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सुअर ने शेर का दिल जीता

By Bispl | 23 Jul 2026

उद्देश्य
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य, बच्चों को यह बताना है कि हमें डरना नहीं चाहिए। डर का मुकाबला सौहार्दपूर्ण ढंग से करना चाहिए। इससे न केवल अपने अन्दर का डर समाप्त होता है, बल्कि कभी-कभी स्थितियाँ इतनी अच्छी हो जाती हैं, जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर पाते हैं।

कहानी
एक जंगल में, ऊँचे से पथरीले टीले पर एक सुअर रहता था। सुअर शरीर से मोटा और ताकतवर था। उसके नथुनों के पास, सींग जैसे दो लंबे-लंबे दाँत थे। वह उन दाँतों से बड़े-बडे़ काम कर सकता था। जंगल में जब कभी कोई पेड़ रास्ते पर गिर जाता और जानवरों को इधर उधर जाने में परेशानी होती तो सारे जानवर उसी को बुलाते। वह दौड़ता कूदता जाता और झटपट से पेडा़ें को अपने दाँतों से धक्का देकर दूर ले जाता और रास्ता साफ कर देता।

उसने पहाड़ी पर, एक छोटे से गड्ढे में ढेर सारी कीचड़ भर कर अपना घर बना रखा था। वह रोज सुबह उठता और अपने दाँतों की एक्सरसाइज करता जिससे उसके दाँत दिन पर दिन मजबूत होतेजा रहे थे। वह दिन भर जंगल में, इधर-उधर घूमता, और खाता पीता रहता था। लेकिन रात को सूरज छिपने से पहले अपने घर सोने क लिए आ जाता था।

घूमते-घूमते उसे जो भी जानवर दिखाई पड़ता, उससे वह दोस्ती कर लेता। कुछ ही दिनों में हिरन, जेबरा, जिराफ आदि सब उसके पक्के दोस्त बन गए। जब कभी वह सारे दोस्त एक साथ होते तो खूब बातें करते, खाते-पीते और दिन भर जंगल में मस्ती करते।

जंगल में घूमते-घूमते जब उन्हें शेर की दहाड़ सुनाई पडत़ी तो सारे दोस्त डर जाते और जाकर दिन भर के लिए किसी गुफा में छिप जाते।

जब वह गुफा में छिपे होते थे तो उनके पास कोई काम तो होता नहीं था। वह एक दूसरे को शेर के कारनामे ही सुनाते रहते थे।

कभी वह शेर के हमलों का बखान करते, कभी वह उसके निर्दयी होने के किस्से सुनाते और कभी-कभी उसके बारे में मनगढ़ंत कहानियाँ सुनाते।

सुअर उनकी बातें सुनता रहता और सोचता रहता कि क्या सच में शेर वैसा ही है, जैसा कि उसके दोस्त बताते हैं या फिर वह एक ठीक ठाक जानवर है, जिससे दोस्ती की जा सकती है।

सुअर इससे पहले कभी शेर से नहीं मिला था। वह उसके स्वभाव को भी नहीं जानता था।

एक दिन सभी दोस्त शेर से डर कर गुफा में छिप कर बैठे थे। यह सुअर को अच्छा नहीं लग रहा था। वह बड़ी देर तक सोचता रहा कि कैसे शेर के डर से अपने साथियों को छुटकारा दिलाया जाए और जंगल में मौज मस्ती की जाए।

सुअर एकदम से उठ खडा़ हुआ और बोला चलो साथियों, शेर के पास चलें। उसे समझाएँ कि इस तरह जानवरों को डराना, धमकाना, उनका शिकार करना अच्छी बात नहीं है। जंगल सबका है। हमें मिल-जुलकर रहना चाहिए। एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए। चलो उससे दोस्ती करें।

यह कहकर सुअर, गुफा से बाहर चलने लगा। तभी उसके दोस्तों ने उसे पकड़ लिया। वह बोले, यह क्या कर रहे हो? पागल हो गए हो क्या? शेर जंगल का राजा है। वह बहुत ताकतवर है। वह किसी से दोस्ती नहीं करता है। जो भी उसके सामने आ जाता है, वह उसे मार देता है। वह तुम्हें भी मार डालेगा और हम लोग अपना एक अच्छा दोस्त खो देंगे।

