एक दिन, समुद्र तट पर एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई। एक पुराना, उलझा हुआ मछली पकड़ने का जाल लहरों के साथ किनारे पर आ गया। जाल इतना बड़ा और भारी था कि कोई उसे हिला नहीं सकता था। छोटी मछलियाँ और व्हेल के बच्चे उसके पास जाने से डरते थे। उनका पसंदीदा खेलने का स्थान खतरनाक हो गया था, और अब कोई भी मज़े नहीं कर सकता था।
जब डॉल्बी ने अपने दोस्तों को उदास देखा, तो वह भी दुखी हो गया।
वह जाल हटाना चाहता था ताकि सब लोग फिर से खेल सकें, लेकिन उसके शर्मीले स्वभाव ने उसे बोलने या कुछ करने से रोक दिया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। इसलिए वह अपने सबसे अच्छे दोस्त, हिरण धीरू के पास गया। धीरू दयालु, बुद्धिमान था और जब भी डॉल्बी अपने विचार साझा करता, वह हमेशा ध्यान से सुनता था। डॉल्बी ने धीरू को उस विशाल जाल के बारे में सब कुछ बताया, कि कैसे उसने उनके खेल के मैदान पर कब्जा कर लिया था, और वह कितना असहाय महसूस कर रहा था। धीरू ने ध्यान से सुना और मुस्कुराया। "डॉल्बी," उसने कहा, "तुम इतने चिंतित क्यों हो? तुम्हारे पास अद्भुत प्रतिभा है! तुम एक शानदार नर्तक हो। तुम्हारी पूंछ मजबूत है, और तुम्हारा शरीर बहुत फुर्तीला है। तुम अपने नृत्य कौशल का उपयोग करके जाल को क्यों नहीं हटा देते?" डॉल्बी ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा। "मेरे नृत्य कौशल? जाल को हटाने के लिए?" "बिल्कुल!" धीरू ने जवाब दिया। "तुम अपनी ताकतवर पूंछ से जाल को धीरे से धकेल सकते हो और अपनी फुर्तीली हरकतों से इसे सुलझा सकते हो। मैं किनारे से तुम्हारा मार्गदर्शन करूंगा, और ज़रूरत पड़ने पर, मैं उलझे हुए छोटे हिस्सों को खींचने में तुम्हारी मदद करूंगा।"धीरू के उत्साहवर्धक शब्दों ने डॉल्बी को आत्मविश्वास से भर दिया। उसने सोचा, "हाँ, मैं कम से कम कोशिश तो कर ही सकता हूँ!" शर्मीले छोटे व्हेल में साहस की एक नई चिंगारी जगी। उसने गहरी सांस ली और जाल की ओर तैरने लगा।
जैसे ही वह जाल के पास पहुँचा, डॉल्बी ने अपने नाचने के कौशल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उसने अपनी मजबूत पूंछ को धीरे-धीरे लेकिन ताकत से हिलाया। ऐसा लग रहा था मानो वह किसी मधुर धुन पर नाच रहा हो और धीरे-धीरे जाल को किनारे से दूर धकेल रहा हो। उसकी हर हरकत सुंदर और संतुलित थी, और धीरे-धीरे विशाल जाल हिलने लगा।
किनारे से धीरू उसे रास्ता दिखा रहा था। "थोड़ा बाईं ओर, डॉल्बी! अब थोड़ा दाईं ओर!" डॉल्बी ने अपनी पूरी ताकत और फुर्ती का इस्तेमाल किया। उसने अपनी पूंछ से जाल के उलझे हुए हिस्सों को ढीला किया और उन्हें सावधानी से गहरे समुद्र की ओर धकेल दिया। यह कठिन काम था, लेकिन डॉल्बी ने कभी हार नहीं मानी। वह जानता था कि उसके दोस्त उस पर भरोसा कर रहे हैं।
कुछ समय बाद, डॉल्बी और धीरू आखिरकार विशाल जाल को किनारे से दूर ले जाने में कामयाब हो गए। उन्होंने मिलकर उसे गहरे समुद्र में एक सुरक्षित जगह पर धकेल दिया जहाँ वह अब किसी को नुकसान नहीं पहुँचा सकता था।
जैसे ही जाल हट गया, छोटी मछलियाँ और व्हेल के बच्चे खुशी से उछल पड़े।
"डॉल्बी! डॉल्बी!" वे खुशी से चिल्लाए।
डॉल्बी उन्हें देखकर मुस्कुराया। वह अभी भी थोड़ा शर्मीला था, लेकिन उसका दिल खुशी से भरा हुआ था। उसने अपने डर पर काबू पा लिया था और अपने दोस्तों की मदद करने के लिए अपनी विशेष प्रतिभा का इस्तेमाल किया था। जल्द ही, सभी फिर से खुशी-खुशी एक साथ खेलने लगे।
जीवन का सबक
कभी-कभी हमें सही काम करने के लिए अपनी शर्म और डर पर काबू पाना पड़ता है। हर किसी के पास एक अनोखी प्रतिभा या विशेष क्षमता होती है जिसका उपयोग दूसरों की मदद करने के लिए किया जा सकता है। सच्चे दोस्त हमें प्रोत्साहित करते हैं, हमारा मार्गदर्शन करते हैं और मुश्किल समय में हमारे साथ खड़े रहते हैं।
साहस और मित्रता से हम बड़ी से बड़ी समस्याओं का भी समाधान कर सकते हैं।