उद्देश्य
इस कहानी का उद्देश्य बच्चों को यह बताना है कि हमें किसी भी वस्तु का दुरूपयोग नहीं करना चाहिए ।
जिन चीजों को हम व्यर्थ नष्ट कर देते है, उनकी किसी न किसी व्यक्ति को आवश्यकता होती है ।
जब हम किफायती ढंग से किसी वस्तु का प्रयोग करते है तो किसी दूसरे व्यक्ति की आवश्यकता पूरी होती है ।
कहानी
एक घने जंगल में, तालाब के पास, एक छोटा सा घर था । इस घर में एक जेबरा रहता था । जेबरे ने यह घर बड़े चाव से रहने के लिए बनवाया था ।
जेबरे ने घर अपनी सहूलियत के अनुसार बनवाया था और उसे बड़े चाव से सजाया था । घर के बाहर एक छोटा सा हरा-भरा लाॅन भी था । लाॅन में हरी हरी घास लगी थी । वहाँ रंग बिरंगे फूलों वाली अनेकों क्यारियाँ थीं और क्यारियों के पीछे अनेकों छायादार वृक्ष भी लगे थे । लाॅन को और भी सुन्दर एवं सजीला बनाने के लिए उसमें तरह-तरह की लाइटें लगवायी गयी थीं ।
जेबरा रोज रात को मोटा पाइप लगा कर पहले पौधों को पानी देता था, और फिर घास को तरोताजा रखने के लिए, पाइप को खुला छोड़ कर लाॅन की सारी लाइटें जला देता था । पानी में जब लाइटों की छाया दिखाई पड़ती थी, तो घर और भी सुन्दर प्रतीत होता था ।
इधर-उधर घूमते जानवर जब जेबरे के घर के पास से गुजरते तो घर की बड़ी सराहना करते ।
वह सब जानवर मन ही मन इच्छा करते कि काश हमारा भी घर इसी तरह का होता, तो हम भी इसी तरह शान से रहते ।
हिरन जब कभी उधर से अपने परिवार के साथ निकलता तो अपने बच्चों से कहता, देखो कितनी सारी लाइटें जल रही हैं । इनकी रंगबिरंगी रोशनी में जेबरे का घर कैसा जगमगा रहा है ।
जब कभी बत्तखें उधर से निकलतीं और लाॅन को पानी से भरा देखती तो उन्हें लगता कि जेबरे का यह घर एक तालाब है । इतना सुन्दर तालाब देख कर उनका मन करता कि काश वह इस सुन्दर तालाब में तैर पातीं ।
आने जाने वाले जानवरों की बातें सुन कर जेबरा गौरान्वित अनुभव करता और मन ही मन अकड़ने लगता ।
कुछ दिन से जेबरे को यह डर सताने लगा था कि कहीं उसके मकान को देखकर उसके सगे सम्बन्धी या साथी उससे ईषर्या न करने लगें । वह ईषर्यावश कहीं उसके मकान को नुकसान न पहुँचाए ।
जेबरे ने अपना यह डर, अपने मित्र डुग्गू डौगी (कुत्ते) को बताया । वह उससे उसके साथ उसके सुन्दर घर पर रहने का अनुरोध करने लगा ।
पहले तो डुग्गू ने मना कर दिया लेकिन बहुत अनुरोध करने पर वह दोस्त की बात टाल नहीं पाया और उसी के घर में रहने लगा ।
दोनों दोस्त रोज घर की साफ सफाई करते, तरह-तरह से उसे सजाते, और रोज रात को लाॅन में पानी लगा कर वहाँ की सारी बत्तियाँ जला कर चैन से सो जाते । बड़े दिनों तक यही कार्यक्रम चलता रहा । दोनों दोस्तों को इस तरह मिल-जुल कर रहने में बड़ा मजा आ रहा था ।
उन्होंने कभी यह नहीं सोंचा था कि उनकी जिन्दगी इतने चैन से कटेगी ।
