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सुरों से सजी दोस्ती

By Prachi 27 Jul 2026 4 minutes Time To Read Share 🖨️ Print Story 🖨️ Print Story

प्रयान एक बहुत ही प्यारा और बहादुर बच्चा था। उसे अपने घर में बांसुरी बजाना बहुत पसंद था। जब वह अपनी बांसुरी बजाता, तो इतनी मीठी धुन निकलती कि सब सुनकर मंत्रमुग्ध हो जाते। उसके घर के आस-पास के सभी दोस्त और पड़ोसी प्रयान के संगीत के बहुत बड़े प्रशंसक थे। सब जानते थे कि प्रयान बांसुरी बजाने में कितना माहिर है।

लेकिन प्रयान को एक छोटी सी मुश्किल थी। वह नए दोस्त बनाने में थोड़ा शर्माता था। उसे समझ नहीं आता था कि नए बच्चों से बात कैसे शुरू करे।

एक दिन, प्रयान ने देखा कि उसकी बिल्डिंग में कुछ नए बच्चे खेलने आए हैं। वे मिलकर हंस रहे थे, कूद रहे थे और बहुत खुश दिख रहे थे। प्रयान उन्हें अपने कमरे की खिड़की से देख रहा था और मन ही मन सोच रहा था, "काश, मैं भी उनके साथ खेल पाता और उनसे दोस्ती कर पाता।" वह थोड़ा उदास हो गया।

तभी, उसकी सबसे अच्छी दोस्त, टिया, उसके घर आई। टिया बहुत हंसमुख और समझदार लड़की थी। उसने देखा कि प्रयान उदास है। "प्रयान, क्या हुआ? तुम क्यों इतने चुप हो?" टिया ने पूछा। प्रयान ने बताया, "टिया, मैं चाहता हूँ कि मैं उन नए बच्चों से दोस्ती करूँ, लेकिन मुझे पता नहीं कि उनसे बात कैसे शुरू करूँ।"

टिया ने मुस्कुराकर कहा, "अरे प्रयान! तुम तो इतने बहादुर हो! और तुम्हें याद है तुम कितने अच्छे बांसुरी बजाते हो? यही तो तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी है! क्यों न तुम अपनी बांसुरी का जादू दिखाओ?"

प्रयान पहले थोड़ा हिचकिचाया। "क्या वे मेरी बांसुरी सुनेंगे?" उसने पूछा। टिया ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, "ज़रूर सुनेंगे! संगीत सबको पसंद आता है। चलो, हम मिलकर कुछ करते हैं।"

प्रयान ने हिम्मत जुटाई। वह अपनी प्यारी बांसुरी लेकर टिया के साथ अपने घर के बगीचे में गया, जहाँ नए बच्चे खेल रहे थे। टिया ने इशारा किया और प्रयान ने अपनी बांसुरी उठाई।

प्रयान ने एक बहुत ही प्यारी और चंचल धुन बजानी शुरू की। बांसुरी की मीठी आवाज़ बगीचे में फैल गई। नए बच्चे अचानक रुक गए। उन्होंने आवाज़ सुनी और प्रयान की ओर देखने लगे। वे धीरे-धीरे प्रयान के पास आने लगे। उनके चेहरों पर हैरानी और खुशी थी।

जैसे-जैसे प्रयान धुन बजाता गया, बच्चों के चेहरे पर मुस्कान फैलती गई। कुछ बच्चे अपने पैरों से ताल देने लगे, और कुछ ने तो तालियाँ भी बजाईं। जब धुन खत्म हुई, तो एक बच्चे ने कहा, "वाह! तुम कितनी अच्छी बांसुरी बजाते हो! क्या तुम हमें और सुनाओगे?" प्रयान का चेहरा खुशी से चमक उठा। उसने देखा कि सभी बच्चे अब मुस्कुरा रहे थे और उत्सुकता से उसे देख रहे थे।

प्रयान ने और धुनें बजाईं। टिया भी बच्चों के साथ मिलकर गाने लगी। धीरे-धीरे, बच्चों ने प्रयान से बातें करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने नाम बताए और पूछा कि वह कैसे इतनी अच्छी बांसुरी बजाता है। प्रयान ने सबको अपने नए दोस्त बनाने की खुशी में और भी प्यारी धुनें सुनाईं। उस दिन से, प्रयान और उन नए बच्चों की गहरी दोस्ती हो गई। प्रयान ने अपनी संगीत की कला से न केवल नए दोस्त बनाए, बल्कि यह भी सीखा कि अपनी प्रतिभा को दूसरों के साथ बांटना कितना सुखद होता है।

मूल्यवान जीवन सीख: अपनी प्रतिभा और खूबियों को दूसरों के साथ बांटने से हमें खुशी मिलती है और हम आसानी से नए दोस्त बना पाते हैं। जब हम हिम्मत करते हैं और अपनी अंदर की शक्ति पर भरोसा करते हैं, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

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उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है।
हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
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