पायलट

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पायलट भाग-1

ऊँचा उड़ने की चाह

इस बार जब आकाश के पापा का ट्राॅन्सफर एक बड़े शहर में हुआ तो वह अपने पूरे परिवार को ले कर इस शहर में आ गए। रहने के लिए उन्हें एक सरकारी बंगला भी मिला। लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि आकाश का एडमीशन किस स्कूल में कराया जाए। वह पिछले कई दिनों से, आकाश को स्कूल दिखाने ले जा रहे थे, लेकिन आकाश को कोई स्कूल पसन्द ही नहीं आ रहा था। आकाश को हर स्कूल में कोई न कोई कमी दिख ही जाती थी, और वह यह कह कर मना कर देता था कि, यह स्कूल अच्छा नहीं है। आकाश को हर स्कूल में कोई न कोई कमी दिख ही जाती थी, और वह यह कह कर मना कर देता था कि, यह स्कूल अच्छा नहीं है। मै इस स्कूल में नहीं पढ पाऊँगा। किसी स्कूल में उसे बिल्डिंग छोटी लगती थी, किसी स्कूल के बच्चे उसे नहीं भाते थे तो किसी स्कूल के

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टीचर, उसे गुस्सैल लगते थे। सप्ताह भर की खोज के बाद भी, उसे अपनी चाह का स्कूल नहीं मिला पाया था। अत: परिवार के सभी सदस्य परेशान थे कि इसका एडमीशन कैसे होगा। बस सेन्ट जे़वियर्स नाम का एक विद्यालय देखना बाकी था।
सभी की आशाएं उस स्कूल पर आकर ठहर गई थीं। पापा ने आकाश से साफ कह दिया था कि यदि उसे यह स्कूल भी पंसद नहीं आता तो उसके पास कोई अन्य विकल्प नहीं होगा। उसे उनकी पसन्द के स्कूल में पढ़ना ही होगा। आकाश ने पापा की बात ध्यान से सुनी, उनकी परेशानी समझी और मौन स्वीकृति दे दी। आकाश ने इस वर्श चैथी क्लास की परीक्षा पास की थी। वह पढ़ने में बहुत तेज था। वह हमेशा अच्छे नम्बरों से पास होता था। खेल कूद में भी उसकी विशेश रूचि थी। फुटबाॅल और क्रिकेट खेलने में उसका जवाब नहीं था। अगले बुधवार को जब वह स्कूल देखने गया तो बस देखता ही रह गया। स्कूल बहुत बड़ा था। उसमें खेलने के लिए दो, दो मैदान थे। पढ़ने के लिए अनेकों क्लास रूम थे। प्रयोगात्मक कक्षाओं के लिए

 
 

 

 

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अनेको प्रयोगशालाएं थीं। लाइब्रेरी, कैन्टीन, स्पोर्टस रूम और क्या-क्या नहीं था? आकाश को देखते ही स्कूल पसंद आ गया और उसने पापा से कह दिया कि "यह स्कूल, मेरा ड्रीम स्कूल है। मैं यहीं पंढूगा"। पापा ने उसका एडमीशन उसी स्कूल में करा दिया।
एडमीशन के बाद आकाश अपनी कक्षा में पहुँचा। कक्षा के सभी बच्चे पुराने थे। एक वही नया था। क्लास में घुसते ही कुछ बच्चे उसे देख कर मुस्कुराने लगे। कुछ बच्चे उससे मिलने के लिए अपनी डेस्क से उठ कर उसके पास आ गए और उसका नाम पूछने लगे। आकाश ने मुस्कुरा कर सभी को अपना परिचय दिया और बताया कि कुछ दिनों पहले ही उसके पापा का ट्राॅन्सफर इस शहर में हुआ है। अभी वह इस शहर में नया है। यहाँ उसके दोस्त भी नहीं बने हैं। लेकिन यहाँ सबसे मिलकर उसे बहुत अच्छा लग रहा है। बच्चों से बातें करते हुए आकाश ने देखा कि पीछे एक स्मार्ट सा बच्चा खड़ा है। वह उसे लगातार देखे जा रहा था। शायद वह भी आगे आकर उससे मिलना चाहता था। आकाश ने जब उसे गौर से देखा तो पाया कि

 
 

 

 

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वह बैसाखियों पर खड़ा है। उसके बाँयें पैर में कुछ समस्या थी। इसीलिए उसे चलने के लिए बैसाखियों का सहारा लेना पड़ता था। यह देख कर आकाश को दुख हुआ। उसने आगे बढ़ कर उस बच्चे से हाँथ मिलाया और पूछा, कि क्या वह दोनों, क्लास में पास-पास बैठ सकते हैं? उस बच्चे ने भी बड़ी गर्मजोशी के साथ हाँथ मिलाया और कहा, "हाँ हाँ दोस्त, मेरा नाम पंख है, हम दोनों साथ साथ बैठेंगे"। यह कह कर पंख, आकाश को ले कर अपनी सीट की ओर ले गया।
थोड़ी ही देर में टीचर आईं। टीचर को देखते ही कुछ बच्चे उनके पास आ गए और बताने लगे कि क्लास में आकाश नाम का एक नया बच्चा आया है। क्लास में वह और पंख साथ-साथ बैठा करेंगे। बच्चों की भोली बातें सुन कर टीचर मुस्कुराने लगीं और उनसे अपनी सीट पर जा कर बैठने के लिए कहा। टीचर ने आँख उठा कर क्लास की ओर देखा। पंख और आकाश शान्त भाव से पास-पास बैठे थे। टीचर ने आकाश को अपने पास बुलाया और एक एक बच्चे से उसका परिचय करवाया। आकाश ने अपना

 
 

 

 

