घने जंगल में एक आलसी लड़का रहता था, जिसका नाम अर्णव था। वह बहुत आलसी था, लेकिन दौड़ने में उसका कोई मुकाबला नहीं था। वह बिजली की तरह तेज़ दौड़ता था! अर्णव को सबसे ज़्यादा मज़ा अपनी पसंदीदा नदी के पास बैठकर आता था, जो जंगल के बीचों-बीच बहती थी। उसे नदी में छप-छप करना और पत्थरों पर कूदना बहुत पसंद था। पर पिछले कुछ दिनों से वह खुश नहीं था।
"आज मज़ा नहीं आ रहा," उसने अपनी दोस्त चिंकी गौरैया से कहा। चिंकी एक छोटी, फुर्तीली और बहुत प्यारी गौरैया थी, जो हमेशा अर्णव के पास ही रहती थी। "नदी का पानी इतना कम हो गया है कि मैं ठीक से खेल भी नहीं पा रहा हूँ। अब पहले जैसा मज़ा नहीं आता।"
चिंकी ने अपनी छोटी-छोटी आँखों से नदी को देखा। "तुम ठीक कह रहे हो, अर्णव। पानी सच में कम है। पर तुम तो बहुत अच्छे धावक हो, क्यों नहीं ऊपर जाकर देखते कि क्या हुआ है?"
अर्णव ने उबासी ली। "ऊपर तक जाना... उफ़्फ़! बहुत मेहनत लगेगी।"
चिंकी फुर्ती से उसकी कंधे पर बैठी। "पर तुम्हें मज़ा भी तो चाहिए, है ना? अगर हम पता लगा लें कि पानी कम क्यों है, तो हो सकता है तुम फिर से नदी में खूब मस्ती कर सको।"
अर्णव ने सोचा। यह बात तो सही थी। अगर नदी ठीक हो जाए, तो उसे फिर से मज़ा आएगा। "ठीक है, चिंकी। तुम उड़कर देखो, मैं तुम्हारे पीछे-पीछे आता हूँ।"
चिंकी फुर्र से उड़ गई और नदी के साथ-साथ ऊपर की ओर उड़ने लगी। अर्णव भी अपने तेज़ कदमों से उसके पीछे-पीछे दौड़ने लगा। थोड़ी देर बाद, चिंकी ने एक जगह पर रुककर चहचहाना शुरू कर दिया। "अर्णव! यहाँ देखो!"
अर्णव दौड़कर वहाँ पहुँचा। उसने देखा कि एक बड़ा पेड़ नदी के रास्ते में गिर गया था। उसकी टहनियाँ और पत्ते नदी के पानी को रोक रहे थे, जिससे पानी आगे कम पहुँच रहा था।
"ओह! यह तो मुश्किल है," अर्णव ने कहा। "इतना बड़ा पेड़ मैं कैसे हटाऊँगा?"
चिंकी ने कहा, "हम मिलकर कोशिश करेंगे। तुम अपनी ताकत लगाओ और मैं तुम्हें बताऊँगी कि कहाँ से हटाना आसान होगा। और तुम तो बहुत तेज़ दौड़ते हो, अगर कुछ और चाहिए तो जल्दी से ले आओगे।"
अर्णव ने अपनी आलस छोड़ी और कमर कसी। चिंकी ने उसे बताया कि कहाँ से टहनियाँ हटाई जा सकती हैं। अर्णव ने अपनी पूरी ताकत लगाई। वह बड़ी-बड़ी टहनियों को खींचता, पत्थरों को धकेलता और कभी-कभी दौड़कर कुछ छोटे औजार (जैसे एक मज़बूत लकड़ी) ले आता। चिंकी उसके सिर पर बैठकर उसे प्रोत्साहित करती रहती और बताती कि अगला काम कहाँ करना है।
धीरे-धीरे, अर्णव की मेहनत रंग लाई। कुछ ही देर में, उन्होंने पेड़ के रास्ते को काफी हद तक साफ़ कर दिया। जैसे ही रास्ता खुला, नदी का पानी तेज़ी से बहने लगा और नीचे की ओर जाने लगा।
अर्णव और चिंकी दोनों ने देखा कि नदी फिर से अपनी पुरानी रफ़्तार पकड़ रही थी। नीचे पहुँचकर, नदी फिर से भर गई, और उसकी लहरें पहले की तरह नाचने लगीं।
अर्णव की खुशी का ठिकाना न रहा। "चिंकी! तुमने कमाल कर दिया! देखो, नदी फिर से कितनी सुंदर लग रही है! अब मुझे फिर से मज़ा आएगा!"
वह खुशी-खुशी नदी में कूद पड़ा और खूब छप-छप करने लगा। चिंकी भी एक पेड़ पर बैठकर उसे देखकर चहचहाने लगी। अर्णव ने समझा कि अगर वह थोड़ी सी मेहनत कर ले, तो उसे बहुत ज़्यादा मज़ा आ सकता है। और दोस्त साथ हों तो कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है।
जीवन का अनमोल पाठ:
आलस्य त्यागकर और दोस्तों की मदद से, हम किसी भी समस्या का समाधान कर सकते हैं और जीवन में अधिक आनंद प्राप्त कर सकते हैं। अपनी प्रकृति और पर्यावरण का ध्यान रखना भी बहुत ज़रूरी है।