झब्बू गब्बू का प्याऊ
Well done!
उद्देश्य
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यह बताना है कि एक छोटी सी भलाई कठिन से कठिन परिस्थितियाँ पार करा देता है।शायद इसी को लोग, ईश्वर की कृपा भी कहते हैं।
कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक बडे़ से जंगल में एक भालू रहता था। भालू स्वभाव से बहुत सरल और खुशमिजा़ज था। वह जंगल में जिससे भी मिलता, उससे अच्छी बातें करता और उन्हें अपना दोस्त बना लेता। उसे दूसरों की मदद करने में बहुत मजा आता था, इसीलिए वह जंगल में बहुत मशहूर था। सारे जानवर उसे झब्बू कह कर बुलाते थे।
एक बार जंगल में बहुत गर्मी पड़ी। सूरज की गर्मी से सारे तालाब और नाले सूख गए। पीने के पानी की कमी हो गई और सारे जानवर व्याकुल हो उठे। इतनी भयंकर गर्मी पहले न कभी किसी ने देखी थी न झेली थी। जब गर्मी जमीन की ऊपरी पर्तो को भेदकर अंदर पहुँची तो बिल में रहने वाले सभी जानवर बाहर आ गए। वह सब, दिनभर किसी पेड़ की छाँव में बैठे रहते और धूप ढलने का इन्तजार करते।
एक दिन झब्बू खाने की तलाश में कहीं जा रहा था। तभी उसकी नजर, सामने बरगद के पेड़ पर पडी़ । उसने देखा कि पेड़ के नीचे, साइकिल के कई टायर, एक दूसरे के ऊपर रखे हैं। टायरों को देख कर उसे आश्चर्य हुआ और वह उनकी ओर चल पड़ा।
जैसे ही वह उस ओर बढा़, उसे हिस-हिस की आवाज आने लगी। जब पास जा कर उसने ध्यान से देखा तो पाया कि वह टायर नहीं काला साँप है जो कुंडली मार कर बैठा है। वह प्यास से व्याकुल था। पानी की चाह में उसकी जीभ लपलपा रही थी। उसके फूले नथुनों से गर्म सांसें निकल रही थींऔर उनसे हिस-हिस की आवाज हो रही थी। भालू पहले कभी साँप से नहीं मिला था लेकिन फिर भी वह उसके पास गया और उसका हाल पूछा।
साँप ने झब्बू को बताया कि वह गर्मी से व्याकुल है। वह पिछले तीन दिनों से पानी की तलाश में इधर-उधर घूम रहा है, लेकिन उसे कहीं पानी नहीं मिल रहा है। अब वह गर्मी से इतना बेहाल हो चुका है कि एक कदम भी आगे नहीं चल सकता। उसने कहा कि, यदि उसे आज पानी नहीं मिला तो वह प्यास से मर जाएगा।
साँप की बात सुनकर झब्बू सहम गया और बोला, दोस्त तुम फिकर मत करो। मैं तुम्हें पानी पिलाऊँगा। चलो मेरे साथ चलो।
भालू की बात सुनकर साँप को अच्छा तो लगा, परन्तु वह उदास हो गया। उसने कहा, ‘‘भालू भैया! मै इतना थका हुआ हूँ कि एक कदम भी आगे नहीं चल पाऊँगा। यदि मैं इस धूप में आगे गया तो पानी तक पहुँचने से पहले, रास्ते में ही मर जाऊँगा’’।
यह बात सुनते ही झब्बू का कलेजा धक्क हो गया। उसे लगा कि जरा सी लापरवाही से साँप की जान जा सकती है। अत: उसे बडे़ ध्यान से साँप की मदद करनी होगी।
झब्बू ने साँप से पूछा, यह बताओ दोस्त कि यदि मै तुम्हारे पास झुक कर, बैठ जाऊँ तो क्या तुम रेंग कर मेरी पीठ पर चढ़ सकते हो।
साँप ने कहा हाँ, इतनातो मै कर लूँगा। इससे ज्यादा नहीं चल पाऊँगा।
यह सुनकर झब्बू को खुशी हुई। वह साँप के सामने बैठ गया और साँप रेंगता हुआ झब्बू की पीठ पर चढ़ गया।
