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परोपकार

By Bispl | 23 Jul 2026

उद्देश्य

इस कहानी का उद्देश्य, बच्चों को यह बताना है कि यदि हृदय में परोपकार की भावना हो तो छोटा व्यक्ति भी बड़े काम कर सकता है ।

कहानी

एक दिन एक छोटा सा जुगनू अपने घर से खेलने निकला और उड़ते-उड़ते जंगल में दूर चला गया । जंगल के हरे भरे पेड़ पौधे, रंग बिरंगे फूल और दूर पर्वतों से गिरते झरने उसे बहुत लुभा रहे थे । इन्हें देखकर वह बहुत खुश हो रहा था । इन सुन्दर नजारों कोे देखते देखते वह अपने घर से कितनी दूर आ गया, उसे पता ही नहीं चला । जब उसने ढलते सूरज को देखा तो उसे एहसास हुआ कि वह अपने घर से मीलों दूर आ चुका है । उसे लगा कि अब उसे लौटना चाहिए । जब उसने आकाश की तरफ नजर उठाई तो देखा कि सारे पंक्षी अपने घोसलों की तरफ लौट रहे हैं । उन्हें देखकर वह भी अपने घर की तरफ लौट लिया । अभी वह थोड़ी ही दूर लौटा था कि सूरज पूरी तरह से पहाड़ियों के पीछे चला गया और रात हो गयी । जुगनू को रात के अंधेरे में कभी भी डर नही लगता था, क्योंकि उसके पंखों के नीचे एक छोटी सी टार्च लगी थी । वह उस टार्च की रोशनी में अपने घर का रास्ता ढूँढते-ढूँढते घर लौट आया । घर लौट कर वह सीधे अपने बिस्तर में घुसा और सोचने लगा कि मैं कितना भाग्यवान हूँ कि मेरे पंखों में एक टाॅर्च लगी है । मैं इसके सहारे अंधेरे में भी उड़ सकता हूँ । अपना रास्ता खोज सकता हूँ और अपने घर बिना रास्ता भटके पहुँच सकता हूँ ।

यह सोचते-सोचते, उसे घर लौटते समय जो भयानक आवाजें सुनाई पड़ी थी उनका ख्याल आ गया । वह जंगली जानवरों की आवाजें थीं । जो रात में शिकार करने निकलते हैं और जंगल के भोले भाले जानवरों को मार कर खा जाते हैं । इन जानवरों का ख्याल आते ही जुगनू को डर लगने लगा । वह सोचने लगा कि मेरे पास तो टाॅर्च है । मैं तो इसके सहारे घर आ गया । लेकिन हर जानवर के पास टाॅर्च नहीं होती है । जब कभी वह जंगल के अंधेरे में खो जाते होंगे तो बिना टाॅर्च के घर कैसे लौटते होंगे ? पता नहीं घर लौटते भी होंगे या रास्ते में ही इधर उधर भटक जाते होंगे । जब वह भटक जाते होंगे, तो वह अवश्य ही जंगली जानवरों का शिकार हो जाते होंगे । यह सोच कर जुगनू डर के मारे रोने लगा । वह रोते-रोते सोंचने लगा कि क्या मैं अपनी टाॅर्च से, भटके हुए जानवरों को रास्ता दिखा सकता हूँ ? क्या मैं उन्हें रात के अंधेरे में, सुरक्षित घर पहुँचा सकता हूँ ? तभी उसे लगा कि मैं तो एक छोटा सा कीड़ा हूँ । मेरी टाॅर्च भी छोटी सी है । इस प्रकाश में मैं तो चल लेता हूँ लेकिन कोई बड़ा जानवर, भला कैसे चल पाएगा ? यदि वह चलने का प्रयास करे तो भी इधर उधर टकरा कर चोटिल हो जाएगा । और तब उसके दोस्त और परिवार वाले मुझें ही दोष देंगे कि खुद के पास तो प्रकाश है नहीं, चले थे सहारा देने । इस प्रकार के विचारों में घिर कर बेचारा जुगनू दुखी हो गया । तभी जुगनू को याद आया कि एक दिन उसके पापा ने उसे बताया था कि यदि नकारात्मक सोचोगे तो एक के बाद एक नकारात्मक विचार आते चले जाएंगे । थोड़ी देर में तुम उनसे घिर जाओगे । अपने आपको कमजोर महसूस करने लगोगे और किसी भी समस्या का हल नहीं निकाल पाओगे । उन्होंने यह भी बताया था कि किसी भी समस्या का हल निकालने के लिए सकारात्मक सोच होना जरूरी है । जिस प्रकार चुम्बक लोहे को खींचता है, उसी प्रकार एक सकारात्मक विचार दूसरे सकारात्मक विचार को खींचता है । दूसरा सकारात्मक विचार तीसरे सकारात्मक विचार को खींचता है और इस प्रकार, तुम अनेकों सकारात्मक विचारों से घिर जाते हो और तुम्हें तुम्हारी समस्या का हल मिल जाता है । अपने पापा की बात याद आते ही जुगनू सोचने लगा कि मेरा प्रकाश भले ही कम हो, लेकिन यदि मेरे जैसे बीस-पचास जुगनू मिल जाएं तो हमारा सामूहिक प्रकाश, घने से घने अंधकार को भी मिटा सकता है । हम सब मिल कर एक टीम बना सकते हैं और अंधकार में भटक जाने वाले लोगों की मदद कर सकते हैं । टीम बनाने का ख्याल आते ही उसकी उदासी उड़न छू हो गई और वह प्रसन्नता से मुस्कुराने लगा । रात बहुत हो चली थी । उसे नींद आ रही थी । वह आँखों में नई उम्मीद लेकर, मीठी नींद सो गया । सुबह वह जल्दी उठ कर तैयार हुआ और दोस्तों से मिलने, घर से निकल गया । दोस्तों को जुगनू का विचार भा गया । वह सभी दौड़ कर गए और अपने दोस्तों और साथियों को बुला लाए । कुछ ही देर में सौ, दो सौ जुगनू इकट्ठा हो गए । लगभग आधे घंटे के भीतर कर्मठ जुगनुओं की एक टीम तैयार हो गयी ।