एक सुबह जब डुग्गू उठ कर लाॅन में आया तो उसने देखा कि लाॅन की सारी लाइटें बन्द हैं और पाइप मे पानी भी नहीं आ रहा है । जब पाइप को टटोलते हुए उसकी नजर नल की टोटी पर पड़ी तो उसने देखा कि पाइप नल से अलग पड़ा है और नल भी बन्द है ।
जब लाइट और नल सुबह बन्द मिले तो डुग्गू ने सोंचा कि शायद जेबरे ने ऐसा किया होगा । अत: वह खामोश रहा । थोड़ी देर में वह इस बात को भूल गया और काम में व्यस्त हो गया ।
अगले दिन जेबरा पहले उठ गया । जब वह लाॅन में गया तो उसको भी लाइटें और नल बन्द मिले । उसने सोंचा कि इन्हें डुग्गू ने बन्द किया होगा । अत: उसने इस बात को नजर अन्दाज कर दिया और अपने कार्यो में व्यस्त हो गया ।
अगले कई दिनों तक यही कार्यक्रम चलता रहा । जब जेबरे की निगाह बन्द नल और लाइटों पर पड़ती तो वह सोंचता कि शायद डुग्गू ने ऐसा किया होगा । जब डुग्गू को लाइटें और नल बन्द मिलते तो वह सोंचता कि इन्हें जेबरे ने बन्द किया होगा ।
एक दिन न जाने कैसे, दोनो दोस्त एक साथ उठे और लाॅन में गए । उस दिन भी सभी लाइटें और नल बन्द थे । उस दिन मौका अच्छा था । जेबरे ने डुग्गू से पूछ लिया कि यह लाइटें और नल कैसे बन्द हैं ? क्या तुमने इन्हें बन्द किया था ? डुग्गू आश्चर्य से चैंक उठा और बोला कि उसने इन्हें बन्द नहीं किया है । वह तो सोच रहा था कि इन्हें जेबरे ने बन्द किया होगा ।
डुग्गू की बात सुन कर जेबरा घबरा गया और बोला, ‘‘यहाँ रोज रात को कोई आता है । वह कुछ चुराने आता है । हमें उसका पता लगाना होगा । उसको पकड़ना होगा और दण्डित करना होगा’’ ।
जब जेबरे ने यही बात कई बार कही तो डुग्गू समझ गया कि जेबरा डर गया है। उसे ढांढस बंधाने की आवश्यकता है । यदि ऐसा नहीं किया गया तो डर हमेशा के लिए उसके मन में बैठ जाएगा । इस डर की वजह से वह बीमार भी पड़ सकता है ।
डुग्गू ने बड़े आत्मविश्वास के साथ जेबरे को समझाया कि वह डरे नहीं । वह चोर को आज रात में पकड लेगा, और उसे उसके हवाले करेगा ।
डुग्गू ने जेबरे को अपनी बहादुरी के कई संस्मरण सुनाए । उसने जेबरे को बताया कि पहले वह किसी फौजी के घर में रहता था ।फौजी ने उसे बम ढूँढने की ट्रेनिंग दी थी । उसने यह भी बताया कि उसने फौजी के प्रशि़क्षण का प्रयोग करके, अनेकों बम खोज निकाले थे और हजारों लोगों की जान बचायी थी ।
डुग्गू के बहादुरी भरे कारनामे सुनकर जेबरे के अंदर भी जोश आ गया । उसका डर भाग गया और वह सोचने लगा कि आज रात जब चोर उसकी गिरफ्त में होगा तो वह उसे बताएगा कि चोरी करना बुरी बात होती है । किसी को भी कोई चीज नहीं चुरानी चाहिए ।
डुग्गू ने जेबरे को बताया कि आज रात वह कमरे में नहीं, लाॅन में छिपकर सोएगा । वह सारी रात चैक्कना रहेगा । जैसे ही उसे चोर के पैरों की आवाज सुनाई देगी या फिर चोर की महक आएगी, वह उस पर कूद कर चढ जाएगा और धर दबोचेगा । यह भी तय हुआ कि डुग्गू चोर को पकड़ कर पहले जेबरे के पास लाएगा और फिर दोनों मिल कर उसकी बात सुनेंगे और जानेंगे कि उसने ऐसा क्यों किया ?