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परिचय देते समय बताया कि फुटबाॅल उसका सबसे प्रिय खेल है। परिचय समाप्त होने के बाद टीचर ने बच्चों से हिन्दी की किताब निकालने के लिए कहा और बताया कि आज वह मुंशी प्रेमचन्द की लिखी कहानी, ईदगाह, पढेंगे। कहानी पढ़ने के बाद कहानी की विशेशताओं पर चर्चा भी करेंगे। सभी बच्चों ने अपनी किताबें खोल लीं। टीचर ने पंख से कहानी पढ़ने के लिए कहा। पंख पुस्तक से कहानी पढ़ने लगा। उसने जैसे ही गौरवशाली आवाज में कहानी पढ़नी शुरू की, क्लास का हर छात्र शान्त और गम्भीर हो गया। पंख ने सारे बच्चों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हर बच्चा उसके शब्दों को पकड़ कर कहानी की गहराइयों में उतरने लगा। हर बच्चे को लगने लगा कि वह साथियों के साथ मेला देखने जा रहा है। पंख ने कहानी इतने प्रभावी ढंग से पढ़ी कि कहानी का अंत होते होते बहुत से बच्चों की आँखों में आँसू आ गए। वह एक दूसरे से अपने आँसू छिपाने के लिए, इधर उधर देखने लगे। उसके पास बैठा आकाश कहानी सुनकर इतना भाव विहल हो गया कि वह टीचर से पानी पीने का बहाना बनाकर क्लास

 
 

 

 

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से बाहर चला गया। बाहर आकर वह सोचने लगा कि "पंख के पढ़ने का ढंग कितना प्रभावशाली है। इतनी अच्छी तरह तो वह भी नहीं पढ़ सकता"। इसके बाद धीरे धीरे समय बीतता रहा। स्कूल के घंटे बजते रहे। नई नई टीचरें आती रहीं। आकाश का परिचय लेती रहीं और अपना अपना पाठ पढ़ाती रहीं। कुछ ही दिनों में हर बच्चा दूसरे बच्चे की प्रतिभा से भली भांति परिचित हो गया। प्रतिभाओं के कारण ही आकाश और पंख की दोस्ती भी गहरी होती गई। हर रोज छुट्टी के बाद, या तो आकाश पंख के घर चला जाता था, या फिर पंख उसके घर आ जाता था। दोनों दोस्त, साथ साथ खेलते थे, होमवर्क करते थे। बाद में जो भी समय बचता था उसमें नई नई कहानियाँ पढ़ कर एक दूसरे को सुनाते थे। एक दिन जब दोनों दोस्त, स्कूल की छुट्टी के बाद घर जा रहे थे तो ऊपर आकाश में एक हवाई जहाज तेज आवाज करते हुए निकला। जहाज की आवाज ने दोनों दोस्तों को रोमांचित कर दिया। वह उत्साह से भर गए। वह उस जहाज को तब तक देखते रहे जब तक कि वह आँखों से ओझल नहीं हो गया।

 
 

 

 

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बातों बातों में पंख ने बताया कि वह पायलट बनना चाहता था। वह अपनी मम्मी को ले कर, आकाश में उड़ना चाहता था। वह उन्हें दिखाना चाहता था कि वह कितना लायक बेटा है। अपनी बात कहते कहते, पंख का गला रूंध गया। उसका दम घुटने लगा। उसकी आवाज गले में अटकने लगी। वह बोला, ’’जानते हो आकाश, मैं अब कभी पायलट नहीं बन पाऊँगा। तीन साल पहले, स्कूल जाते समय, एक कार मेरे पैर पर चढ़ गई थी। उस एक्सीडेन्ट में मेरा पैर चला गया। यह कह कर पंख रोने लगा। उसे पुरानी घटना याद आ गई। वह चक्कर खा कर गिरने ही वाला था, कि आकाश ने उसे पकड़ लिया। आकाश ने पंख के आँसू पोछे और ढाँढस बंधाया। वह बोला कि कोई अप्रिय घटना तुम्हारा पैर तो तोड़ सकती है, लेकिन तुम्हारे मनसूबों को नहीं। मेरी दोस्ती पर भरोसा रखो दोस्त। मै एक दिन तुम्हें पायलट जरूर बनाऊँगा। तुम हवाई जहाज उड़ाओगे। तुम्हारी मम्मी तुम पर गर्व करेंगी कि तुम कितने महान हो। तभी पास से एक आइसक्रीम बेचने वाला गुजरा। आकाश ने दो औरंज बार खरीदीं। दोनों दोस्त

 
 

 

 

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आइसक्रीम चूसते हुए, अपने घर की तरफ बढने लगे। एक दिन जब गणित वाली टीचर पढ़ा रहीं थीं तो क्लास में खेल वाले सर आए। उन्होनें बताया कि स्कूल की फुटबाल टीम का चयन होना है। जो विद्यार्थी टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं, वह अपना नाम लिखा दें। मंगलवार को एक प्रख्यात कोच आ रहे हैं। वही बच्चों की प्रतिभा को परखेंगे और टीम का चयन करेंगे। यह सुनते ही ढेर सारे बच्चों ने अपने नाम टीम सलैक्शन के लिए लिखवा दिए। क्लास के सभी बच्चे जानते थे कि फुटबाल, आकाश का सबसे प्रिय खेल है। वह फुटवाल टीम का कैप्टन बनना चाहता है। खेल-सर बच्चों के नाम ले कर चले गए, लेकिन आकाश ने अपना नाम नहीं लिखाया। यह देख कर पंख को बहुत आश्चर्य हुआ। उसने आकाश से पूछा कि उसने ऐसा क्यूँ किया तो पहले तो वह आनाकानी करता रहा लेकिन बार बार पूछने पर उसको बताना पड़ा। आकाश ने बताया कि वह कोई भी ऐसा खेल नहीं खेलना चाहता जिसे पंख न खेल पाए। वह केवल वही खेल खेलेगा जो पंख खेल सके। यह सुनते ही पंख की आँखे भर आईं। आँसू उसकी आँखों