सभी जुगनुओं ने निश्चय किया कि वह सब मिल कर, आज रात से ही काम आरम्भ करेंगे । राह में भटके लोगों को रास्ता दिखाएंगे और उन्हे सुरक्षित, उनके घर पहुँचाएंगे । उस रात, तरबूज की फाँक सा चाँद आकाश में निकला था । चाँद के इर्द गिर्द तारे टिमटिमा रहे थे। ठंडी हवा भी धीरे-धीरे चल रही थी । आकाश में, रूई से सफेद बादल, ठंडी हवा के झोखों से आगे खिसक रहे थे । उन्हें देखकर ऐसा लगता था कि बादल रूके हुए हैं और चाँद चल रहा है । जंगल में भालू-माँ अपने चार बच्चों को थपकी दे कर सुला रही थी । बच्चों को नींद नहीं आ रही थी । लेकिन ठंडी हवा लगने से बच्चों की माँ को नींद आ गई । जरा देर में उसकी आँखें बन्द हो गयीं और वह जोर - जोर से खर्राटे लेने लगी । खर्राटों की आवाज सुन कर बच्चे निश्चिन्त हो गए कि माँ अब सो गई है । बच्चों ने जब आकाश की ओर देखा तो उन्हें लगा कि आकाश में चाँद चल रहा है । उनमें से एक बच्चा बोला, भाइयों आओ देखें चाँद कहाँ जा रहा है ? चलो हम भी उसके पीछे-पीछे चलते हैं । तीनों ने एक दूसरे की हाँ में हाँ मिलाई और घर से निकल लिए । चाँद तो आसमान में वहीं का वहीं रहा, लेकिन भालू के बच्चे आगे बढ़ते गए । आगे बढ़ते बढ़ते वह अपने घर से बहुत दूर निकल आए । जब हवा सारे बादलों को उड़ा कर अपने साथ ले गई तो आकाश साफ हो गया । वहाँ बादल का एक भी टुकड़ा नहीं रहा । साफ आकाश में चाँद रूका हुआ दिखने लगा । चाँद को रूका हुआ देख कर भालू के बच्चे खड़े हो गए । बड़ी देर तक वह यही सोचते रहे कि चाँद अब चलेगा कि तब चलेगा । लेकिन सच तो यह था कि चाँद को चलना ही नही था । भालू के बच्चे बड़ी देर तक खड़े चाँद के चलने की प्रतीक्षा करते रहे । जब वह खड़े-खड़े बोर हो गए तो उन्हें ध्यान आया कि उन्हें घर भी जाना है । कहीं ऐसा न हो कि माँ जग गई हो, और उन्हें अपने पास न पा कर परेशान हो रही हो । वह उल्टे पाँव वापस लौट लिए । थोड़ी दूर चल कर एक चैराहा आया । वहाँ उन्हें यह समझ में नहीं आया कि वह कौन सी सड़क पर जाए । हर सड़क पर अंधेरा था । हर सड़क अनजानी थी । अंधेरी सड़ कें देख कर बच्चे डर गए और रोने लगे । तभी अंधेरे और सन्नाटे को चीरती हुई, शेर की दहाड़ सुनाई दी । शेर की आवाज सुनकर भालू के बच्चे डर से थर-थर काँपने लगे । वह और तेजी से रोने लगे । वह चिल्लाए, बचाओ बचाओ कोई हमें बचाओ । बचाओ नही तो शेर हमें मार कर खा जाएगा । जंगल के अंधेरे में, जुगनुओं की टीम इधर उधर मंडरा रही थी । उन्होंने शेर की दहाड़ सुनी और भालुओं के बच्चों की सहायता-प्रार्थना