दोस्तों के मना करने पर सुअर रुक गया, लेकिन उसके दिमाग में यह बात अखरती रही कि शेर को दोस्त नहीं बनाया जा सकता।

एक दिन वह जंगल में घूम-घाम कर अपने घर लौट रहा था। जैसे ही वह पहाड़ी टीले के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि शेर अपने बच्चों के साथ, उसके घर के रास्ते में बैठा हुआ है।

उसके बच्चे टीले की चोटी पर जाने की जिद कर रहे थे। शेर उसे मना कर रहा था। वह कह रहा था कि ऊपर जो का रास्ता पथरीला है। ऊपर बड़े-बडे पत्थर है। कोई भी पत्थर किसी भी समय, अपनी जगह से खिसक सकता है। पत्थर उनके ऊपर गिर सकता है और वह उसके नीचे दब सकते हैं।

शेर बच्चों को बड़ी देर तक समझाता रहा, लेकिन वह मान नहीं रहे थे। वह जिद किए जा रहे थे।

जब शेर ने पीछे गर्दन घुमाई तो बच्चे उसकी नजर बचा कर टीले के ऊपर भाग गए। शेर ने देखा कि पीछे सुअर खडा़ है। उसने सोचा कि यह सुअर मेरे बच्चों को मारने आया है। वह जोर से दहाड़ा और सुअर के ऊपर कूदा। 

शेर की दहाड़ से पहाडी़ के सारे पत्थर हिलने लगे।

उनमें से एक पत्थर अपनी जगह से खिसका और नीचे आने लगा।

सुअर ने देखा कि पत्थर शेर के बच्चों की ओर आ रहा है। बस जरा सी देर में पत्थर उनके ऊपर होगा और वह दबकर मर जाएंगे।

सुअर शेर से बच कर तेजी से ऊपर भागा और बच्चों के आगे निकल गया। उसने गिरते पत्थर को अपने लंबे-लंबे दाँतों के ऊपर रोक लिया।

सारा दृश्य देखकर शेर के बच्चे सहम गए। वह डर के मारे रोने लगे। पहाड़ी के नीचे शेर खड़ा सारा तमाशा देख रहा था। उसे उम्मीद नहीं थी कि उसके बच्चे बच जाएंगे। लेकिन वह बच गए।

सुअर बड़ी देर तक उस पत्थर को अपने दाँतों पर उठाए रहा। जब बच्चे शेर के पास पहुँच गए तो उसने पूरी ताकत लगा कर पत्थर को पहाडी़ के दूसरी ओर उछाल दिया। सब बच गए। आई आफत टल गई।

भारी पत्थर उसने, इतनी देर उठाए रखने से सुअर थक गया था। उसके पैर में काँटा चुभने से खून बहने लगा था। वह अपनी जगह पर बैठ गया। उसे बैठा देख कर शेर झट से पहाडी़ पर चढ़ आया। उसे पास आता देख कर सुअर डर गया। उसे दोस्तों की बातें याद आने लगीं कि शेर किसी का दोस्त नहीं होता। वह बेरहम होता है। वह भागना चाहता था लेकिन थके होने के कारण वहीं बैठा रहा। 
शेर उसके पास आ गया। उसकी आँख में आँसू थे। वह सुअर के पैर चाटने लगा। जैसे उसकी चोट पर दवाई लगा रहा हो। सुअर समझ गया कि शेर उसके पास धन्यवाद कहने आया है।

शेर ने सुअर से कहा कि मुझे गीदड़ ने बताया है कि तुमने जंगल के सभी जानवरों को दोस्त बनाया है।

तुम लोग दिन भर जंगल में मस्ती करते हो, खेलते हो, मौज मनाते हो। मैं भी आज से तुम्हारा दोस्त हूँ। मैं भी आज से अच्छे काम करूँगा। किसी को नहीं मारूँगा और तुम सबके साथ खेलूँगा और खूब मस्ती करूँगा।

यह सुनते ही सुअर उठ खड़ा हुआ और उसे अपने दोस्तों से मिलवाने के लिए चल पडा़ ।

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