बादल वाशु और जंगल की सहेली
Well done!
एक घना, खूबसूरत जंगल था। इस जंगल में सब कुछ हरा-भरा और खुशहाल था। लेकिन कुछ दिनों से सूरज दादा बहुत नाराज़ थे, वे अपनी सारी गर्मी जंगल पर बरसा रहे थे। पेड़-पौधे मुरझा रहे थे और जानवर भी प्यासे थे।
जंगल के ऊपर रहता था एक छोटा, गोल-मटोल बादल, जिसका नाम था वाशु। वाशु बहुत मज़ेदार था और उसे नई-नई चीज़ें बनाना बहुत पसंद था। वह अपने दोस्तों में अपनी नई खोजों के लिए मशहूर था। वाशु ने देखा कि जंगल दुखी है और उसे भी बहुत दुख हुआ। वह सोच रहा था कि कैसे जंगल को फिर से हरा-भरा बनाएँ?
वाशु ने अपनी आविष्कारक बुद्धि लगाई। उसने सोचा, "मैं बारिश लाऊँगा!" पहले उसने कोशिश की कि एक ही बार में ढेर सारा पानी गिरा दे। 'धड़ाम!' की आवाज़ के साथ उसने कुछ पानी नीचे गिराया, लेकिन यह इतना तेज़ था कि छोटे पौधे झुक गए। यह तरीका ठीक नहीं था।
फिर उसने सोचा कि वह दूर से ठंडी हवा खींचकर लाए। उसने बहुत कोशिश की, लेकिन वह अकेला था और इतनी हवा खींचना बहुत मुश्किल था। वह थक गया और उदास हो गया।
उसी जंगल में एक बहुत ही दयालु और समझदार महिला रहती थी, जिसका नाम था तारा। तारा को जंगल और उसके सभी जीव-जंतुओं से बहुत प्यार था। वह रोज़ पौधों को पानी देती और जानवरों से बातें करती थी। तारा भी जंगल की हालत देखकर चिंतित थी।
तारा ने ऊपर देखा। उसने देखा कि वाशु बादल कभी ज़ोर से गरजता है, कभी धीरे से बहता है, लेकिन जंगल को राहत नहीं मिल पा रही। तारा समझ गई कि वाशु अकेला कोशिश कर रहा है। वह एक बड़े पेड़ के नीचे बैठी और वाशु की ओर देखकर प्यार से बोली, "प्यारे वाशु, तुम बहुत मेहनती हो, लेकिन अकेले इतनी बड़ी मुश्किल हल नहीं हो सकती। जब सब मिलकर काम करते हैं, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। बारिश भी तब अच्छी लगती है, जब सभी बादल दोस्त मिलकर नाचते हैं।"
वाशु ने तारा की बात सुनी (बादलों के पास कान नहीं होते, लेकिन वे दिल से सुनते हैं)। उसे तारा की बात में सच्चाई लगी। उसने अपनी आविष्कारक बुद्धि फिर से लगाई। उसने एक नया 'बादल-नृत्य' सोचा।
वाशु ने तुरंत अपने सभी बादल दोस्तों को बुलाया। उसने उन्हें बताया कि कैसे गोल-गोल घूमते हुए और एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए (मतलब एक-दूसरे के करीब आते हुए) धीरे-धीरे ठंडी फुहारें छोड़नी हैं। सब बादल दोस्त खुश हो गए और उन्होंने वाशु के साथ मिलकर 'बादल-नृत्य' शुरू कर दिया।
कुछ ही देर में, जंगल में एक प्यारी, ठंडी और हल्की बारिश होने लगी। यह इतनी मुलायम थी कि कोई पौधा नहीं टूटा, बल्कि सब खुशी से झूम उठे। पेड़-पौधे फिर से हरे-भरे हो गए और जानवर भी खुशी से उछलने लगे।
तारा ने वाशु और उसके बादल दोस्तों को देखकर मुस्कुराया। वाशु भी बहुत खुश था कि उसकी और तारा की मदद से जंगल फिर से खुशहाल हो गया था।
जीवन का सबक:
जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किल क्यों न हो, जब हम अपने दोस्तों और बड़ों की सलाह के साथ मिलकर काम करते हैं, तो हर समस्या का समाधान मिल जाता है। अपनी विशेष प्रतिभा का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करना हमें सच्ची खुशी देता है।
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