उद्देश्य
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य, बच्चों को यह बताना है कि ‘‘हमें मुशकिल समय में घबराना नहीं चाहिए। ऐसे समय में हमें हिम्मत और सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए।ऐसा करने पर कठिन से कठिन समस्या का निदान हो जाता है’’।
कहानी
एक दिन की बात है, जेबरा, जंगल में, घने पेड़ की छाया में बैठा आराम कर रहा था। उसकी पीठ पर एक बड़ा सा घाव था, जिससे खून बह रहा था। घाव के कारण जेबरे को बहुत दर्द हो रहा था।
तभी पास से एक हाँथी गुजरा। जब हाँथी ने जेबरे का घाव देखा तो वह उसके पास गया और उसकी चोट के बारे में पूछने लगा।
जेबरे ने बताया कि उसे यह चोट, अभी थोड़ी देर पहले ही लगी है। इसी लिए उसे बहुत दर्द हो रहा है। वह चोट से राहत पाने के लिए, पेड़ के नीचे आ कर बैठ गया है।
हाँथी ने जेबरे कीे चोट को पास से देखा और बोला, ‘‘जेबरे भैया’’, तुम्हारे घाव में बहुत धूल लगी हुई है। इससे तुम्हारा घाव पक सकता है। तुम बीमार पड़ सकते हो। चलो मेरे साथ नदी किनारे चलो। मै नदी से सूँड़ में पानी भर कर तुम्हारा घाव धो दूँगा। वहीं पास में कछुआ रहता है। कछुए की उम्र बहुत लम्बी होती है। वह 150 साल का है। उसी से कोई अच्छी सी दवाई पूछ कर, तुम्हारी मरहम पट्टी कर दूंगा। तुम जल्दी ही ठीक हो जाओगे’’।
जेबरा पहले तो हाँथी की बात टालता रहा और कहता रहा कि मैं ठीक हो जाऊँगा। लेकिन हाँथी ने जब उससे बार-बार कहा तो वह राजी हो गया और उसके साथ चल पड़ा। नदी की तरफ जाते हुए वह हाँथी को बताने लगा कि यह चोट उसे कैसे लगी।
वह बोला, ‘‘मै और खरगोश बहुत अच्छे दोस्त हैं। आज सुबह वह मेरे घर आया और कहने लगा कि देखो कितना अच्छा मौसम है। कल रात भर ओस गिरी है। घास के मैदान हरे भरे हो गए हैं। चलो चल कर पहले घास खाते हैं। फिर वहीं पकड़म पकड़ाई खेलेंगे’’।
खरगोश और मैं दोनों मैदान चले गए। हम दोनों एक दूसरे से थोड़ी दूर पर घाँस खा रहे थे। तभी खरगोश को किसी के पैरों की आहट सुनाई पड़ी। उसने चैकन्ने हो कर इधर-उधर देखा। वहाँ कोई नही दिखाई दिया।
खरगोश ने फुसफुसा कर मुझसे कहा, ‘‘दोस्त जरा सतर्क रहना। यहाँ कुछ दिनों पहले शेर ने हिरन का शिकार किया था। हो सकता है कि वह फिर शिकार करने आए’’।
खरगोश की बात सुनकर मैने उससे कहा कि जब तुम्हें पता था कि यहाँ शेर आ सकता है तो तुम मुझे यहाँ क्यूँ ले कर आए?
