img not found!
img not found!
img not found!

सहयोग

By Bispl 25 Jul 2026 8 minutes Time To Read Share 🖨️ Print Story 🖨️ Print Story

एक दिन जंगल में एक जिराफ, बड़ी मस्ती से चला जा रहा था । तभी उसे एक पेड़ के नीचे बैठा एक खरगोश दिखाई पड़ा । वह खेत से बहुत सारी ताजी गाजरें तोड़ कर लाया था और बड़े आराम से चबा-चबा कर खा रहा था ।
खरगोश को गाजर खाता देख कर जिराफ को भी भूख लगने लगी । वह सोंचने लगा कि मुझे भी कुछ खाने को मिल जाता तो मजा आ जाता ।
उसे ध्यान आया कि जंगल की दूसरी ओर खजूर के पेड़ों वाला एक बगीचा है । क्यूँ न मैं वहाँ जा कर खूब सारे खजूर तोड़ूं और मजे से खाऊँ ।
मीठे खजूरों का ध्यान आते ही उसके मुँह में पानी आ गया और वह तेजी से कदम बढ़ाते हुए, बगीचे की तरफ बढ़ने लगा ।
कुछ दूर चल कर खजूरों के पेड़ों का बगीचा आ गया । उसने देखा कि हर पेड़ खजूरों से लदा हुआ है । उसे लगा कि यहाँ तो इतने खजूर हैं कि वह हर दिन यहाँ आ कर खजूर खा सकता है । यह ख्याल आते ही उसकी भूख और बढ़ गई ।
वह दौड़ कर एक पेड़ के पास गया और खजूर तोड़ने की कोशिश करने लगा । लेकिन खजूर उसकी ऊँचाई से थोड़ा ऊपर लगे थे । वह उन्हें तोड़ नही पाया । उसने बहुत कोशिशें कीं लेकिन उसकी हर कोशिश बेकार रही ।
वह उचका, उछला, कूदा लेकिन वह खजूरों को छू भी नहीं पाया । उसने तरह तरह के तरीके लगाए लेकिन कोई भी तरीका काम नहीं आया । जब उसकी सारी कोशिशें बेकार हो गईं तो उसकी भूख और तेज हो गयी । वह सोंचने लगा कि चलो एक बार फिर कोशिश करता हूँ । क्या पता दौड़ कर कूदने से शायद खजूर मुँह में आ जाएं ।
वह दौड़ा और पेड़ के पास आ कर कूदा, लेकिन उसकी यह कोशिश भी बेकार रही ।
इस दौड़ा-भागी और कूदा-कादी में उसका पैर मुड़ गया और उसके पैरों में दर्द होने लगा ।

