी। यहाँ से भागने का मतलब है, अपने माता पिता को धोखा देना। उन्होंने हमें यहाँ अच्छा बनने के लिए भेजा है। हम अच्छी चीजें सीखने के लिए यहाँ आए हैं। हमें गलत बातें नहीं सीखनी हैं।
जब खट्टू और मिठ्ठू की बातें चल रही थीं, तभी क्लास में उल्लू ने प्रवेश किया। उसने क्लास के सभी विद्यार्थियों से खट्टू और मिठ्ठू का परिचय करवाया। सभी जानवर खट्टू मिठ्ठू से मिल कर बहुत खुश हुए। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके रहते उन्हें किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होगी। वह पाठ सीखने में उनका पूरा सहयोग करेंगे।
परिचय कराने के बाद उल्लू ने सभी विद्यार्थियों से अपनी-अपनी कौपी और पेन्सिल निकालने को कहा। उसने बताया कि आज हम सब लोग जोड़ना, घटाना सीखेंगे।
सारे विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी कौपी पेन्सिल निकाल ली। गिलहरी ने देखा कि उसके पास पाँच काॅपियाँ हैं। खट्टू मिठ्ठू के पास एक भी कौपी नहीं है।
वह चाहती थी कि खट्टू मिठ्ठू पहले दिन से ही मन लगा कर पढ़ें, जिससे उन्हें सारी चीजें ठीक से समझ में आ जाएं और उन्हें पढ़ने में मजा आने लगे। उसने खट्टू मिठ्ठू से कहा कि आज तुम लोगों का पहला दिन है। तुम लोगों को शायद पता नहीं था कि पढ़ाई करने के लिए, अपने संग कौपियाँ लानी होती हैं। मेरे पास कुछ ऐक्सट्रा कौपियाँ हैं। लो, मुझसे कौपियाँ ले लो।
यह कह कर उसने दो कौपियाँ खट्टू को और एक कौपी मिठ्ठू को दे दी। दोनों कौपी मिलने पर बहुत खुश हो गए। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि जिन लोगों से वह थोड़ी देर पहले इतना डर रहे थे, वह इतने अच्छे होंगे।
तभी उल्लू ने पढ़ाना आरम्भ किया और बोला कि पहले हम जोड़ना सीखेंगे। जोड़ने का अर्थ है, एक चीज का दूसरे के साथ मिल जाना। ध्यान रखो जब चीजें आपस में मिलती हैं तो वह बढ़ जाती हैं।
मान लो कि तुम्हारे पास दो कौपियाँ है तुम्हें कुछ और कौपियाँ मिल जाती हैं, तो उनकी संख्या बढ़ जायेगी। ऐसी स्थिति में हमें अंको को जोड़ना होता है।
जोड़ना क्या होता है, यह कब किया जाता है, यह सब बता कर उल्लू ने सबसे एक प्रश्न पूछा कि मान लो मिठ्ठू के पास एक कौपी है, खट्टू के पास दो कौपियाँ हैं और गिल्लू के पास दो कौपियाँ हैं तो बताओ, कुल कितनी कौपियाँ हैं। खट्टू ने झट से पहले अपनी कौपियाँ गिनीं, उसके बाद उसने मिठ्ठू की कौपी को गिना और उसके बाद गिल्लू की कौपियों को।
इससे पहले कि कोई जानवर सही उत्तर बताता, खट्टू खड़ा हुआ और जोर से बोला पाँच।
खट्टू का जवाब सुनकर सारे जानवर हैरान रह गए कि जो आज पहले दिन स्कूल में पढ़ने आया है, वह इतनी तेजी से सही जवाब दे रहा है। टीचर ने भी उसके सही जवाब देने पर उसकी खूब तारीफ की और उससे पूछा कि उसने इतना सही जवाब कैसे दिया।
खट्टू ने बताया कि जब टीचर उससे प्रश्न पूछ रहे थे तो वह उनकी बात बड़े ध्यान से सुन रहा था। ध्यान से सुनने के कारण उसे लगा कि यदि वह अपनी, मिठ्ठू की और गिल्लू की कौपियों को गिन लेगा तो सही उत्तर मिल जाएगा और उसने ऐसा ही किया।
जोड़ने के कई प्रश्न हल करने के बाद, उल्लू ने कहा कि अब हम घटाना सीखेंगे। उसने विद्यार्थियों को बताया कि यदि कुछ चीजें हमारे पास हैं और उसमें से कुछ चीजें निकल जाती हैं या कम हो जाती हैं तो यह घटाने की क्रिया हुई । जैसे, मान लो कि तुम्हारे पास पाँच आम हैं। तुम दो आम किसी को दे देते हो तो पाँच में से दो घटाने पर शेष आमों की संख्या का पता चल जायेगा। ध्यान रहे कि यहाँ तुम्हारे आमों की संख्या घट रही हैं इसलिए घटाने की क्रिया करनी होती है।
घटाने की क्रिया क्या है, कैसे की जाती है, आदि बातें बताने के बाद उसने सभी विद्यार्थियों से एक प्रश्न पूछा, मान लो गिल्लों के पास पाँच आम हैं, वह एक आम मिठ्ठू को और दो आम खट्टू के दे देती है, तो बताओ उसके पास कितने आम बचे।
प्रश्न सुनते ही मिठ्ठू ने गिल्लो गिलहरी के बस्ते में नजर दौड़ाई। उसमें दो काॅपियाँ थीं। इससे पहले कि कोई उत्तर देता, मिठ्ठू बोल उठा, दो। उसका सही उत्तर सुनकर सब आश्चर्य चकित रह गए कि कैसे आज आए नए विद्यार्थी, पुराने विद्यार्थियों से पहले, उत्तर बता रहे हैं। वह भी ठीक-ठीक। मिठ्ठू का उत्तर सुन कर उल्लू ने उसे भी शबाशी दी और पूछा कि उसने सही उत्तर कैसे दिया?
मठ्ठू ने बताया कि वह जबसे क्लास में आया है, वह सारी चीजों को बड़े ध्यान से देख रहा है और सुन रहा है। उसने जैसे ही प्रश्न सुना, उसने मान लिया कि गिल्लू के पास काॅपियाँ नहीं आम थे। उसने दो आम खट्टू को दिए और एक आम मुझे। अत: मुझे गिल्लू के पास जो कौपियाँ बची हैं, वह गिन लेनी चाहिए। अत: उसने गिल्लू के बस्ते के अंदर नजर दौड़ाई और देख लिया कि वहाँ दो कौपियाँ है। चूँकि उसने काॅपियों को पहले ही आम मान लिया है अत: सही उत्तर दो है।
मिठ्ठू के सही उत्तर और उसकी सूझ-बूझ पर सभी विद्यार्थी ताली बजाने लगे। जोड़ घटाने के साथ उन सभी ने एक महत्वपूर्ण बात भी सीख ली थी कि उन्हें हर बात को ध्यान से सुनना चाहिए।
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