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शर्मिन्दा फ्लेमिंगो

By Bispl 23 Jul 2026 8 minutes Time To Read Share 🖨️ Print Story 🖨️ Print Story

उद्देश्य
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य, बच्चों को यह सिखाना है कि अहंकार और घमंड हमें दूसरों से दूर कर देते हैं। जबकि विनम्रता, अच्छा व्यवहार और मित्रता हमें सबका प्रिय बना देते हैं।अच्छा स्वभाव और विनम्रता मानव की सच्ची सुंदरता होती है।

कहानी
एक जंगल के बीचों बीच सुन्दर बडी़ सी झील थी। उस झील में अनेकों पक्षियों के झुंड रहा करते थे।

हंस, बत्तखें, सारस, फ्लेमिंगो, सभी इस झील को अपना घर समझते थे। वह दिन भर झील में तैरते, खाते-पीते और मौज मस्ती करते थे।

कभी-कभी वह झील में तैरते हुए पानी से थोड़ा ऊपर उठ जाते, अपने पखों को फड़फड़ाते और पानी को हवा में उछालते। यह दृश्य, दर्शक पक्षियों को अन्दर तक गुदगुदा देता।

जब यह पानी की बूँदे पास तैरते दूसरे पक्षियों पर पड़ती तो वह खुशी से चहचहाने लगते और वह भी हवा में पानी उछाल कर दूसरे पक्षियों को भिगोने लगते। थोड़ी ही देर में सारी झील पक्षियों के खेल का मैदान बन जाती और वह खुशी से चहचहाने लग जाते।

पक्षियों का चहचहाना सुन कर जंगल के अन्य पक्षी दूर-दूर से आने लगते और आस पास के पेड़ों की डाल पर बैठकर झील मे तैरते पक्षियों का खेल देखने लगते।

इस झील में रहने वाले फ्लेमिंगो के झुंड़ में एक बेबी फ्लेमिंगो थी। उसका रंग चमकदार गुलाबी था। वह देखने में बहुत सुन्दर थी।उसकी पीठ पर गहरे लाल रंग की तीन शानदार धारियाँ थीं, जो उसे और भी सुन्दर बनाती थी।

जब वह ठुमक-ठुमक कर चलती तो सारे पक्षी उसका सौन्दर्य देखते रह जाते। उनको लगता कि काश हम भी इतने सुन्दर होते।

कोयल, कौआ, चील, गिद्ध सब उससे दोस्ती करना चाहते थे। जैसे ही वह उसके पास जाते, बेबी फ्लेमिंगो उड़ कर दूर हट जाती और कहती कि तुम लोग कितने भद्दे और काले हो। मुझे, तुम लोग बिल्कुल पसंद नहीं हो। मुझे तुम लोगों से दोस्ती नहीं करनी है।जाओ दूर चले जाओ।

बेबी फ्लेमिंगो का स्वभाव उसकी सुन्दरता के कारण दिन पर दिन खराब होता जा रहा था। वह अन्य पक्षियों के साथ खेलना, सैर सपाटा करना तो चाहती थी, लेकिन अभिमान के कारण, ऐसा करती नहीं थी। वह हरदम, दूसरे पक्षियों को यह महसूस कराती थी कि वह सबसे अच्छी हैऔर सबसे अलग है।

दूसरे पक्षियों को उसका यह रवैया अच्छा नहीं लगता था। धीरे-धीरे सारे पक्षी उससे दूर रहने लगे और वह अकेली पड़ गई।

एक बार जाडे़ से बचने के लिए क्रेन पक्षियों का एक झुंड झील में आ कर रहने लगा। सारे क्रेन पक्षी बहुत सुंदर थे और स्वभाव के बहुत अच्छे थे। वह झील के दूसरे पक्षियों के साथ बडा़ अच्छा व्यवहार करते थे। जल्दी ही उनकी झील के पक्षियों के साथ गहरी दोस्ती हो गई।

