पहाड़ी रास्तों पर रहने वाली एक छोटी ट्रेन थी, जिसका नाम था चुक चुक। वह थोड़ी शर्मीली थी, लेकिन जब दौड़ने की बात आती, तो कोई उसका मुकाबला नहीं कर सकता था। पहाड़ों की हर पगडंडी और सुरंग उसे अपनी मुट्ठी में लगती थी। उसकी तेज़ रफ़्तार के चर्चे दूर-दूर तक थे।
चुक चुक का दिल बहुत बड़ा था। वह पहाड़ी गांवों में रहने वाले ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना चाहता था। उन्हें कभी अनाज पहुँचाना होता, तो कभी दवाइयाँ या बच्चों के लिए किताबें। लेकिन चुक चुक की एक और इच्छा थी - उसे खेलना बहुत पसंद था! वह सोचता, "अगर मैं मदद करने जाऊँगा, तो मेरा खेलने का समय कैसे मिलेगा? क्या मुझे अपनी मस्ती छोड़नी पड़ेगी?" यह सोचकर वह अक्सर उदास हो जाता और अपनी शर्मीले स्वभाव के कारण किसी से खुलकर बात भी नहीं कर पाता था।
उसका सबसे अच्छा दोस्त था, डम्बू हाथी। डम्बू बहुत समझदार, दयालु और ताक़तवर था। वह हमेशा चुक चुक को हँसाता और उसकी परेशानी समझ जाता था। एक दिन, एक दूर के गाँव से खबर आई कि वहाँ के बच्चों के लिए स्कूल की किताबें और कुछ खिलौने भेजने थे, लेकिन रास्ता बहुत मुश्किल था और कोई जाने को तैयार नहीं था।
चुक चुक ने सुना और मन ही मन सोचा, "मैं मदद करना चाहता हूं, पर मेरा खेलने का समय... मुझे नदी किनारे दौड़ना है और सूरज की धूप में चमकना है!" उसकी उदासी देखकर डम्बू ने पूछा, "क्या हुआ मेरे प्यारे दोस्त? तुम इतने चुप क्यों हो?"
चुक चुक ने धीरे से अपनी परेशानी बताई, "डम्बू, मैं उन बच्चों की मदद करना चाहता हूं, पर फिर मैं खेल नहीं पाऊंगा। मुझे लगता है कि मैं अपनी मस्ती खो दूंगा।"
डम्बू मुस्कुराया और प्यार से चुक चुक के इंजन पर अपनी सूंड रखी। "चुक चुक, क्या हो अगर हम मदद करने को भी एक खेल बना दें? सोचो, तुम अपनी तेज़ रफ़्तार से किताबें और खिलौने पहुंचाओगे। यह तुम्हारी दौड़ने की कला का सबसे अच्छा इस्तेमाल होगा! और फिर वापस आकर हम दोनों मिलकर नदी में पानी की बौछार से खेलेंगे, जैसे हम हर रोज़ करते हैं!"
चुक चुक की आंखों में चमक आ गई। "सच डम्बू? हम ऐसा कर सकते हैं? मदद और मस्ती दोनों?"
"बिल्कुल!" डम्बू ने उत्साह से कहा। "मैं तुम्हारी मदद करूंगा सामान लादने में और रास्ता भी दिखाऊंगा। यह एक बहुत बड़ा रोमांच होगा, एक नया खेल!"
चुक चुक और डम्बू ने मिलकर किताबें और खिलौने सावधानी से लादे। चुक चुक ने अपनी पूरी शक्ति से पहाड़ पर दौड़ लगाई। वह इतनी तेज़ी से जा रहा था कि हवा भी उसके साथ सीटियां बजाती लग रही थी और पेड़ों की डालियां उसे रास्ता दे रही थीं। डम्बू ने रास्ते में उसे मज़ेदार कहानियां सुनाईं और अपनी सूंड से ऊंचे पत्थरों को हटाकर रास्ता साफ किया। चुक चुक को लगा ही नहीं कि वह कोई काम कर रहा था, बल्कि उसे तो यह एक रोमांचक खेल लग रहा था, एक ऐसी दौड़ जिसमें उसे अपनी पूरी ताक़त दिखानी थी।
जब वे गांव पहुंचे, तो बच्चों ने चुक चुक और डम्बू को देखकर खूब तालियां बजाईं। किताबें और रंग-बिरंगे खिलौने देखकर उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने चुक चुक और डम्बू को गले लगाया और ढेरों शुभकामनाएं दीं। चुक चुक ने पहली बार इतनी सच्ची खुशी महसूस की। उसने देखा कि दूसरों की मदद करके कितनी अपार खुशी मिलती है। यह खुशी किसी भी खेल से ज़्यादा अच्छी थी।
वापस आते हुए, चुक चुक ने डम्बू से कहा, "डम्बू, तुमने सही कहा था! मदद करना भी एक बहुत बड़ा खेल है और इसमें तो और भी ज़्यादा मज़ा आता है! मुझे बिल्कुल नहीं लगा कि मैंने अपनी मस्ती छोड़ी।"
वे दोनों वापस आए और खूब मस्ती से खेले। चुक चुक ने समझ लिया कि दूसरों की मदद करने से हमारी खुशी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ जाती है। अब वह कभी नहीं झिझकता था ज़रूरतमंदों की मदद करने में और उसकी दौड़ने की कला अब और भी ज़्यादा काम आने लगी थी। चुक चुक अब एक शर्मीली ट्रेन नहीं, बल्कि एक खुश और मददगार ट्रेन बन गया था, जो अपनी दोस्ती और साहस से पहाड़ों में खुशियां फैलाता था।
जीवन मूल्य:
दूसरों की मदद करने से हमें जो खुशी मिलती है, वह किसी भी खेल या मनोरंजन से कम नहीं होती। जब हम मिलकर काम करते हैं और अपनी प्रतिभा का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करते हैं, तो बड़े से बड़े काम भी आसान और मजेदार बन जाते हैं। मदद करना और मज़े करना, दोनों एक साथ हो सकते हैं!