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अजीब कहानी

by 13 Mar 2026 0 minutes Time To Read

संगीत, आँसू और हँसी वाला जंगल

बहुत दूर, पहाड़ियों और नदियों के बीच बसा था सुरताल वन। यह जंगल अपनी हरियाली, रंग-बिरंगे फूलों और चहचहाते पक्षियों के लिए मशहूर था। लेकिन इस जंगल की सबसे खास बात थी—यहाँ रहने वाले जानवरों का संगीत से गहरा लगाव।

इसी जंगल में रहता था एक प्यारा, नन्हा हाथी। उसका नाम था गिटारिया। गिटारिया बाकी हाथियों से थोड़ा अलग था। जहाँ दूसरे हाथी मिट्टी में खेलते या पानी में छींटे उड़ाते थे, वहीं गिटारिया को गिटार बजाना और गाना बहुत पसंद था।

उसने अपने लिए लकड़ी से बना एक छोटा-सा गिटार रखा था। वह लाल टी-शर्ट, नीली हाफ पैंट और सस्पेंडर पहनकर रोज़ एक पुराने पेड़ के ठूँठ पर बैठ जाता और मधुर धुनें छेड़ देता। उसकी सूँड जब तारों पर चलती, तो जंगल में एक अलग ही जादू फैल जाता।

शरारती चुन्नी गिलहरी

उसी पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर रहती थी एक फुर्तीली और शरारती गिलहरी—चुन्नी। चुन्नी बहुत चंचल थी। उसे अखरोट जमा करना, उछालना और दूसरों को चौंकाना बहुत अच्छा लगता था।

चुन्नी रोज़ गिटारिया को नीचे बैठकर गिटार बजाते देखती। उसे गिटारिया का संगीत अच्छा तो लगता था, लेकिन वह अपनी शरारत रोके बिना नहीं रह पाती।

एक दिन गिटारिया पूरे मन से एक नई धुन बजा रहा था। वह इतना डूबा हुआ था कि उसे अपने आसपास की कोई खबर नहीं थी। तभी चुन्नी के मन में शरारत सूझी।

“चलो, आज थोड़ी मस्ती करते हैं,” उसने सोचा।

उसने ऊपर से एक अखरोट फेंका।

आँसुओं की धुन

धप्प!

अखरोट सीधा गिटारिया के सिर पर आ गिरा। गिटारिया चौंक गया। अभी वह कुछ समझ पाता, उससे पहले दूसरा अखरोट उसके गिटार पर गिरा।

ट्रिंग!

गिटार की एक तार टूट गई।

गिटारिया की आँखों में आँसू भर आए। उसके लिए गिटार सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं था, बल्कि उसका सबसे अच्छा दोस्त था। टूटी हुई तार देखकर उसका दिल टूट गया।

वह सिर झुकाकर रोने लगा। उसकी धीमी सिसकियाँ जंगल की हवा में घुल गईं।

चुन्नी यह देखकर घबरा गई। उसने कभी सोचा नहीं था कि उसकी शरारत किसी को इतना दुखी कर देगी। उसे बहुत पछतावा हुआ।

जंगल सुनने लगा

गिटारिया की रोने की आवाज़ के साथ-साथ टूटी हुई गिटार की अधूरी धुन भी जंगल में फैल गई। यह धुन इतनी भावुक थी कि पास-पास रहने वाले जानवर रुक गए।

सबसे पहले एक हिरण आया। फिर खरगोश, मोर, बंदर, तोता, भालू और यहाँ तक कि बूढ़ा कछुआ भी धीरे-धीरे वहाँ पहुँच गया।

सब गिटारिया को उदास देखकर चिंतित हो गए।

“क्या हुआ, गिटारिया?” हिरण ने पूछा। “तुम्हारा संगीत तो हमेशा हमें खुश करता था,” मोर बोला।

गिटारिया ने टूटी तार की ओर इशारा किया और बोला, “अब मेरा गिटार नहीं गा पाएगा।”

माफी और नई शुरुआत

तभी चुन्नी नीचे उतरी। उसकी आँखों में भी नमी थी।

“मुझे माफ़ कर दो,” उसने कहा। “मेरी शरारत ने तुम्हें दुखी कर दिया। मैं ऐसा नहीं चाहती थी।”

गिटारिया ने चुन्नी की ओर देखा। पहले वह चुप रहा, फिर हल्की-सी मुस्कान आई।

“गलती हो जाती है,” गिटारिया बोला। “शायद इस टूटे गिटार में भी कोई नई धुन छुपी हो।”

यह सुनकर सब जानवर हैरान रह गए।

हँसी की धुन

गिटारिया ने टूटी हुई तारों के साथ फिर से बजाना शुरू किया। धुन थोड़ी अजीब थी, लेकिन उसमें एक मज़ा था।

चुन्नी ने अखरोट से ताल बजानी शुरू कर दी। बंदर पेड़ की टहनी पर थाप देने लगे। मोर पंख फैलाकर नाचने लगा। तोते तालियाँ बजाने लगे।

अब अखरोट फिर गिटारिया के सिर पर गिरे— लेकिन इस बार गिटारिया रोया नहीं।

वह ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा।

उसकी हँसी इतनी सच्ची और खुली थी कि पूरा जंगल हँसी से भर गया। टूटे गिटार से निकली धुन अब खुशी का संगीत बन चुकी थी।

जंगल का उत्सव

धीरे-धीरे जंगल में एक छोटा-सा संगीत उत्सव बन गया। हर जानवर अपने तरीके से उसमें शामिल हो गया।

भालू ने गहरी आवाज़ में गुनगुनाया। कछुए ने धीरे-धीरे ताल मिलाई। पक्षियों ने सुर लगाए।

गिटारिया बीच में बैठकर हँसते हुए गिटार बजाता रहा और चुन्नी उसके पास बैठकर शरारती लेकिन प्यार भरी मुस्कान के साथ अखरोट उछालती रही।

उस दिन सबने समझा कि खुशी परफेक्ट होने से नहीं, साथ होने से आती है।

सीख

उस दिन के बाद सुरताल वन में एक नई परंपरा शुरू हुई। हर हफ्ते जानवर इकट्ठा होते और मिलकर संगीत बनाते—चाहे गिटार सही हो या टूटा हुआ।

और गिटारिया? वह अब सिर्फ गिटार नहीं बजाता था, वह दिलों को जोड़ने वाला संगीत बजाता था।

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