एक दिन क्रेन समुदाय की मुखिया ने बेबी फ्लेमिंगो को झील के किनारे अलग-थलग खड़े देखा। उसने झील के अन्य पक्षियों से उसके बारे में पूछताछ की और उसकी सारी कहानी जान ली।

कहानी सुनने के बाद उसने केवल इतना कहा, ‘‘कभी कभी ऐसा होता है कि किसी की कोई अच्छी बात, उसके अहंकार का कारण बन जाती है। वह अपने अहंकार के कारण औरों से अलग हो जाता है। लेकिन फिक्र की कोई बात नहीं है, जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा।’’
एक दिन सुबह से ही मौसम बहुतसुहाना था। चारों तरफ सुनहरी धूप खिली थी।

पेडों के पत्ते हिल हिल कर हवा में संगीत घोल रहे थे।

मौसम का सुहानापन देखकर एक क्रेन बोली, ‘‘मौसम इतना अच्छा है, क्यूँ न हम सारे पक्षी पिकनिक पर चलें। मैंने आते समय जंगल के उस पार, पहाड़ियों से गिरता, एक बड़ा सा झरना देखा था। आगे चल कर उस झरने का पानी एक छोटी सी नदी बन जाता है। उस नदी में हम सबके खाने के लिए बहुत सारी चीजें हैं।

हम सब दिन भर उस नदी में मस्ती करेंगे, खेलेंगे, खाएँगे, तैरेंगे और शाम होने से पहले वापस लौट आएंगे’’।

क्रेन का आइडिया मस्ती भरा था। सुनकर सारे पक्षी खुश हो गए। उनमें से एक बत्तख ने सुझाव दिया कि क्यूँ न हम लोग उडऩे वाले अन्य पक्षियों को भी बुला लें और उन्हें भी साथ ले चलें। वहाँ की नई-नई चीजें खाकर उनको भी मजा आ जाएगा।

किंगफिशर पक्षी जब नदी से मछलियाँ पकड़-पकड़ कर उल्लू,चील और गिद्धों को देंगे तो उन्हें यह पिकनिक जीवन भर याद रहेगी।

बत्तख का यह आइडिया सबको बहुत पसंद आया। इससे पहले कि वह किसी से सारे पक्षियों को बुलाने के लिए कहती, पास के पेड़ों पर बैठे सारे तोते उड़ लिए और सबको बता दिया कि जंगल के सारे पक्षी पिकनिक पर जा रहे हैं और सभी को साथ ले जाएंगे।

बस फिर क्या था, सभी पक्षी झील की तरफ उड़ लिए।

जब बेबी फ्लेमिंगो ने देखा कि जंगल के सारे पक्षी मौज मस्ती करने पिकनिक जा रहे हैं तो उसका भी दिल मचल उठा। वह भी सबके साथ जाना चाहती थी। दिन भर सबके साथ खेलना चाहती थी। नई नई चीजें खाना चाहती थी अत: वह भी अन्य पक्षियों की दिशा में दौड़ली।

जब वह झील पर पहुँची तो देखा कि सारे पक्षी, खुशी से चहचहा रहें हैं। वह एक दूसरे के साथ चुहल कर रहे हैं।

सारे पक्षियों को आपस में हँसते खिलखिलाते देखकर, बेबी फ्लेमिंगो को एहसास हुआ कि वह कितनी अकेली है। उसने अपने को, दूसरे पक्षियों से कितना अलग कर लिया है। वह जानती थी कि वह सारे पक्षियों के साथ, पिकनिक पर भले ही चली जाए, लेकिन उससे कोई बात नहीं करेगा। कोई भी पक्षी, न तो उसके साथ खेलेगा, न खाएगा।