 
 

 

 

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से गाल पर गिरने लगे। उसने कहा कि, "आकाश, तुम्हारी यह ज़िद्द ठीक नहीं है। तुम मुझे दुखी कर रहे हो। तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। तुम अच्छी तरह जानते हो कि मेरा पैर ठीक नहीं है। दौड़ना तो दूर की बात है, मै तो बिना सहारे के चल भी नहीं पाता हूँ। मै जिन्दगी में कभी भी फुटबाॅल नहीं खेल सकता। इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम भी नहीं खेलोगे और मुझे जिन्दगी भर जीत की खुशी से वंचित रखोगे"।
आकाश बोला, कोई बात नहीं दोस्त, मैं कोई दूसरा स्वप्न चुन लूँगा और तुम्हारे साथ खेल कर जीत की खुशी हासिल करूँगा। पंख ने आकाश की बात सुनी और बोला, "मुझे अपने साथ रखना चाहते हो न? तो लो! बन गई बात। हो गयी प्राब्लम सौल्व।" उसने अपनी दोनों बैसाखियाँ निकाल कर आकाश के सामने रख दीं और बोला, ’’मै अपनी इन बैसाखियों की कसम खा कर कहता हूँ कि फुटबाल के हर गेम में मै तुम्हारे साथ रहूँगा। जब तुम मैदान में प्रैक्टिस करोगे तब भी और जब मैच खेलोगे तब भी। मै मैदान के बाहर बैठ कर तुम्हारा खेल देखूंगा और

 
 

 

 

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तुम्हारा हौसला बढाऊँगा। जब तुम्हारा खेल रूकेगा तो मैं तुम्हारे लिए पानी ले कर मैदान में आया करूँगा। आखिर पानी पिलाने वाला भी तो टीम का महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता है। पंख की बातें सुनकर आकाश का दिल भर आया। दोनों दोस्तों की आँखें आँसुओं से भर गईं। आँसुओं के कारण हर चीज धुंधली दिखने लगी। ऐसा लग रहा था कि हर तरफ घना कोहरा छा गया है। पंख उसी कोहरे को अपनी बैसाखियों से हटाते हुए आकाश का नाम लिखाने चल पड़ा। आकाश को भी, उस कोहरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वह पंख का कंधा पकड़ कर उसके सहारे, उसके पीछे पीछे चल दिया।

 
 

 

 

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पायलट भाग-2

तैयारी ऊँची उड़ान की

आकाश का सलैक्शन स्कूल की फुटबाॅल टीम में हो गया था। फुटबाॅल कोच सप्ताह में दो दिन ट्रेनिंग देने के लिए स्कूल आते थे। टीम को खेल की बारीकियाँ बड़े चाव से समझाते थे। वह सभी बच्चों में उत्साह का संचार करते थे। वह सभी बच्चों को ऐसे प्यार करते थे कि मानो वह उनके अपने बच्चे हों। धीरे-धीरे कोच और बच्चों के बीच, आत्मिक सम्बन्ध स्थापित हो गया। सभी बच्चे उन्हें दिलो जान से चाहने लगे और उनके निर्देशों को पत्थर की लकीर मान कर उनका पालन करने लगे। आकाश से किए वायदे के अनुरूप, पंख भी उसके साथ मैदान पर जाता था। वह खेल तो नहीं खेलता था, लेकिन मैदान के बाहर बैठ कर आकाश को खेलते हुए देखता था। देखते देखते वह भी खेल के विशय में बहुत कुछ सीख गया। उसने जान लिया कि फुटबाॅल के खेल में अकेले अपने प्रयास से गोल करना

 
 

 

 

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सर्वथा असम्भव है। गोल करना एक टीम वर्क है। इसमें खिलाड़ियों को आपस में सामन्जस्य बैठाना होता है। एक दूसरे का सहयोग करना होता है, तभी गोल करना सम्भव हो पाता है। एक दिन पंख अकेले बैठकर सोंच रहा था कि हमारी जिन्दगी भी तो फुटबाॅल के मैदान जैसी ही है। हमें जिन्दगी में छोटे बड़े सभी तरह के काम करने होते हैं। लेकिन जब हम एक दूसरे का सहयोग करते हैं तभी हमें जीवन में बड़ी सफलता हासिल होती है। यह सोचते सोचते, जैसे ही पंख ने आँख उठाई तो देखा कि आकाश, मैदान में फुटबाॅल को ड्रिबल करते हुए प्रतिद्वन्द्वियों के गोल की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन प्रतिद्वन्दी टीम के दो चतुर सदस्य भी फुटबाॅल लपकने के लिए तेजी से आगे आ रहे थे। मैदान का दूसरा छोर एकदम खाली था और आकाश की टीम का एक सदस्य वहाँ फुटबाॅल मिलने की प्रतीक्षा कर रहा था। उसे देख कर पंख चिल्लाया आकाश, अनन्त को पास दो। आकाश ने पंख की बात सुनी और अनन्त को पास दे दिया। अनन्त ने आगे बढकर जोर से किक लगाई और गोल कर दिया। आकाश खुशी से कूद-कूद कर