खजूर न मिलने से वह हताश हो गया । वह लंगड़ा-लंगड़ा कर अपने घर वापस जाने लगा । उसे रास्ते में बन्दर मिला । जिराफ को लंगड़ाता देख कर बन्दर बहुत दुखी हुआ । उसने जिराफ से लंगड़ाने का कारण पूछा तो जिराफ ने बन्दर को सारा किस्सा कह सुनाया ।
बन्दर जिराफ की बात सुन कर मुस्कुराने लगा और बोला, इतनी जरा सी बात और तुम हताश हो गए । पैर में चोट लगा ली, वह अलग से । चलो खजूर तोड़ने में मैं तुम्हारी मदद करता हूँ । हम दोनों मिलकर खजूर तोड़ेंगे और फिर साथ में बैठ कर खाएंगे ।
तुम मुझे बस खजूर के बगीचे में ले चलो । मैं तुम्हारी पूँछ पकड़ कर पीठ पर चढ़ जाऊँगा । पीठ से गर्दन पर चढूँगा और फिर सिर पर बैठ कर खूब सारे खजूर तोड़ूूँगा ।
नीचे उतर कर मैं सारे खजूर इकट्ठा कर लूँगा और फिर हम दोनों मिलकर बड़े मजे से खजूर खांएगे ।
बन्दर की बात सुन कर जिराफ की खुशी का ठिकाना न रहा । वह सोचने लगा कि बन्दर की मदद से वह काम हो जाएगा, जो वह अकेले नहीं कर पाया था ।
बंदर की योजना सुनकर जिराफ को इतनी खुशी हुई कि वह अपने पैरों की चोट के बारे में भूल गया । उसने बन्दर को अपनी पीठ पर बैठाया और तेजी से खजूर के बगीचे की तरफ दौड़ने लगा ।
बगीचे में जिराफ एक पेड़ के नीचे रूका तो बंदर ने उसके सिर पर बैठ कर खजूर का एक गुच्छा तोड़ लिया और उसे नीचे जमीन पर फेंक दिया । नीचे जमीन गन्दी थी । कीचड़ में गिर कर खजूर गंदे हो गए । गंदे खजूर देख कर जिराफ चिल्लाया, खजूर गन्दे हो गए । गन्दी चीजें खाने से पेट में कीड़े हो जाते हैं । कीड़े होने से हम बीमार पड़ सकते हैं ।
मैं न तो गन्दे खजूर खाऊँगा और न ही तुम्हें खाने दूँगा ।
बन्दर सोचने लगा कि जिराफ, बात तो सही कह रहा है । उसे याद आ गया कि पिछले महीने जब उसने नीचे गिरा आम खाया था तो वह चार दिन तक बीमार रहा था । बीमारी में उसे कुछ भी खाने को नहीं दिया गया था । उसे भूखे ही सोना पड़ा था ।
बंदर गन्दे खजूर देख कर डर गया । वह सोचने लगा कि क्या किया जाए, जिससे नीचे गिराए खजूर न तो मिट्टी में गिरें और न ही गन्दे हों ।
तभी उसे दूर से एक कंगारू आता दिखाई पड़ा । कंगारू बड़ा उदास था । बन्दर ने उसे पास बुलाया और उसकी उदासी का कारण पूछा ।
कंगारू ने बताया कि उसका बच्चा जो कल तक उसकी थैली में बैठा रहता था, वह आज थैली से निकल कर जंगल में खेलने चला गया है । इसलिए उसे आज बड़ा अकेलापन लग रहा है । ऐसे में वह किससे बात करे और कैसे अपना मन बहलाए । उसे अपनी खाली थैली देख कर रोना आ रहा था ।
बन्दर ने कहा, रो मत दोस्त, जब तक तुम्हारा बच्चा लौट कर नहीं आता, तुम हमारे ही साथ रहो । हम खजूर तोड़ रहे हैं । आओ हमारी मदद करो । तुम भी हमारे साथ खजूर खाना ।
कंगारू ने पूछा, बन्दर भैया, मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकता हूँ ? मुझे तो पेड़ पर चढ़ना ही नहीं आता ।
कंगारू की बात सुन कर जिराफ और बन्दर उसे समझाने लगे । जिराफ ने कहा कि मेरे सिर पर चढ़ कर बन्दर खजूर तोडे़गा और नीचे फेंकेगा । नीचे जमीन गन्दीं है । गन्दीं जमीन पर गिर कर चीजें गन्दीं हो जाती हैं । गन्दीं चीजें खाने से बीमारी आती हैं और हम बीमार पड़ जाते हैं । हमें बीमार नहीं पड़ना है । इसलिए बन्दर जो भी खजूर नीचे फेंके, उन्हें जमीन पर गिरने से पहले तुम अपनी खाली थैली में कैच कर लेना । इस तरह कोई भी खजूर गन्दा नहीं होगा । बाद में जब तुम्हारी थैली भर जाएगी तो हम तीनों मिल कर खजूर खाएंगे और मजे करेंगे ।
उनकी योजना सुन कर कंगारू खुश हो गया । उसे भी बहुत तेज भूख लग रही थी । बच्चे को ढूँढने के चक्कर में उसने सुबह से कुछ नहीं खाया था ।
जब उसने खजूर कैच करने की बात सुनी तो उसने जिराफ और बंदर को बताया कि, जब वह आस्ट्रेलिया में था तो वह खूब क्रिकेट खेलता था । अपनी टीम के लिए दौड़ दौड़ कर खूब कैच पकड़ता था । जिसकी वजह से उसकी टीम हर बार मैच जीतती थी ।
कंगारू की बात सुनकर जिराफ और बन्दर जोश में आ गए और गाने लगे:
हम जब मिल कर काम करेंगे, तभी काम ठीक से कर पाएंगे । पहले करेंगे काम पूरा, फिर साथ-साथ खजूर खाएंगे ।।

जिराफ और बंदर का गाना सुनकर कंगारू को भी जोश आ गया । वह भी उनके साथ गाने लगा ।
बस, उसके बाद क्या था, उनकी एक टीम बन गयी । बन्दर पेड़ से खजूर तोड़ कर नीचे फेंकने लगा । हर खजूर को, कंगारू ने कैच किया और बड़ी सावधानी से अपनी झोली में रखा । इस तरह कोई भी खजूर न तो जमीन पर गिरा और न ही गन्दा हुआ ।