उसने ही तो सारे पक्षियों को बुरा भला कह कर, अपने आपको, उनसे अलग कर लिया था। इस अलगाव में उन बेचारों का क्या दोष?
उसे यह एहसास हो गया कि सब उससे दोस्ती करना चाहते थे परन्तु उसने ही उनके साथ बुरा बरताव करके अपने को उनसे दूर कर लिया है। वह सोचने लगी कि उसे तो किसी ने बुलाया भी नहीं। वह तो स्वयं दौड़ी चली आई है।

अपनी गलती का एहसास होते ही बेबी फ्लेमिंगो फूट-फूट कर रोने लगी। सारे पक्षियों ने उसके रोने की आवाज सुनी और उसकी ओर देखने लगे।

क्रेन समुदाय की मुखिया ने भी उसके रोने की आवाज सुनी और उसके पास दौड़ी चली आई।

उसने बेबी फ्लेमिंगो के चेहरे को अपने परों से गुदगुदाया और उससे रोने का कारण पूछा। उसने उसकी सुन्दरता की खूब तरीफ की और सबके सामने खूब अच्छा बताया। 

अपनी तारीफ सुनकर, बेबी फ्लेमिंगो और तेजी से रोने लगी और कहने लगी कि सब लोग इतने अच्छे हैं, लेकिन मै अच्छी नहीं हूँ।सब मुझसे दोस्ती करना चाहते थे, लेकिन मैने सबको बुरा भला कह कर अपने को उनसे अलग कर लिया है।

आज जंगल में मेरा एक भी दोस्त नहीं है। सारे पक्षी अपने दोस्तों के साथ मिलकर पिकनिक पर जा रहे हैं। मै किसके साथ खेलूँगी? मुझे कैसे पिकनिक पर मजा आएगा? मैने सब बिगाड़ दिया है। न जाने वह कैसे ठीक होगा?

मुखिया क्रेन ने बेबी फ्लेमिंगो से कहा कि जो बिगड़ गया है, वह एक मिनट में, ठीक हो सकता है। सभी पक्षियों ने तुम्हारे मन की बात समझ ली है। वह जान गए हैं कि तुम्हें अपने किए पर पछतावा है।

पहले वह तुमसे पूछते थे कि क्या तुम दोस्ती करोगी? आज तुम, इस सबसे पूछो कि क्या यह तुमसे दोस्ती करेंगे?

बेबी फ्लेमिंगो ने मुखिया क्रेन की बात मन ली। वह आगे बढी़ और बड़ी विनम्रता से बोली ‘‘मैने गलती की है। मैने आप लोगों को बार-बार बुरा कहा है। आज मुझे अपनी गलती समझ में आ गई है। क्या आप सब मेरे दोस्त बनेंगे’’?

सारे पक्षी एक स्वर में बोले ‘‘हाँ, हाँ हम तो बहुत पहले से तुमसे दोस्ती करना चाहते थे। हम सब आज पिकनिक पर जा रहे हैं।तुम भी हमारे साथ चलो। वहाँ हम लोग खेलेंगे, खाएंगे और खूब मस्ती करेंगे।

बेबी फ्लेमिंगो, खुश हो गई।

सब पक्षी, अपनी-अपनी आवाज में खुशी से हुर्रे हुर्रे चिल्लाए और पिकनिक के लिए उड़ गए। पक्षियों के साथ उडत़े-उडते बेबी फ्लेमिंगो सोच रही थी कि अपनी गलती मान लेना गलत नहीं होता। 

अपनी गलती मान लेने से, कभी-कभी इतनी बड़ी खुशियाँ मिलती हैं, जो जीवन में साधारणत: नहीं मिलतीं।

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हमारे विषय में

अच्छा इंसान बनने के लिए कोई निश्चित पाठ्यपुस्तक नहीं होती।
एक अच्छा मनुष्य भीतर से जागने वाली प्रेरणा से बनता है।
यह प्रेरणा अच्छी और सार्थक साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होती है।
उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है।
हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
    अच्छी किताबें ही उन्हें महान बना देती हैं।