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गोल, गोल, गोल चिल्लाने लगा। अनन्त के द्वारा किए गए गोल से आकाश ने भी सीख लिया, कि आपस में सामन्जस्य बैठाना एक लाभकारी कला है। इस कला में पारंगत खिलाड़ी ही बड़ी सफलताएं प्राप्त कर पाते हैं। प्रैक्टिस समाप्त होते ही पंख खड़ा हुआ और अपनी बैसाखियों पर चलता हुआ मैदान में आ गया। आकाश के पास कोच-सर भी खड़े थे। पंख को मैदान में देखकर वह बहुत खुश हुए। वह बोले पंख, ’’मै देखता हूँ कि तुम रोज आकाश के साथ यहाँ आते हो। बाहर बैठ कर उसका खेल देखते और उसका मनोबल बढ़ाते हो। तुम्हारे प्रोत्साहन की वजह से ही वह इतना अच्छा खेलने लगा है। देखना एक दिन वह फुटबाॅल का बहुत बड़ा खिलाड़ी बनेगा’’। कोच-सर की बात सुन कर पंख शरमा गया। उसके गाल गुलाबी हो गए। उसको इस स्थिति से उबारने के लिए कोच-सर बोले आओ आकाश आज पंख के साथ खेलते हैं। कोच-सर की बात सुनकर आकाश खुशी से फूला न समाया। कोच-सर दोनों बच्चों को ले कर गोल पोस्ट की ओर बढने लगे।

 
 

 

 

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कोच-सर ने आकाश को गोलकीपरी करने को कहा और पंख से बोले, "मान लो, कि फुटबाॅल का वर्ड कप फाइनल चल रहा है। खेल समाप्त होने तक दोनों टीमें कोई भी गोल नहीं कर पाई हैं। एक्स्ट्रा टाइम में भी नहीं। अब पैनालटी शूटआउट के द्वारा खेल की जीत-हार का निर्णय होना है। आकाश की टीम कोई पैनाल्टी-गोल नहीं कर पाई है। तुम अपनी टीम के कैप्टन हो। अब तुम्हारी बारी है। याद रखो तुम्हें अपनी टीम को जिताना है। आओ पैनाल्टी शूट करो"। यह कह कर उन्होंने फुटबाॅल पंख के पैरों के पास रख दी। पंख फुटबाॅल को अपने पास देख कर बहुत गौरन्वित अनुभव करने लगा। उसने कभी सोचा भी न था कि कभी उसे गोल करने का मौका मिलेगा। उसने अपने दायें हाँथ के नीचे से बैसाखी निकाली और कोच-सर की तरफ बढ़ा दी। वह बोला सर इसे उधर रख दीजिए और मेरा दायाँ हाथ पकड़ कर थोड़ा पीछे ले चलिए। मै दौड़कर फुटबाॅल किक करूँगा। ठीक वैसे ही जैसे बड़े-बड़े खिलाड़ी करते हैं। कोच-सर पंख को सहारा देकर थोड़ा पीछे ले गए। पीछे पहुँच कर पंख ने पोज़ीशन ली

 
 

 

 

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और जोर से चिल्लाया, आकाश रेडी हो जाओ, गोल होने वाला है। पंख की आवाज सुनकर, आकाश गेंद लपकने की मुद्रा में तैयार हो गया। दोनों दोस्तों के लिए यह वर्ड कप से कम नहीं था। पंख अपनी बाँयी बैसाखी और कोच-सर के हाँथ का सहारा ले कर धीरे-धीरे आगे बढ़ा। फिर अचानक, उसने गति पकड़ी। कोच-सर भी उसका हाँथ पकडे़ पकड़े तेजी से आगे भागे। पंख ने फुटबाॅल पर निशाना साधा और जोर से तिरछी किक लगाई। फुटबाॅल आकाश की पहुँच से बाहर रही, और सीधे गोल पोस्ट के अन्दर घुस गई। पंख चिल्लाया, "देखो आकाश मैंने कहा था न गोल होने जा रहा है। उसकी बात सुन कर आकाश भी खुशी से झूम उठा और चिल्लाने लगा, ’’सर, सर पंख ने गोल कर दिया"। पहले उसने वहीं खड़े हो कर डान्स की मुद्रा में दो चार ठुमके लगाए और फिर पंख को गोदी में उठा लिया। पंख को आकाश की बाँहों में देख कर कोच-सर उसकी बैसाखी उठाने चले गए। बैसाखी ले कर लौटते हुए उन्हें लगा कि पंख ने उन्हें जो खुशी दी है, वह तो उन्हें बड़े बड़े मैचों में भी नहीं मिली। उन्होंने पंख को थोड़ा सा

 
 

 

 

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प्रोत्साहन देकर, यह समझ लिया था कि आप अपने शब्दों से, दूसरों के लिए एक काल्पनिक संसार बना सकते हैं जिसमें थोड़ी सी मानवता दिखा कर बड़ी से बड़ी खुशी हासिल की जा सकती है।

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पायलट भाग-3

करिश्मा आत्मविश्वास का

कहते हैं कि हर सुबह एक दरवाजे की तरह होती है, जो हमको रात के अन्धेरे से दिन के उजाले की ओर ले जाती है, कई बार नया अनुभव कराने, कभी नया पाठ पढ़ाने और कभी जिन्दगी का एक इम्तिहान पास करवाने। आकाश और पंख एक दूसरे के साथ, पढ़ते थे, खेलते थे, और मस्ती करते थे। वह दोनों हरदम हर परिस्थिति में एक दूसरे के साथ रहते थे। कठिन परिस्थितियों में एक दूसरे का मनोबल बढ़ाते थे, साहस देते थे और कहते थे कि सब ठीक हो जाएगा। उनके कहने में इतना बल होता था कि सब ठीक हो भी जाता था। एक दिन पंख स्कूल नहीं आया। उसकी अनुपस्थिति आकाश के लिए एकदम नई और कश्टदायी थी। वह दिन भर प्रतीक्षा करता रहा लेकिन पंख नहीं आया। दिन भर आकाश का मन बुरे ख्यालों में भटकता रहा। रह-रह कर उसे पंख की एक ही