मेरी बात सुनकर खरगोश बोला, ‘‘शेर जंगल में ही तो रहता है। जैसे हम जंगल में कहीं भी जा सकते हैं, वैसे वह भी तो कहीं भी जा सकता है। वह यहाँ भी आ सकता है, वहाँ भी आ सकता है, जहाँ भी जाएंगे वहाँ भी आ सकता है।
हम शेर के डर से अपने घरों में बन्द हो कर तो नहीं बैठ सकते। हमें हरदम खतरों से सतर्क रहने की आदत होनी चाहिए। हमें उनसे अपना बचाव करना आना चाहिए’’।
जेबरे को खरगोश दोस्त की बात समझ में आ गई। वह फिर से घाँस खाने लगा। लेकिन अब वह चैकन्ना था कि कहीं से कोई आ तो नहीं रहा है।
घाँस खा कर वह दोनों खेलने का मूड बना ही रहे थे कि उन्हें पास की झड़ियों से शेर आता दिखाई दिया।
शेर को देखते ही जेबरा डर गया। उसे लगा कि अभी शेर उसके ऊपर झपट्टा मारेगा और उसका काम तमाम हो जाएगा।
जेबरे को डरा हुआ देख कर खरगोश चिल्लाया, ‘‘ मुसीबत आ गई दोस्त। ध्यान रहे हमें घबराना नहीं है। इससे बच कर निकलना है’’।
दोस्त की बात सुनकर जेबरे को ध्यान आया कि जब वह छोटा था तो पापा जेबरा उसे बताया करते थे कि जब भी हम मुसीबत में हों तो हमें घबराना नहीं चाहिए। हमें बुद्धिमानी से काम लेना चाहिए। बुद्धि बड़ी से बड़ी परेशानी का हल निकाल देती है और संकट की घड़ी पार हो जाती है।
जेबरे ने शेर से निगाह हटा कर इधर-उधर दौड़ाई। उसने देखा कि उसके दाँयी ओर बहुत कटीली झड़ियाँ हैं। वह उस ओर खिसक लिया।
शेर ने देखा कि जेबरे का ध्यान कटीली झाड़ियों की तरफ है तो उसने उस पर छलांग लगा दी। पर जेबरा तो पहले से ही सतर्क था। वह अपनी जगह से थोड़ा हट गया।
शेर का पंजा उसकी पीठ पर लगा और वह घायल हो गया। उसके घाव से खून निकलने लगा। लेकिन वह बच गया। शेर झाड़ी में जा गिरा। उसके पैरों में काँटे चुभ गए और वह लंगड़ाने लगा।
लेकिन शेर ऐसे कैसे हार मान लेता। वह जेबरे पर दूसरा वार करने के लिए मुड़ा और आगे बढ़ा।
शेर को आगे बढ़ता देखकर खरगोश चिल्लाया, ‘‘जेबरे भइया, पकड़म पकड़ाई का खेल शुरू। मै भाग रहा हूँ, तुम्हें, मुझे पकड़ना है। पूरा जोर लगा कर दौड़ो और मुझे पकड़ो’’।
जेबरा समझ गया कि खरगोश इस मुसीबत की घड़ी को खेल बना कर संकट पार करा देना चाहता है।
जेबरा खरगोश के पीछे बड़ी तेजी से दौड़ा और खरगोश के आगे निकल गया। उसने पीछे मुड़ कर देखा, शेर उसकी आँखों से ओझल हो चुका था। दोनों दोस्तों ने राहत की सांस ली और आज उन्होंने सीख लिया कि चाहे मुसीबत कितनी ही बड़ी क्यूँ न हो, यदि बुद्धिमत्ता से काम लिया जाए तो आसानी से परेशानी का हल निकल आता है।
जब जेबरे ने अपनी बात समाप्त की तो हाथी बोला, ‘‘जेबरे भइया तुमने बुद्धिमानी से काम किया। घबराए नहीं, इसी लिए शेर के चंगुल से बच निकले। तुम्हारी बहादुरी को मेरा सलाम’’।
यह कहकर हाँथी ने नदी से अपनी सूँड़ में पानी भरा और उसका जख्म साफ करने लगा।
उन दोनों को देखकर नदी से बूढ़ा कछुआ बाहर आ गया और पूछने लगा, ‘‘क्या मैं अपना फस्टएड बौक्स लाऊँ’’? कछुए की बात सुन कर जेबरा और हाँथी दोनों सोचने लगे कि कछुआ कितना दयालु है। बिना बुलाए ही हमारी मदद करने आ गया।