उस रात को सारी लाइटें जला दी गईं । नल खोल दिए गए और पानी को बहता छोड़ दिया गया । डुग्गू ने लाॅन में एक पेड़ के नीचे पत्त्तों का बड़ा सा ढेर लगाया और उसके अन्दर छिप कर बैठ गया।
बाहर से जेबरे ने चारों ओर नजर दौड़ाई और सब कुछ ठीक पाया । डुग्गू की पूँछ पीछे से दिखाई पड़ रही थी । उसने जा कर उसे पत्तों से छिपा दिया और यह कह कर सोने चला गया कि दोस्त चैकन्ने रहना, तुम्हें आज रात में चोर पकड़ना है और इस घर को बचाना है । दोस्त की बात सुन कर डुग्गू को जोश आ गया और वह दोस्ती का फर्ज़ निभाने के लिए तैयार हो गया ।
वह देर रात तक इन्तजार करता रहा कि कोई आहट हो तो वह कूदे और चोर को पकड़े । लेकिन वहाँ तो एक पत्ता भी नहीं खड़ का । वह दिल में जोश लिए पत्त्तों के ढेर में छिपा बैठा रहा ।
आधी रात के बाद में किसी पक्षी के पंखों की फड़फड़ाहट हुई । अचानक लाॅन की सारी लाइटें बन्द हो गयीं और पानी के बहने की आवाज भी बंद हो गयी । जैसे ही पानी बहने की आवाज बन्द हुई, डुग्गू पत्त्तों के ढेर में से बाहर कूदा । उसने देखा कि एक बड़ा सा मोटा उल्लू बिजली के स्विच बन्द करके पलट रहा है । वह पूरा जोर लगाकर उल्लू के ऊपर कूदा और उसे धर दबोचा ।
उल्लू डर गया और चिल्लाने लगा, तुम कौन हो भाई और मुझे क्यों दबोच रहे हो ? मैंने क्या किया है, जो मेरा गला दबा रहे हो ? मैं मर जाऊँगा, मुझे छोड़ो, जल्दी छोड़ो ।
डुग्गू उल्लू को मारना नहीं चाहता था अत: उसने उल्लू पर अपनी पकड़ ढीली कर दीं । उसको केवल इतनी तेज पकड़े रखा कि वह उड़ न जाए ।
पकड़ ढीली होते ही, जैसे ही उल्लू को सांस आई तो डुग्गू ने उससे पूछा कि तुम क्या चुराने यहाँ आए थे ? तुम्हें मेरे दोस्त के सामने सब बताना होगा । तुमको क्या सजा दी जाए यह वही तय करेगा ।
चलो मेरे साथ ।
डुग्गू की बात सुन कर उल्लू जोर-जोर से हँसनेे लगा । उसने कहा मैं चोर नहीं हूँ । तुम्हें गलत फहमी हुई है ।
उल्लू की भारी भरकम हँसी सुन कर जेबरा भी जग गया और बाहर आ गया । उल्लू ने उन दोनों को बताया कि वह चोर नहीं है ।वह इस जंगल का पहरेदार है । चूँकि उसे रात में ही हर चीज साफ-साफ दिखाई देती है इसी लिए उसे जंगल के राजा ने पहरेदार नियुक्त किया गया ।
पहरेदार होने के कारण उसका यह कर्तव्य है कि वह रात भर चैकन्ना हो कर जंगल में घूमे और देखे कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही है । यदि हो रही है तो उसे ठीक करे ।
उल्लू ने दोनों दोस्तों को बताया कि मैं चैकीदारी करते हुए जब रोज रात को यहाँ से गुजरता हूँ तो देखता हूँ कि लाॅन की सारी बत्त्तियाँ बेकार जल रही हैं । पानी व्यर्थ ही बह रहा है । उसने कहा कि रोज रात को तुम्हारा लाॅन तालाब बना रहता है ।
तुम्हारा घर इतना अच्छा है, लाॅन इतना सुन्दर है लेकिन ज्यादा पानी भरने से यह खराब हो जाएगा । जगह-जगह घर में सीलन आ जाएगी । जब तुम्हें घर खराब होने का कारण पता चलेगा तब तुम्हे अफसोस होगा कि तुमने ही अपना घर खराब कर लिया । बाद में तुम ही लोग सोचोगे कि तुमने इसे खराब होने से क्यूँ नहीं बचाया ।
उल्लू ने दोनों दोस्तों को बताया कि उनके व्यर्थ बिजली और पानी खर्च करने से आगे के घरों को बिजली और पानी नहीं मिलता है । वह लोग इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं ।
उल्लू ने दोनों मित्रों से हाथ जोड़ कर अनुरोध किया कि वह मिली सुविधाओं का उतना ही प्रयोग करें जितनी आवश्यकता है ।आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करें । ऐसा करने से जंगल के सभी निवासी उन्हे मिली सुविधाओं का प्रयोग कर सकेंगे और हँसी खुशी जीवन जी सकेंगे ।
उल्लू की बातें सुनकर जेबरा बोला, उल्लू भैया आप बहुत बुद्धिमान हो । आप केवल एक व्यक्ति के विषय में नहीं सोंचते अपितु जंगल के सभी निवासियों के बारे में सोंचते हैं । आपकी सोंच बहुत अच्छी है । हमें भी आप की तरह सोंचना चाहिए ।
हम आपकी उपस्थिति में, आपके सामने प्रतिज्ञा करते हैं, कि हम, हमको मिली किसी भी सुविधा का व्यर्थ प्रयोग नहीं करेंगे । उसे औरो के प्रयोग के लिए बचाएंगे और अपने इस जंगल को सभी के रहने के लिए सुविधाजनक स्थान बनाने में हर योगदान देंगे ।
दोस्तों की इस प्रतीज्ञा को सुन कर उल्लू बहुत खुश हुआ और यह कहता हुआ उड़ गया कि यदि जंगल का हर निवासी आप लोगों की तरह जागरूक हो जाए तो यह जंगल सच में स्वर्ग बन जाए ।