 
 

 

 

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बात याद आ रही थी, जो वह बार-बार कहता था, कि "आकाश मुझे पायलट बनना था"। देखो मेरा पैर खराब हो गया। अब मै कभी पायलट नहीं बन पाऊँगा। यह कहते-कहते उसकी आँखे भर आती थी। इस बात के लिए आकाश उससे यह भी नहीं कह पाता था कि ‘‘सब ठीक हो जाएगा’’। अगले दिन भी पंख स्कूल नहीं आया। आकाश बुरी तरह से व्यथित हो उठा। उसने सोच लिया था कि आज वह पंख के घर जरूर जाएगा और उसके स्कूल न आने का कारण पता लगाएगा। यह सच है कि जब-जब मन बहुत परेशान होता है, तो कहीं न कहीं से कोई अच्छी खबर आ कर हमें थोड़ी सी खुशी दे जाती है। आकाश के साथ भी ऐसा ही हुआ। वह पंख को लेकर बहुत परेशान था। दूसरे पीरियड के बाद कोच-सर क्लास में आए और उन्होंने बताया कि आकाश तुम्हारा सलैक्शन शहर की फुटबाॅल टीम के लिए किया गया है। तुम्हें अगले महीने की दस तरीख को लखनऊ टीम के विरूद्ध मैच खेलना है। यह खबर सुन कर आकाश के मन में खुशी की लहर दौड़ गई और सारा क्लास उसके सम्मान में तालियाँ 

 
 

 

 

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बजाने लगा। उसने अपने आप से कहा, "पंख ने तुमसे वादा किया है कि वह तुम्हारा हर मैच देखने आएगा। वह जरूर आएगा। देखना सब ठीक हो जाएगा"। दिन भर आकाश स्कूल खत्म होने का इन्तजार करता रहा। उसे पंख के घर जा कर बताना था कि वह शहर की टीम का कैप्टन बन गया है। अगली 10 तारीख को उसे मैच खेलना है और वायदे के मुताबिक उसे मैच देखने आना है। आकाश शाम को जब, पंख के घर पहुँचा तो उसकी मम्मी घर का दरवाजा बन्द कर रहीं थीं। पूछने पर पता चला कि पंख बहुत बीमार है। उसे अस्पताल में एडमिट कराया गया है। वह उसके लिए खाना ले कर अस्पताल जा रही हैं। जब आकाश ने उनसे अस्पताल जाने का कारण पूछा तो उनकी आँख से आँसू गिरने लगे। वह जानती थीं कि आकाश अभी बच्चा है। पंख की हालत देख कर उसकी भी हालत खराब हो सकती है। वह बीमार पड़ सकता है। लेकिन जब आकाश ने उन्हें बताया कि उसके पास एक बहुत अच्छी खबर है, जिसे वह पंख को बताने के लिए दिन भर बेचैन था। खबर सुनाने के लिए ही वह यहाँ आया है।

 
 

 

 

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वह बोला, "आंटी देखिएगा, पंख यह खबर सुन कर एकदम ठीक हो जाएगा और अस्पताल के बिस्तर पर ही कूदने लगेगा"। आकाश की बातों ने, माँ की ममता को सहारा दिया। वह डाक्टरों की बातों से कहीं ज्यादा शक्तिशाली थी। आंटी को लगा कि इस समय पंख का दोस्त नही, एक नामी गिरामी डाक्टर उनके बेटे का इलाज करने आया है। उन्होंने उस नन्हें डाक्टर का हाँथ पकड़ कर सड़क पार की और उसे साथ लेकर अस्पताल की ओर चल पड़ी। आकाश का हाँथ थामे हुए वह सोंच रहीं थी कि यदि कहने वाले के मन में पक्का विश्वास हो तो कही गई बात असरदार हो जाती है। उसमें सुनने वाले के मन को प्रभावित कर सकने की अद्भुत शक्ति भर जाती है। वह कभी खाली नहीं जाती। वह दूसरों पर अपना असर दिखाती ही है। एक बच्चे के आत्मविश्वास ने, एक व्यस्क माँ के मन में आशा जगा दी कि आकाश अस्पताल पहुँचते ही पंख को ठीक कर देगा।

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पायलट भाग-4

पंख का आकाश से वादा

कई सड़कें, मोड़ और चैराहे पार करके मम्मी और आकाश अस्पताल पहँचे। पंख बिस्तर पर लेटा गहरी सांसे ले रहा था। उसकी आँखे एकदम लाल थीं। उसके होठ प्यास से सूख रहे थे। आकाश, पंख को देख कर सचमुच डर गया। उसने आंटी का हाँथ जोर से पकड़ लिया और घबरा कर पूछने लगा, "आंटी पंख को क्या हुआ?" आंटी ने उसकी ओर प्यार से देखा और अपने दिल का दर्द छिपाते हुए, मुस्कुरा दीं। कुछ बोली नहीं। आकाश को मम्मी के साथ आता देखकर पंख खुश हो गया। वह उठा और पलंग पर बैठ गया। वह अपनी दोनों बाहें फैला कर जोर से चिल्लाया, "आकाश, तुम आ गए। देखना अब मै जल्दी ही अच्छा हो जाऊँगा"। आकाश आंटी से हाँथ छुड़ा कर पंख की ओर भाग लिया। दोनों दोस्तों का प्यार देख कर आंटी की आँखों से आँसू टपकने लगे। पल भर 

 
 

 

 