जब कंगारू की झोली ताजे और साफ खजूरों से भर गई तो उसने बन्दर से कहा, ‘‘ बन्दर भैया, अब बस करो । मेरी थैली लबालब भर गई है’’। इतने खजूर हम तीनों के लिए काफी हैं । बाकी कल तोड़ेंगे । अब नीचे उतर आओ ।
बन्दर ने कंगारू की बात सुनी और उसे शरारती नजरों से देख कर मुस्कुराने लगा । उसने पेड़ से खजूर का एक मोटा सा गुच्छा तोड़ा और मुँह में दबा कर जिराफ की गर्दन से फिसलता हुआ पीठ पर आया । आगे बढ़ कर पूँछ से फिसलता हुआ नीचे उतर आया ।
उसने आगे बढ़ कर पूरा गुच्छा कंगारू के सिर पर रख दिया और बोला, ‘‘बैलडन हमारी टीम के कैप्टन । आपके कैचों ने तो हमारी टीम को जिता दिया । हमारी टीम न बनती तो हम खजूर न खा पाते । चलिए खजूर पार्टी की जाए’’ ।
इसके बाद तीनों ने मिल कर मीठे मीठे खजूर खाए । खजूर तोड़ने के बहाने उन तीनों ने जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ सीख लिया कि जो काम अकेले नहीं हो पाते, वह एक दूसरे के साथ, सहयोग और सौहार्दता से सम्भव हो जाते हैं ।
अंत में तीनों टीम मैम्बरों ने मीठे खजूरों पर हाँथ रख कर, सदा एक दूसरे का सहयोग करने का निश्चय किया, जिससे वह आज सीखे पाठ को अपने आचरण में उतार सकें ।

क्या आप कहानी पढ़ने के लिए पॉइंट्स कमाना चाहते हैं? लॉग इन करने के लिए यहां क्लिक करें

क्या आप कमेंट पोस्ट करके पॉइंट्स कमाना चाहते हैं? लॉग इन करने के लिए यहां क्लिक करें

कमेंट

उत्तर छोड़ दें

फ़िल्टर
  • आयु वर्ग
    3–5 वर्ष (प्रारम्भिक पाठक)
    6–8 वर्ष (किशोर पाठक)
    9–12 वर्ष (किशोर पूर्व / प्री-टीन पाठक)
    13+ वर्ष (टीनएज पाठक)
  • कहानी का नायक
    img not found!
    जानवर
    बच्चे
    मशीनें और खिलौने
    जादुई वस्तुएँ
  • वातावरण
    img not found!
    जंगल
    शहर
    गाँव
    समुद्र
    रेगिस्तान
    स्कूल
    घर
  • कहानी का प्रकार
    img not found!
    रोमांच
    रहस्य
    कल्पना / फैंटेसी
    विज्ञान कथा
    हास्य / कॉमेडी
    नैतिक कहानियाँ
    मित्रता
    स्कूली जीवन
    परिवार
    भावनात्मक कहानियाँ
    त्यौहार / उत्सव
    प्रेरणादायक कहानियाँ
  • मूल भावना
    img not found!
    खुशी और आनंद
    जिज्ञासा
    साहस
    दयालुता
    आश्चर्य
    प्रेम
    सहानुभूति
    टीमवर्क / समूह कार्य
    आत्मविश्वास
    कृतज्ञता
    बाँटना / साझा करना
    क्षमा करना
  • जीवन सन्देश
    img not found!
    ईमानदारी
    जिम्मेदारी
    मेहनत / परिश्रम
    सम्मान
    मित्रता
    प्रकृति की देखभाल
    सुरक्षा जागरूकता
    आत्म-नियंत्रण
    समस्या-समाधान
    सहयोग
    अनुशासन
    दूसरों की मदद करना
  • कहानी का भाव
    img not found!
    मज़ेदार
    गंभीर
    हल्का-फुल्का
    रोमांचक
    विचारोत्तेजक
    जादुई
    नाटकीय

हमारे विषय में

अच्छा इंसान बनने के लिए कोई निश्चित पाठ्यपुस्तक नहीं होती।
एक अच्छा मनुष्य भीतर से जागने वाली प्रेरणा से बनता है।
यह प्रेरणा अच्छी और सार्थक साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होती है।
उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है।
हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
    अच्छी किताबें ही उन्हें महान बना देती हैं।