चिंपू और बहती नदी
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जंगल में एक शरारती चिंपांज़ी रहता था, जिसका नाम चिंपू था। चिंपू बहुत चंचल था और उसे जादू के छोटे-मोटे कमाल दिखाना बहुत पसंद था। जंगल के सभी जानवर उसे और उसके जादू को जानते थे। चिंपू का सबसे बड़ा मज़ा था जंगल में उछल-कूद करना और नए-नए खेल खेलना।
एक धूप वाले दिन, चिंपू को जंगल की ठंडी नदी में खेलने का मन हुआ। उसने सोचा, "आज कुछ बड़ा मज़ा करते हैं!" चिंपू ने अपनी जादुई शक्ति का इस्तेमाल किया। उसने नदी के बीच में कुछ बड़े पत्थरों को जमा कर दिया और थोड़ा मिट्टी मिलाकर एक छोटा-सा बांध बना दिया। फिर उसने बांध के पास कूद-कूदकर पानी की बड़ी-बड़ी छलांगें लगाईं। उसे खूब मज़ा आ रहा था!
लेकिन थोड़ी देर बाद, चिंपू ने देखा कि नदी का पानी बांध से आगे नहीं बढ़ रहा था। नदी का दूसरा हिस्सा, जहाँ हिरण और खरगोश पानी पीने आते थे, सूखता जा रहा था। चिंपू को अचानक एहसास हुआ कि उसके मजे की वजह से दूसरों को परेशानी हो रही है। उसे अपनी शरारत पर थोड़ी चिंता हुई।
चिंपू ने अपने जादू से बांध हटाने की कोशिश की, लेकिन इस तरह के काम के लिए उसका जादू काफी नहीं था। पत्थरों को हटाना उसके लिए मुश्किल हो रहा था। वह उदास होकर बैठ गया।
तभी उसे अपनी दोस्त मीरा दिखी, जो एक दयालु और समझदार लड़की थी। मीरा जंगल में फूलों के पौधे लगा रही थी। चिंपू दौड़कर उसके पास गया और अपनी सारी बात बताई।
मीरा ने चिंपू की बात ध्यान से सुनी। उसने चिंपू को समझाया, "चिंपू, जादू से मज़ा करना अच्छी बात है, लेकिन कभी-कभी असली समस्याओं को हल करने के लिए हमें असली मेहनत और मिलजुल कर काम करना पड़ता है।"
मीरा ने चिंपू को एक मजबूत डंडा दिया और कहा, "चलो, हम दोनों मिलकर इन पत्थरों को हटाते हैं।" चिंपू ने अपनी पूरी ताकत लगाई और मीरा ने डंडे से पत्थरों को धकेला। धीरे-धीरे, उन्होंने एक-एक करके पत्थरों को हटाया और मिट्टी को साफ़ किया। यह थोड़ा मुश्किल काम था, पर वे हार नहीं माने।
कुछ ही देर में, नदी का पानी फिर से कल-कल करता हुआ बहने लगा। नदी का दूसरा हिस्सा भी पानी से भर गया। हिरण और खरगोश खुशी-खुशी पानी पीने आए। चिंपू को अपने जादू से भी ज़्यादा खुशी हुई, क्योंकि उसने अपनी गलती सुधारी थी और दूसरों की मदद की थी। उसने सीखा कि अपनी हरकतों की ज़िम्मेदारी लेना और दूसरों के बारे में सोचना कितना ज़रूरी है।
जीवन का महत्वपूर्ण सबक: अपनी हरकतों की ज़िम्मेदारी लेना और दूसरों के बारे में सोचना बहुत ज़रूरी है। जब हम अपनी गलतियों को सुधारते हैं और दूसरों की मदद करते हैं, तो हमें सच्ची खुशी मिलती है। टीम वर्क और जिम्मेदारी से बड़े से बड़े काम आसान हो जाते हैं।
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