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के लिए वह भूल गईं कि पंख बीमार है, और डाक्टर ने उसे लेटे रहने के लिए कहा है। थोड़ी देर बाद आॅन्टी ने डिब्बे से खाना निकाल कर, पंख को खिलाया और आकाश से बोलीं कि बताओ पंख को क्या खुशखबरी सुनानी है। मुझे भी सुननी है। आकाश पंख की ओर देखने लगा और बोला कि मेरा सलैक्शन शहर की फुटबाॅल टीम के लिए हो गया है। हम लोगों को अगले महीने की दस तारीख को लखनऊ की टीम के साथ मैच खेलना है। आकाश के सलैक्शन की खबर सुनकर पंख बोला, ’’आकाश तुम फिकर न करो, मैं तब तक ठीक हो जाऊँगा। मैं तुम्हारा मैच देखने जरूर आऊँगा। मैं जानता हूँ कि अगर मैं वहाँ नहीं आया तो तुम ठीक से नहीं खेल पाओगे। तुम्हारा ध्यान मुझमें ही उलझा रहेगा और तुम गोल नहीं कर पाओगे। पंख की बात सुन कर आकाश ने आगे हाँथ बढ़ाया और बोला, ’’करो प्रौमिस’’। पंख ने उसकी हथेली, अपनी हथेली में दबा ली और बोला प्रौमिस नहीं, पक्का प्रौमिस। मैं आऊँगा। लेकिन तुम भी मुझसे प्रौमिस करो कि तुम मुझे दो गोल से जिताओगे। इस बार आकाश ने पंख की

 
 

 

 

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हथेली जोर से दबाई और बोला पक्की प्रौमिस। दो गोल पक्के। आंटी बिस्तर के पास खड़ी, दोनों दोस्तों को देखती रहीं और उनकी बातें सुनती रहीं। पंख के चेहरे पर उपजी खुशी, उसका रंग-रूप बदल रही थी। उन्हें लगा कि पंख की हालत में अभी से सुधार होने लगा है। आकाश प्रौमिस तो पंख से कर रहा है, लेकिन असल में वह अपना वादा निभा रहा है, जो उसने अस्पताल आते समय उनसे किया था। बच्चों की प्रौमिसों ने आंटी के सारे शक और संशयों को पल भर में मसल कर रख दिया। उन्हें विश्वास हो गया कि अब उनके दुलारे बेटे को कोई भी ठीक होने से नहीं रोक सकता। उन्होंने आगे बढ़ कर दोनों बच्चों को गले से लगा लिया और स्वयं पंख को मैच में ले कर आने की प्रौमिस कर बैठी। मम्मी की प्रौमिस ने डाक्टर की तीन दवाइयों की तरह काम किया। पहली दवाई ने उनके सारे शक और संशय मिटा दिए। दूसरी दवाई ने पंख में हौसला जगा दिया कि उसे ठीक हो कर दोस्त की हौसला अफज़ाई करनी है, नहीं तो वह हार जाएगा। तीसरी दवाई ने आकाश के अन्दर वह जज्बा पैदा कर दिया, जिसे ले 

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कर उसे अपने दोस्त के लिए मैच खेलना है। रात हो चली थी, आंटी ने आकाश के पापा को अस्पताल बुला लिया था। पापा आकाश को लेकर उसके घर चले गए।

 
 

 

 

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पायलट भाग-5

एक पायलट की अनोखी उड़ान

आकाश, पंख से मिल कर घर लौट आया। खाना खा कर जब वह बिस्तर पर लेटा तो उसे पंख का पीला पड़ा चेहरा याद आने लगा। वह घबराने लगा कि उसे कुछ होने वाला तो नहीं है? फिर उसे उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा भी याद आया जो चलते समय उसने देखा था। पंख का खुशी से चमकता चेहरा, आकाश से बार-बार यह कहता रहा, "दोस्त मै जल्दी ही ठीक हो कर, तुम्हारा मैच देखने आऊँगा"। पंख की आवाज सुनते-सुनते न जाने कब उसे नींद आ गई और वह गहरी नींद में सो गया। उसके बाद आकाश अपनी पढ़ाई के साथ-साथ फुटबाॅल प्रैक्टिस पर भी ध्यान देता रहा। वह रोज सुबह जल्दी उठता, मैदान में दौड़ने जाता, स्कूल में पढ़ाई के बाद टीम के साथ गहन प्रैक्टिस करता। कोच, उसकी लगन देख कर उस पर विशेश ध्यान देने लगे। उठते बैठते सोते जागते उसके 

 
 

 

 

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दिमाग में बस यही बात चलती रहती थी, कि उसे हर हाल में यह मैच जीतना है। उसे अपने स्कूल को जिताना है। पंख से की गई प्रौमिस को निभाना है। इसके बाद आकाश दिनों दिन प्रैक्टिस करता रहा और अपने खेल को निखारता रहा। आखिर वह दिन आ गया, जिसका आकाश को इन्तजार था। स्टेडियम भीड़ से खचाखच भरा था। भीड़ की निगाहें खिलाड़ियों पर थी और खिलाड़ियों के खिलाड़ी, आकाश की निगाहें भीड़ पर थीं। उसकी आँखे भीड़ में पंख को खोज रहीं थी। टाॅस हो चुका था, सारे खिलाड़ी अपनी अपनी पोजीशन ले चुके थे। किसी भी समय रैफरी की सीटी बज सकती थी, मैच आरम्भ हो सकता था लेकिन आकाश को भीड़ में पंख नजर नहीं आ रहा था। उसकी चिन्ता अपने चरम पर थी। उसे लग रहा था कि आज वह मैच नहीं खेल पाएगा। जैसे ही रैफरी ने सीटी बजाई, आकाश ने देखा कि पंख अपनी मम्मी के साथ स्टेडियम में प्रवेश कर रहा है। पंख को देखकर, आकाश के अन्दर खुशी के एक लहर दौड़ गई। उसके अंदर जुनून का तूफान उठने लगा और उसके सिर पर 