भी सुनी । वह तुरन्त एकजुट हो कर आवाज की दिशा में आगे बढ़ लिए । उन्होंने अंधेरे में भालू के बच्चों को ढूँढ निकाला । इतना घना प्रकाश देख बच्चे सहम गए । इतना प्रखर प्रकाश उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था । वह प्रकाश से पूछने लगे कि आप कौन हैं ? क्या करते हैं ? और उनसे क्या चाहते हैं । इतने सारे प्रश्न एक साथ सुनकर सभी जुगनू मुस्कुराने लगे । उन्होंने भालू के बच्चों को ढाँढस बंधाया कि वह उनसे डरें नहीं । वह उनके दोस्त हैं । उन्होंने बच्चों को आश्वासन भी दिया कि वह उन्हें सुरक्षित घर पहुँचाएंगे । जुगनुओं की बात सुनकर, बच्चों के दम में दम आया । उन्होंने उनका धन्यवाद किया और उनके अच्छे इरादों की सराहना भी की । जुगनुओं की टोली, उन्हें प्रकाश दिखाते हुए उनके घर तक ले आई । बच्चों का अनुमान सही था । माँ जाग चुकी थी । बच्चों को अपने पास न पा कर वह बहुत परेशान थी । वह उन्हें जंगल में न जाने कहाँ-कहाँ ढूँढ आई थी । बच्चों के न मिलने पर वह उदास हो गई थी । वह मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी कि उसके बच्चे सही सलामत घर लौट आएं । जुगनुओं के सामूहिक प्रकाश में उसने बच्चों को दूर से आते देख लिया । जैसे ही वह पास आए, वह बच्चों को गले से लगा कर फूट-फूट कर रोने लगी । कुछ देर बाद बच्चों ने माँ का परिचय जुगनुओं की टीम से कराया । बच्चों की बात सुनकर माँ यह सोंचने लगी कि जुगनू कितने अच्छे हैं । भालू माँ ने जुगनुओं के काम की खूब सराहना की । उन्हें खूब आशीर्वाद दिया । उसने जुगनुओं का धन्यवाद किया । वह बोली रात बहुत हो गई है, लेकिन मैं तुम सबको ऐसे नहीं जाने दूँगी । वह दौड़ कर गई और शीशी भर कर शहद ले आई । भालुओं और जुगनुओं ने मीठा शहद खाया । जुगनुओं ने अपनी पहली सफलता पर भालुओं के लिए रोशनी नृत्य किया और बाद में उन्हें भी अपने साथ नचाया । भालुओं के लिए यह रात उनके जीवन की सबसे मजेदार रात थी । माँ भालू ने जुगनुओं से कहा, कि आगे आने वाले दिनों में, तुम सब रात रात भर काम करोगे । तुम्हें काम करते हुए जब भी भूख लगे तो मेरे घर शहद खाने आ जाना । मेरे दरवाजे तुम लोगों के लिए हमेशा खुले रहेंगे । जुगनुओं ने अपने प्रकाश में, भालुओं की एक परिक्रमा लगाई और मुस्कुराते हुए उड़ गए । आज की सफलता से जुगनुओं ने यह सीख लिया था कि व्यक्ति कितना भी छोटा क्यूँ न हो वह बड़े से बड़ा काम कर सकता है बस उसका इरादा बड़ा होना चाहिए ।

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