भालू साँप को अपनी पीठ पर बैठा कर दौडऩे लगा। दौड़ते दौडत़े झब्बू ने साँप को बताया कि वह उसे लेकर जंगल के पहाडी़ इलाके में जा रहा है। वहाँ हरदम पत्थरों के बीच से झरने की एक पतली सी धार गिरती रहती है। वहाँ पहुँच कर वह उसे पानी पिला देगा।
भालू तेज धूप में बड़ी दूर तक दौड़ता रहा और सारे रास्ते प्रयास करता रहा कि उसकी बातों से साँप का मन इधर-उधर लगा रहे, जिससे कि प्यास, उसे ज्यादा न सताए।
काफी दूर दौडत़े रहने के बाद, दोनों पहाड़ी इलाके में पहुँच गए। वहाँ उन्हें एक चट्टान से पानी झरता दिखाई दिया। पानी देखकर दोनों जानवरों की खुशी का ठिकाना न रहा। झब्बू ने आगे बढ़कर एक पत्ता तोड़ा और उसका दोना बनाया। उसमें पानी भरा और साँप को पिलाया। पानी पी कर साँप की जान में जान आई।
साँप को पानी पीता देखकर भालू को भी प्यास लग आई। वह झरने के नीचे गया अैर मुँह ऊपर करके झरता हुआ पानी पीने लगा, लेकिन वह पूरी तरह से भीग गया।
भालू को भीगा देखकर साँप को हँसी आ गईं। वह हंस कर बोला, ‘‘भालू भैया पानी तो पिला दिया, कुछ खाना भी खिलाओ तो शरीर में ताकत आए। नहीं तो लौटते समय भी कंधे पर चढ़कर चलना पडे़गा’’।
भालू को साँप की दोस्ती भरी बात सुन कर बहुत अच्छा लगा। उसने इधर-उधर नजर दौड़ाई तो उसे पेड़ के ऊपर एक मधुमक्खी का छत्ता दिखाई दिया। वह पेड पर चढा़ और ढेर सारा शहद ले आया। दोनों दोस्तों ने मिलकर पहले तो शहद खाया और फिर पेड़ की छाँव में बैठ कर आराम करते रहे। शाम को जब वह घर लौट रहे थे तो साँप ने भालू से कहा कि भालू भैया आज तुम मुझे अपना घर दिखाना।
मैं रोज सुबह तुम्हारे घर बर्तन लेकर आया करूँगा। उस बर्तन में हम लोग झरने से पानी भरकर लाएंगे और सभी प्यासे जानवरों को पानी पिलाएंगे। भालू को साँप का यह आइडिया बहुत अच्छा लगा। उसने साँप से कहा कि आज से मै तुम्हें गब्बू कह कर बुलाया करूँगा। फिर वह उसे ले कर अपने घर की तरफ मुड़ लिया।
अगले दिन सुबह जब साँप एक बड़ा सा डिब्बा ढकेलते हुए, भालू के घर पहुँचा तो उसने देखा कि रात भर में भालू ने एक छोटा सा दुकानुमा प्याऊ बना दिया है। प्याऊ के ऊपर एक बडा़ सा बोर्ड लगाया है। जिस पर लिखा था गर्मी भगाओ, नि:शुल्क पानी पी जाओ।
उस दिन जब दोनों दोस्त झरने से पानी लेकर लौटे तो उन्होंने देखा कि उसके प्याऊ में मधुमक्खियों ने अपना एक छत्ता लगा दिया है और बोर्ड पर लिख दिया है, ‘‘हम पानी पीने वाले जानवरों को फ्री में शहद खिलाते हैं’’।
उसके बाद प्याऊ पर आने वाला हर जानवर समझ गया कि एक छोटा सा भलाई का काम कठिन से कठिन परिस्थितियाँ पार करा देता है।
यह कैसे, कौन सी परिस्थिति बना देगा, इसका हम अनुमान भी नहीं लगा सकते।
शायद इसी को लोग, ईश्वर की कृपा भी कहते हैं।
क्या आप कहानी पढ़ने के लिए पॉइंट्स कमाना चाहते हैं? लॉग इन करने के लिए यहां क्लिक करें
क्या आप कमेंट पोस्ट करके पॉइंट्स कमाना चाहते हैं? लॉग इन करने के लिए यहां क्लिक करें
फ़िल्टर
-
आयु वर्ग
-
कहानी का नायक
-
वातावरण
-
कहानी का प्रकार
-
मूल भावना
-
जीवन सन्देश
-
कहानी का भाव







कमेंट
उत्तर छोड़ दें