 
 

 

 

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सवार हो गया। वह फुटबाॅल को लेकर प्रतिद्धन्दी के गोल पोस्ट की ओर बढ़ा। दूसरे टीम के चतुर खिलाड़ी ने उसके पैर से फुटबाॅल लेनी चाही, लेकिन वह उसे चकमा दे कर दूर निकल गया। उसके बाद, उसने दूसरे खिलाड़ी को चकमा दिया फिर तीसरे को। चैथा खिलाड़ी जैसे ही उसकी ओर बढ़ा, उसने तेजी से किक लगाई और फुटबाॅल गोलकीपर की उँगलियों को छूते हुए गोल पोस्ट के अन्दर घुस गई। खेल आरम्भ होने के एक मिनट के अन्दर ही आकाश ने पहला गोल कर दिया। सब अचम्भित रह गए कि यह क्या हुआ तालियों की गड़गड़ाहट और भीड़ की आवाजों से स्टेडियम गूँज उठा। माइक पर कमेन्ट्रेटर चिल्ला उठे, "यह तो कमाल हो गया"। "यह तो कमाल हो गया"। आकाश भीड़ की तरफ मुड़ा उसने देखा कि अभी पंख अपनी सीट पर ही नहीं पहुँचा था। वह रास्ते में ही खड़ा हो कर खुशी से चिल्ला रहा था "गोल, गोल..... वाह! आकाश तुम ग्रेट हो"। आकाश ने उसे देखा। दोनों दोस्तों की निगाहें मिलीं। उसने अपने दिल पर हाँथ रखा और पंख के आगे सिर झुका दिया। पंख समझ गया कि आकाश उससे कह रहा है कि यह गोल मैने तुम्हारे लिए किया। इसके बाद रेफरी ने फुटबाॅल को ले जा कर मैदान के बीचों बीच रखा। किक औफ हुआ और खेल फिर से आरम्भ हुआ।

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बड़ी देर तक फुटबाॅल इस खिलाड़ी के पैर से उस खिलाड़ी के पैर में उलझती रही। इस पाले से उस पाले में जाती रही। समय बीतता रहा खेल चलता रहा, लेकिन हाफ टाइम तक दूसरा गोल न हो सका। जब प्रतिद्धन्दी टीम के खिलाड़ी ब्रेक में आपस में बात कर रहे थे तो आकाश ने चुपके से उनकी बातें सुन लीं। उसने उनकी बातें सुनकर समझ लिया कि उनका मनोबल पूरी तरह से टूट चुका है। अब कोई गोल न होने देना ही उनकी रणनीति होनी चाहिए। उसने सोच लिया कि अब हमारी जीत सुनिश्चित है। अब हमे यह तय करना है कि हमें कितने गोल से जीतना है। उसने अपनी टीम के सारे सदस्यों को एकत्र किया। उन्हें पूरी बात बताकर, उनके अन्दर नव उत्साह का संचार किया। सारे साथियों ने एक दूसरे का हाँथ पकड़ कर एक गोला बनाया। आकाश उस गोले के बीचों बीच खड़ा हो गया। सारे साथी एक साथ चिल्लाए, "हम तुम्हें पास देंगे"। पंख चिल्लाया "मैं तुम्हें गोल दूँगा"। ब्रेक का समय समाप्त हुआ। टीमों ने पालों की अदला बदली की। किक औफ हुआ और फुटबाॅल खिलाड़ियों के पैरों में डोलने लगी। आकाश की टीम, लखनऊ की टीम के लिए आफत बनी हुई थी। 

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हाफ टाइम के बाद, जब आकाश फुटबाॅल लेकर विपक्षी टीम के डी में पहुँचा तो खिलाड़ियों में अफरा तफरी मच गई। प्रतिद्धन्दी टीम के किसी खिलाड़ी ने वहाँ फाउल कर दिया। रेफरी ने पेनाल्टी करार दी। प्रतिद्धन्दी टीम के सभी खिलाड़ी सिर पकड़ कर उस खिलाड़ी पर चिल्लाने लगे। आपस में एक युद्ध सा छिड़ गया। आकाश को यह समझते देर न लगी कि विपक्षी टीम में फूट पड़ने लगी है। यह फूट ही उनकी टीम को हराएगी। आकाश जानता था कि ऐसी स्थिति में गोल करना आसान होगा। आकाश ने पेनाल्टी ठोकने के लिए टीम के सबसे शक्तिशाली किकर को चुना। वह चाहता था कि जीत का श्रेय सबको मिले। केवल उसी को नहीं। आकाश ने उसे अपने पास बुलाया। उसकी तारीफ में बड़े-बड़े बोल बोले। 
उसने कहा कि दोस्त, तुम्हारी यह किक हमारी जीत सुनिश्चित करेगी। भीड़ को दिखाओ कि तुम क्या हो। उस किकर ने किक ऐसे निशाने से लगाई कि गोलकीपर समझ ही नहीं पाया कि फुटबाॅल कहाँ से होती हुई गोल के अन्दर घुस गई। गोल हो चुका था। 

