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मज़ाक का फल

by 04 Feb 2026 0 minutes Time To Read

गर्मियों के दिन थे। एक चींटी कड़ी मेहनत से अनाज के दाने जमा कर रही थी। टिड्डा मस्ती में गाना गा रहा था।

“क्यों परेशान हो रही हो?” टिड्डे ने पूछा। “आओ, मेरे साथ मस्ती करो!”

“सर्दी आने वाली है,” चींटी ने कहा। “तैयारी ज़रूरी है।”

टिड्डे ने मज़ाक उड़ाया और गाता रहा।

सर्दी आई। चींटी के पास खाना था। टिड्डा भूखा मर गया।

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हमारे विषय में

अच्छा इंसान बनने के लिए कोई निश्चित पाठ्यपुस्तक नहीं होती। एक अच्छा मनुष्य भीतर से जागने वाली प्रेरणा से बनता है। यह प्रेरणा अच्छी और सार्थक साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होती है। उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है। हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
    अच्छी किताबें ही उन्हें महान बना देती हैं।