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स्टेडियम की भीड़ हाँथ उठा उठा कर खुशी से चिल्ला रही थी। आकाश की निगाहें फिर भीड़ की तरफ मुँड़ी। आसमान की ओर उठे सैकड़ों हाँथों के बीच दो बैसाखियाँ भी अपनी खुशी व्यक्त कर रहीं थीं। आकाश के लिए यह खुशी अनमोल थी। मैच लगभग उसकी टीम के कब्जे में था। खेल फिर से आरम्भ हुआ। फुटबाॅल कुछ पैरों से टक्कर खाती हुई, उसके पैरों में जा फंसी। वह फुटबाॅल को पैरों से ढकेलता हुआ आगे बढ रहा था। आगे बढ़ता हुआ वह सोच रहा था कि पैनाल्टी वाला गोल वह स्वयं भी कर सकता था। लेकिन उसने वह मौका किसी और को दिया। अत: अभी उसकी प्रौमिस पूरी नहीं हुई है। उसने दूसरे गोल को अपनी ताकत बनाया और सारी ताकत को अपने पैरों में डाल दिया। वह प्रतिद्धन्दियों को चकमा दे कर आगे बढ़ता गया, आगे बढ़ता गया और अंत में गोल कर दिया। अब स्कोर 3-0 हो गया।
फिर से स्टेडियम में हर्शोल्लास का शोर मचा, हाँथ आसामान की तरफ उछले। हाँथ के बीच बैसाखियाँ भी चमकीं और खेल अपने अंतिम चरण में पहुँच गया। 

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मैच समाप्त होने के पाँच मिनट पहले, एक बहुमूल्य पास मिलने से, आकाश ने चौथा गोल कर दिया। यह टीम के द्वारा किया गया चौथा गोल था। जब मैच के समाप्ति की सीटी बजी तो स्कोर बोर्ड पर 4-0 लिखा दिख रहा था। मैच समाप्त होते ही, आकाश भीड़ में उछलती बैसाखियों की ओर मुँह करके घुटनों पर बैठ गया दंण्डवत प्रणाम करने लगा। पंख भीड़ में से ही चिल्लाया, दोस्त आज मैने भी अपना वादा पूरा किया और तुमने भी। हमारी दोस्ती हमेशा कायम रहे। कुछ मनचले लड़के, अपने साथ रंगीन धुँएं वाले पटाखे लाए थे। वह उन्हें जला जलाकर मैदान में फेकने लगे जरा देर में सारा मैदान रंगीन धुँएं के बादलों से भर गया। आकाश उठा और रंगीन बादलों को चीरता हुआ, पंख की ओर दौड़ने लगा। वह भीड़ में घुस गया। कोई उसकी पीठ थपथपाना चाहता था, कोई उससे हाँथ मिलाना चाहता था और कोई उससे गले लगाना चाहता था। लेकिन आकाश बीच में कहीं रूका नहीं। वह भीड़ को पार करते हुए पंख के पास पहुँच गया। वहाँ पहुँच कर उसने देखा की उसकी पूरी टीम खुशी से झूम रही है। सारे साथी उसे ढूँढ रहे थे। 

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वह उसे अपने कन्धों पर उठा कर मैदान के चक्कर लगाना चाहते थे। लेकिन वह उन्हें कहीं नज़र नहीं आ रहा था।
आकाश ने बिना किसी की परवाह किए, पंख को बाॅहों में भर लिया। बगल से निकाल कर उसकी बैसाखियाँ आंटी को दीं और पंख को अपनी पीठ पर लाद लिया। वह बोला, "चलो पायलट, बादलों के पार चलें। देखो, आज बादल कितने रंगीन हैं। अपना हवाई जहाज इन बादलों के बीच में घुसाओ। आज हमारी दोस्ती जीती है। ऊँची उड़ान के मजे लो"। पंख समझ गया कि जीत के इन क्षणों में भी, आकाश, उसके सपने को भूला नहीं है। उसे उसके पायलट बनने का सपना अच्छी तरह याद है। पंख ने मस्ती में आ कर आकाश के कान घुमा दिए और बोला, "लो प्लेन स्टार्ट हो गया। मेरे प्लेन मुझे रंगीन बादलों के बीच उड़ाओ"। 
यह सुनते ही आकाश पंख को लेकर मैदान में आ गया। शाम हो रही थी। ठण्डी हवाएं चलने लगी थीं। आकाश ने हवा में अपनी बाँहें फैला दीं। वह मैदान में दौड़ने लगा। टीम के सारे सदस्य पास आ गए और वह भी आकाश के पीछे-पीछे दौड़ने लगे। ठंडी हवा लगते ही पंख को लगा कि वह पायलट बन गया है। वह अपना प्लेन ले कर बादलों की चीरता हुआ आसमान में उड़ रहा है। स्टेडियम में बैठे दर्शक उन्हें देखकर जोर-जोर से तालियाँ बजाने लगे। 

 
 

 

 

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आकाश ने सिर मोड़ कर अपने पायलट को देखा तो उसकी आँखों से खुशी के आँसू गिर रहे थे। वह बड़ी देर तक पंख को पीठ पर ले कर मैदान में दौड़ता रहा। जब प्लेन आंटी के पास पहुँचा तो उनकी आँखें भी आँसुओं से भर चुकी थीं।
उन्होंने अपने पल्लू से आँखें पोछ पोछ कर उसे पूरी तरह गीला कर दिया था। आकाश ने पायलट को हिदायत दी, "पायलट साहब, जरा सम्भल कर। मम्मी की आँखों से पानी की बौछार हो रही है। रन वे गीला है। कहीं हम लोग फिसल न जाएं। लैंडिंग ठीक से करिए"। 
आकाश ने पंख को, आंटी की गोदी में उतार दिया और बोला, "लीजिए आपका पायलट, फ्लाइट से वापस आ गया। यह सुनते ही वह और तेजी से सिसकने लगीं। उन्होंने पायलट और प्लेन दोनों को गले से लगा लिया। उस शाम सारी भीड़ दोस्ती का करिश्मा देख रही थी और समझ रहीं थी कि जब दोस्ती दिल से होती है तो वह दोस्ती की मिसाल बन जाती है। उसी दोस्ती से दोस्त इतिहास में अमर हो जाते हैं।

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The End